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समंदर के भीतर छिपा है दुनिया का सबसे बड़ा झरना, जिसे नहीं देख पाती इंसानी आंखें

दुनिया का सबसे बड़ा झरना ना पहाड़ों पर है और ना ही किसी जंगल में. यह समंदर की गहराई में छिपा है, जहां हर सेकंड लाखों घन मीटर पानी नीचे गिरता है. ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच मौजूद यह रहस्यमयी जलप्रपात इंसानी आंखों से ओझल है.

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यहां पानी के अंदर गिरता है दुनिया का सबसे बड़ा झरना (Photo: Pixabay)
यहां पानी के अंदर गिरता है दुनिया का सबसे बड़ा झरना (Photo: Pixabay)

जब भी हम दुनिया के सबसे ऊंचे या विशाल झरने की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में पहाड़ों से गिरते दूधिया पानी की तस्वीर आती है. हम वेनेजुएला के एंजेल फॉल्स या अफ्रीका के विक्टोरिया फॉल्स की चर्चा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुदरत ने दुनिया का सबसे बड़ा झरना किसी ऊंचे पहाड़ पर नहीं, बल्कि समंदर की हजारों फीट गहराई में छिपा रखा है? यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि पानी के अंदर भला झरना कैसे हो सकता है, लेकिन ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच समुद्र के नीचे एक ऐसा वॉटरफॉल है जिसके आगे जमीन के सारे झरने छोटे नजर आते हैं. आखिर समंदर के सीने में छिपा यह रहस्यमयी झरना दिखता कैसा है और क्यों कोई इंसान इसे आज तक अपनी आंखों से नहीं देख पाया? चलिए, जानते हैं इस अदृश्य अजूबे की पूरी कहानी.

इस जादुई झरने का नाम है डेनमार्क जलडमरूमध्य जलप्रपात. यह समंदर की सतह के इतना नीचे छिपा है कि आप किसी जहाज पर खड़े होकर या किनारे से इसे कभी नहीं देख पाएंगे. इसकी विशालता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जमीन पर दुनिया का सबसे ऊंचा झरना एंजेल फॉल्स भी इसके आगे छोटा नजर आता है. जहां एंजेल फॉल्स की ऊंचाई करीब 980 मीटर है, वहीं यह समुद्री झरना लगभग 3,500 मीटर यानी साढ़े तीन किलोमीटर की गहराई में गिरता है. इतना ही नहीं, इसकी चौड़ाई भी करीब 480 किलोमीटर तक फैली हुई है.

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इस झरने से बहने वाले पानी की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे बड़ी नदी अमेजन से भी कहीं ज्यादा है. सालों तक यह कुदरती अजूबा इंसानों की नजरों से पूरी तरह ओझल रहा क्योंकि इसे देख पाना मुमकिन ही नहीं था.

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आखिर पानी के अंदर कैसे गिरता है पानी?

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि जब चारों तरफ पानी ही पानी है, तो वहां झरना कैसे बन सकता है? दरअसल, यह पूरा कमाल पानी के तापमान और उसके भारीपन (घनत्व) का है. होता यह है कि आर्कटिक महासागर का पानी बहुत ज्यादा ठंडा और खारा होता है, जिसकी वजह से वह भारी हो जाता है. वहीं दूसरी तरफ, अटलांटिक महासागर का पानी थोड़ा गर्म और हल्का होता है. जैसे ही ये दोनों आपस में मिलते हैं, भारी और ठंडा पानी तेजी से नीचे की ओर बैठने लगता है और गर्म पानी के नीचे से गुजरकर गहराई में समा जाता है. समुद्र के नीचे एक बहुत बड़ी पहाड़ी की ढलान (रिज) है, जहां से यह पानी तेजी से नीचे गिरता है और एक विशाल झरने की शक्ल ले लेता है.

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इंसानी आंखों से क्यों ओझल है यह विशालकाय झरना?

इस झरने के दिखाई न देने की सबसे बड़ी वजह इसकी गहराई है. ऊपर से देखने पर समंदर एकदम शांत और सपाट नजर आता है, लेकिन इसकी गहराई में हर सेकंड 30 से 50 लाख घन मीटर पानी का सैलाब बह रहा होता है. यह बहाव इतना ताकतवर है कि दुनिया की सबसे बड़ी नदियों का पानी भी इसके सामने कुछ नहीं है. वैज्ञानिक खास तरह के सेंसर और उपकरणों की मदद से इसकी गहराई और रफ्तार का पता लगाते हैं. भले ही हम इसे अपनी आंखों से न देख सकें, लेकिन समंदर के पूरे इकोसिस्टम को संतुलित रखने में इस अदृश्य झरने का रोल बहुत बड़ा है.
 

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