प्रयागराज का संगम तट इन दिनों आस्था, भक्ति और उत्साह के अद्भुत संगम का गवाह बना हुआ है. महाशिवरात्रि से पहले माघ मेले में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंच रहे हैं. पावन संगम पर देशभर से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं. 'हर हर महादेव' के जयकारों के बीच वातावरण भक्तिमय हो उठा. इसी कड़ी में बिहार से 201 कांवड़ियों का दल प्रयागराज पहुंचा, जिसने संगम में डुबकी लगाकर जल भरा और शिवालयों में जलाभिषेक के संकल्प के साथ वापसी की.
संगम तट पर कतारबद्ध होकर जयकारे लगाते, भजन गाते और कदमताल करते कांवड़ियों का दृश्य माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बना रहा. बिहार के अलग-अलग गांवों से आए इन श्रद्धालुओं ने बताया कि वे चारधाम यात्रा पूरी करने के बाद प्रयागराज पहुंचे हैं. उनके लिए संगम का जल अत्यंत पवित्र है.

महाशिवरात्रि पर अपने गांव के शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए वे विशेष रूप से यहां से जल लेकर जा रहे हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि संगम का जल भगवान शिव को अर्पित करने से परिवार और समाज में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
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कांवड़ियों ने बताया कि माघ मास में संगम स्नान और शिव भक्ति का विशेष महत्व है. वे हर वर्ष ग्रुप में यात्रा निकालते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग आस्था से जुड़ सकें. इस बार 201 श्रद्धालुओं का दल पहुंचा, जिसने यात्रा को और भी विशेष बना दिया. समूह के साथ आए श्रद्धालुओं ने कहा कि यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और सामूहिक आस्था का उत्सव भी है.

माघ मेले के अंतिम दिनों में संगम क्षेत्र में भीड़ लगातार बढ़ रही है. प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधा के विशेष इंतजाम किए हैं. घाटों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग, मेडिकल कैंप और सुरक्षा बल तैनात हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
सुबह से लेकर देर शाम तक संगम तट पर स्नान, पूजन और दान का क्रम जारी है. कुंभ के बाद माघ मेला प्रयागराज की आस्था का सबसे बड़ा वार्षिक पर्व माना जाता है. संगम की रेत पर गूंजते जयकारे, स्नान करते श्रद्धालु और जल लेकर लौटते कांवड़िए... यह दृश्य बताता है कि आस्था की यह धारा सदियों से अविरल बह रही है.