अगर आपको WhatsApp या Telegram पर किसी अनजान ग्रुप में जोड़कर कहा जाए कि कुछ ही दिनों में आपका पैसा कई गुना हो जाएगा, तो सावधान हो जाइए. आपको 'VIP Stock Tips' या 'Guaranteed Returns' यानी तय मुनाफे का लालच भी दिया जा सकता है. यह साइबर ठगी का नया और तेजी से फैलता तरीका है.
गृह मंत्रालय (MHA) के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने देशभर के लोगों को ऐसी ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी है.
यह भी पढ़ें: आपके घर का CCTV कैमरा भी हो सकता है हैक! एक छोटी गलती लीक कर सकती है प्राइवेट वीडियो
I4C के मुताबिक, साइबर अपराधी अब वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं.
कैसे शुरू होती है ठगी?
साइबर अपराधी सबसे पहले लोगों को किसी अनजान वॉट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ते हैं. इन ग्रुपों में खुद को शेयर बाजार एक्सपर्ट्स, निवेश सलाहकार या किसी बड़ी वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले लोग मौजूद रहते हैं.
इसके बाद रोजाना शेयर बाजार से जुड़ी टिप्स, निवेश सलाह और फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते हैं. नकली मुनाफे के आंकड़े भी दिखाए जाते हैं. कई बार ग्रुप में पहले से मौजूद सदस्य भी फर्जी होते हैं. वे दावा करते हैं कि उन्होंने लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है. इसका मकसद सिर्फ नए लोगों का भरोसा जीतना होता है.
'Guaranteed Returns' का लालच
I4C ने अपनी एडवाइजरी में साफ कहा है कि शेयर बाजार या किसी भी निवेश में 'Guaranteed Returns' का दावा सबसे बड़ा खतरे का संकेत है.
यह भी पढ़ें: हैकिंग का नया तरीका: प्रॉम्प्ट इंजेक्शन अटैक! AI से कराई जा रही है हैकिंग, ChatGPT में आया लॉकडाउन मोड
असलियत यह है कि शेयर बाजार जोखिमों पर आधारित होता है. कोई भी वैध ब्रोकर, निवेश सलाहकार या वित्तीय संस्था तय और असाधारण मुनाफे की गारंटी नहीं दे सकती. अगर कोई व्यक्ति या संस्था 100 प्रतिशत सुरक्षित निवेश या तय मुनाफे का दावा करे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.
निजी लिंक से डाउनलोड कराया जाता है फर्जी ऐप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठग निवेशकों को Google Play Store या Apple App Store की बजाय निजी लिंक (Private Link) के जरिए ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं.
ये ऐप देखने में बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं. लेकिन इन्हें साइबर अपराधियों ने तैयार किया होता है. ऐप में नकली मुनाफा दिखाया जाता है ताकि लोग और ज्यादा पैसा निवेश करें.
ऐसे ऐप्स सिर्फ पैसे की ठगी नहीं करते. इनके जरिए मोबाइल फोन और निजी जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है.
पहले भरोसा जीतते हैं, फिर लगाते हैं बड़ा चूना
I4C के मुताबिक, यह ठगी एक तय रणनीति के तहत की जाती है. शुरुआत में निवेशक की छोटी रकम पर फर्जी मुनाफा दिखाया जाता है. कई बार थोड़ी रकम निकालने भी दी जाती है. इससे निवेशक का भरोसा बढ़ जाता है.
यह भी पढ़ें: Meta AI चैटबॉट से बोल कर हैकर्स ने 20 हजार लोगों का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया
इसके बाद उसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता है. जब निवेशक लाखों रुपये जमा कर देता है और पैसा निकालना चाहता है, तब असली खेल शुरू होता है.
उसे बताया जाता है कि पैसा निकालने से पहले टैक्स जमा करना होगा. कभी प्रोसेसिंग फीस मांगी जाती है. कभी अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे लिए जाते हैं. कई बार दूसरे शुल्क भी जोड़ दिए जाते हैं.
निवेशक जितना ज्यादा भुगतान करता है, ठग उतनी ही नई मांगें रखते जाते हैं. आखिर में अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है और संपर्क पूरी तरह खत्म हो जाता है.
मुंबई के रिटायर्ड वैज्ञानिक भी बने शिकार
I4C ने लोगों को जागरूक करने के लिए मुंबई के एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक का मामला भी साझा किया है. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें एक अनजान WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया. वहां खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोगों ने ज्यादा मुनाफे का लालच दिया.
बाद में उन्हें निजी लिंक के जरिए एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया गया. ऐप में लगातार भारी मुनाफा दिखाया गया. इससे उनका भरोसा बढ़ गया और उन्होंने बड़ी रकम निवेश कर दी.
यह भी पढ़ें: यूजरनेम फीचर पर वॉट्सऐप ने दिया जवाब, अब सरकार लेगी फैसला
लेकिन जैसे ही उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की, उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया. इस तरह उनकी मेहनत की कमाई फंस गई.
आखिर लोग क्यों फंस जाते हैं?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोगों की भावनाओं और लालच का भी फायदा उठाते हैं. जल्दी पैसा कमाने की चाह, शेयर बाजार की कम जानकारी और सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलता की कहानियां लोगों को प्रभावित करती हैं. कई लोग बिना जांच-पड़ताल के निवेश कर देते हैं. यही जल्दबाजी उन्हें साइबर अपराधियों का आसान शिकार बना देती है.
I4C ने दी ये अहम सलाह
असली ब्रोकर कभी नहीं करते ऐसी मांग
I4C ने साफ कहा है कि कोई भी वैध स्टॉक ब्रोकर या वित्तीय संस्था ग्राहकों से उनका ही पैसा निकालने के लिए अतिरिक्त रकम जमा कराने को नहीं कहती. अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके साइबर ठग होने की संभावना लगभग तय है.
ठगी हो जाए तो क्या करें?
अगर आपके साथ इस तरह की साइबर ठगी होती है या किसी निवेश प्लेटफॉर्म पर संदेह होता है, तो बिना देर किए शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी.
यह भी पढ़ें: रिलीज से पहले ही कैसे टेलीग्राम पर अपलोड हो जाती है फिल्म? बैन के बाद सतलुज लीक
पीड़ित तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें. साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करें.
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं. पहले ईमेल और एसएमएस के जरिए ठगी होती थी. अब WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म उनके नए हथियार बन गए हैं.
I4C का कहना है कि ऐसी ठगी से बचने का सबसे अच्छा तरीका जागरूक रहना है. निवेश से पहले हर जानकारी की स्वतंत्र रूप से जांच करें. किसी भी लालच में न आएं. परिवार और दोस्तों के साथ भी यह जानकारी साझा करें.
याद रखें, अगर कोई योजना बिना जोखिम के असाधारण या 'गारंटीड' मुनाफे का दावा कर रही है, तो वह निवेश का मौका नहीं, बल्कि साइबर ठगी का जाल भी हो सकता है.