सतलुज फिल्म (Satluj Film) भारत में विवादों के बाद OTT से हटा दी गई. लेकिन इसके बावजूद फिल्म की पायरेटेड कॉपी Telegram पर आसानी से मिल रही है. सिर्फ टेलीग्राम पर फिल्म का नाम सर्च करने से कई चैनल, ग्रुप और बॉट सामने आ जाते हैं.
यही वजह है कि अब टेलीग्राम पर पायरेसी को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है. हाल ही में केंद्र सरकार ने भी टेलीग्राम को नोटिस भेजकर पायरेटेड फिल्मों और OTT कंटेंट पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है और 15 दिन में जवाब मांगा है.
यह भी पढ़ें: सरकार ने टेलीग्राम को भेजा नोटिस, पायरेसी को लेकर मांगा जवाब, 15 दिन का समय दिया
सवाल यह है कि आखिर टेलीग्राम पर नई फिल्में इतनी तेजी से कैसे फैल जाती हैं? क्या टेलीग्राम खुद इन्हें अपलोड करता है? जवाब है- नहीं. टेलीग्राम एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है, लेकिन इसके कुछ फीचर्स का गलत इस्तेमाल करके पायरेसी का बड़ा नेटवर्क बनाया जाता है.
फिल्म की कॉपी कहां से आती है?
जब कोई फिल्म रिलीज होती है तो उसकी गैरकानूनी कॉपी कई तरीकों से बनाई जा सकती है. इसके बाद वही फाइल इंटरनेट पर पहुंच जाती है. इसके बाद शुरू होता है टेलीग्राम का नेटवर्क.
टेलीग्राम पर कैसे फैलती है पूरी फिल्म?
अगर आप टेलीग्राम पर किसी नई फिल्म का नाम सर्च करेंगे तो आपको कई चैनल दिख सकते हैं. इनमें से कुछ चैनल सीधे फिल्म नहीं देते. वे आपको एक Bot के पास भेजते हैं. यहीं से पूरा खेल शुरू होता है.
आप Bot पर जाते हैं. Bot आपसे स्टार्ट दबाने को कहता है. इसके बाद वह कहता है कि पहले दो या तीन टेलीग्राम चैनल जॉइन करो. जैसे ही आप चैनल जॉइन करते हैं, बॉट आपको डाउनलोड लिंक या वीडियो फाइल दे देता है.
यह भी पढ़ें: WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मचा बवाल, सकार ने बढ़ाई मोहलत, अब मेटा के पास 9 जुलाई तक का टाइम
कई बार एक ही फिल्म 480p, 720p और 1080p जैसी अलग-अलग क्वालिटी में भी मिल जाती है. India Today की जांच में भी ऐसा ही तरीका सामने आया. रिपोर्ट के मुताबिक सतलुज की पायरेटेड कॉपी शेयर करने वाले कई चैनलों में इसी तरह के बॉट इस्तेमाल हो रहे थे.
बार-बार चैनल क्यों बदल दिए जाते हैं?
अगर किसी चैनल पर शिकायत हो जाती है और वह हट जाता है, तो एडमिन तुरंत नया चैनल बना लेते हैं. पुराने चैनल पर पहले से एक मैसेज छोड़ दिया जाता है कि अब नए चैनल पर आ जाएं. इस तरह लाखों यूजर नए चैनल में पहुंच जाते हैं.
यानी एक चैनल बंद होने से पूरा नेटवर्क खत्म नहीं होता. इसी वजह से पायरेसी रोकना आसान नहीं होता. हाल ही में एक रिसर्च में भी बताया गया कि टेलीग्राम पर पायरेसी करने वाले लोग बॉट, बैकअप चैनल और कई चैनलों की चेन बनाकर काम करते हैं ताकि कार्रवाई होने पर भी नेटवर्क चलता रहे.
Bot से कमाई भी होती है
कई बॉट सिर्फ फिल्म नहीं देते. पहले यूजर से कुछ चैनल जॉइन करवाते हैं. इससे उन चैनलों के सब्सक्राइबर बढ़ते हैं. कुछ जगह ऐड्स दिखाए जाते हैं, कुछ जगह बाहरी वेबसाइट पर भेजा जाता है. यानी पायरेसी सिर्फ फिल्म बांटने का मामला नहीं है, इसके पीछे कमाई का पूरा सिस्टम भी चलता है.
सरकार ने अब क्यों दिखाई सख्ती?
भारत सरकार का कहना है कि टेलीग्राम पर बड़ी संख्या में पायरेटेड फिल्में और OTT कंटेंट शेयर किया जा रहा है. इसी वजह से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस भेजा है. सरकार चाहती है कि टेलीग्राम ऐसे चैनलों, बॉट और ग्रुप को जल्दी पहचानकर हटाए और दोबारा बनने से रोकने के लिए मजबूत सिस्टम तैयार करे.
यह भी पढ़ें: सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, इंस्टाग्राम पर एक्शन, 7 दिनों में देना होगा जवाब
इससे पहले सरकार हजारों टेलीग्राम चैनलों के खिलाफ भी कार्रवाई कर चुकी है, जिन पर बिना अनुमति फिल्में और दूसरे कॉपीराइट वाले वीडियो शेयर किए जा रहे थे.
क्या Telegram ऐसे कंटेंट को हटाता है?
टेलीग्राम का कहना है कि अगर किसी पब्लिक चैनल या बॉट पर कॉपीराइट का उल्लंघन होता है और सही शिकायत मिलती है, तो वह उस कंटेंट पर कार्रवाई कर सकता है. लेकिन प्राइवेट चैट और प्राइवेट ग्रुप अलग तरह से काम करते हैं. यही वजह है कि पायरेटेड कंटेंट को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है.
यूजर को भी रहना चाहिए सावधान
ऐसे चैनलों से फिल्म डाउनलोड करना सिर्फ कॉपीराइट का मामला नहीं है. कई बार इन बॉट और लिंक के जरिए यूजर को फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है. वहां मालवेयर, फिशिंग या दूसरे ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा भी हो सकता है. इसलिए साइबर एक्सपर्ट हमेशा सलाह देते हैं कि फिल्में सिर्फ आधिकारिक OTT प्लेटफॉर्म या सिनेमाघर में ही देखें.