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आगर मालवा

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आगर मालवा (Agar Malwa) को 16 अगस्त 2013 को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का 51वां जिला बनया गया था. इसे मौजूदा शाजापुर जिले से अलग कर बनाया एक अलग जिला घोषित कियग गया. इसका प्रशासनिक मुख्यालय आगर शहर में स्थित है (Agar Malwa Administrative Headquarter). जिले का पश्चिमी भाग आगर पठार है जिसमें आगर मालवा जिले के प्रमुख क्षेत्र आते हैं (Agar Malwa Formation). इस जिले का क्षेत्रफल 2785  वर्ग किलोमीटर है (Agar Malwa Area). 

यह सिंधिया राज्य के दौरान एक हुए विभाजन का एक क्षेत्र है जिसमें कुछ महल अभी भी शहर की अदालत और अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए उपयोग किए जाते हैं. भारत की आजादी के समय अनुकूल मौसम और पानी की उपलब्धता के कारण यह एक छावनी क्षेत्र था. यह भारत की स्वतंत्रता के बाद, 1956 तक, मध्य भारत राज्य के तहत एक जिला था (Agar Malwa History). 

इस जिले बहुत सारे पर्यटन स्थल हैं. उनमें से बैजनाथ महादेव मंदिर, बगुलामुखी माता मंदिर- नलखेड़ा, मोतीसागर तालाब, केवड़ा स्वामी भैरवनाथ मंदिर- अगरी, सोमेश्वर महादेव मंदिर, मां तुलजा, भवानी गुफा वरदा, बालाजी पिपल्या खेड़ा, मंशापूर्ण गणपति चिपिया गौशाला प्रमुख हैं. ये सभी पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय से 75 किमी की परिधि में हैं (Agar Malwa Tourist Places).
 

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