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CIA से शुरू हुई कंपनी, भारत में 12 हजार लोगों को जॉब से निकाला, Oracle की कहानी चौंका देगी

अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी औरकल (Oracle) इस वक्त लोगों की छंटनी को लेकर सुर्खियों में है. बताया जा रहा है कि भारत में 12 हजार लोगों को निकाल रही है ये कंपनी. इतना ही नहीं, 30 हजार लोगों की छंटनी का टारगेट है.

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Oracle का पहला कस्टमर था CIA
Oracle का पहला कस्टमर था CIA

Oracle दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंनपियों में से एक है. इसकी शुरुआत साल 1977 में हुई थी और इसे लैरी एलिसन ने अपने साथियों के साथ मिलकर बनाया था. अभी ये कंपनी सुर्खियों में है और वजह निराश करने वाली है. दरअसल मल्टीपल रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि इस कंपनी ने भारत से लगभग 12 हजार लोगों की छंटनी कर दी है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी करीब 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की तैयारी में है. भारत में भी इसका असर दिख चुका है, जहां हजारों लोगों की नौकरी जा चुकी है और आगे भी कटौती जारी रह सकती है. भारत में हुई ये छंटनी ग्लोबल लेऑफ का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि कंपनी ने अब तक इस लेऑफ को लेकर ऑफिशियिल स्टेटमेंट जारी नहीं किया है.

आपको बता दें कि 2025 में ओरैकल (Oracle) के पास दुनियाभर में 1.62 लाख फुल टाइम इंप्लॉइज थे. जबकि भारत में मौजूदा समय में 30000 इंप्लॉइज हैं. इन्हीं में से 12000 लोगों के प्रभावित होने की खबर है.

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Oracle का पहला कस्टमर था CIA

ओरैकल की शुरुआत काफी दिलचस्प है. दरअसल 1977 में अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी CIA (सेंट्रल इटेलिजेंस एजेंसी) के लिए इस कंपनी ने अपना पहला प्रोडक्ट बनाया था.

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इस कंपनी का नाम Oracle भी CIA के एक प्रोजेक्ट के कोडनेम से आया है. कंपनी के फाउंडर लैरी एलिसन ने खुद पब्लिक प्लेटफॉर्म पर ये बात कही थी. शुरूआत में इस कंपनी का नाम Software Development Labs था.

ये कंपनी अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी इंडस्ट्री में बड़ी भुमिका निभाती आई है. ये भी कहा जाता है कि इस कंपनी ने अमेरिका के लिए काफी मॉडर्न सर्विलांस सिस्टम बनाए हैं.

Oracle क्या है और क्या काम करती है

इस कंपनी का सबसे बड़ा काम है डेटा संभालना. यानी बैंक, सरकारी सिस्टम, बड़ी कंपनियां, सबका डेटा ओरैकल के सॉफ्टवेयर और डेटाबेस पर चलता है. समय के साथ ओरेकल ने खुद को बदला और अब यह सिर्फ सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं रही.

आज यह क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े डेटा सेंटर बनाने का काम भी करती है. आसान भाषा में समझें तो कंपनियों का पूरा डिजिटल सिस्टम चलाने में Oracle बड़ी भूमिका निभाती है.

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बैंकिंग से लेकर टिकट बुकिंग का बैकएंड

अगर आप ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं, बैंकिंग ऐप इस्तेमाल करते हैं या किसी बड़ी कंपनी का सिस्टम चलता देखते हैं, तो बहुत मुमकिन है कि उसके पीछे Oracle का डेटाबेस काम कर रहा हो. इसकी सबसे बड़ी खासिय यही है कि यह भारी से भारी डेटा को भी बिना रुके और सिक्योर तरीके से चला सकता है.

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Oracle की असली पहचान उसका डेटाबेस सॉफ्टवेयर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर है. पहले कंपनियां अपने सर्वर खुद संभालती थीं, लेकिन अब Oracle उन्हें क्लाउड पर पूरा सिस्टम दे रही है.

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यानी कंपनी को हार्डवेयर खरीदने की जरूरत नहीं, ओरैकल ही सब मैनेज करता है, डेटा स्टोर करना, सिक्योरिटी देना, बैकअप रखना और जरूरत के हिसाब से स्केल करना.

यही इसका USP है, एक ही जगह पर पूरा डिजिटल सिस्टम. इसे ऐसे समझिए जैसे किसी कंपनी का पूरा IT दिमाग Oracle के पास हो.

छोटी-बड़ी हर कंपनियों को देती है सर्विस

यह कंपनियों को HR मैनेजमेंट, फाइनेंस सिस्टम, सप्लाई चेन और कस्टमर मैनेजमेंट जैसे सॉफ्टवेयर भी देता है. यानी एक कंपनी अपने कर्मचारियों की सैलरी से लेकर ग्राहकों के डेटा तक सब कुछ ओरैकल के जरिए चला सकती है.

यही वजह है कि बड़ी कंपनियां अलग-अलग टूल्स की जगह Oracle का पूरा सिस्टम लेना पसंद करती हैं, क्योंकि इससे काम आसान और एक जगह पर हो जाता है.

अब Oracle तेजी से AI और ऑटोमेशन पर फोकस कर रहा है. कंपनी ऐसे टूल बना रही है जो खुद डेटा समझें, फैसले लेने में मदद करें और इंसानों का काम कम करें.

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यही वजह है कि Oracle का मॉडल बदल रहा है, जहां पहले ज्यादा लोग सिस्टम संभालते थे, अब वही काम मशीनें और AI कर रही हैं. यही इसकी ताकत भी है और इसी वजह से कंपनी के अंदर बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं.

आखिर क्यों निकाल रही है 30,000 कर्मचारी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक Oracle इस समय भारी खर्च के दौर से गुजर रही है. कंपनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, खासकर बड़े डेटा सेंटर बनाने पर.

एक रिसर्च फर्म के प्रेडिक्शन के मुताबिक AI प्रोजेक्ट्स के लिए कंपनी को 8 से 10 अरब डॉलर तक की बचत करनी है, और यही वजह है कि कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है.

OpenAI और AI रेस का दबाव

Oracle की बड़ी चुनौती AI की रेस है. कंपनी ने OpenAI जैसे पार्टनर्स के साथ बड़े प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया है, जिनमें भारी खर्च हो रहा है. AI के लिए बड़े डेटा सेंटर, महंगे चिप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है.

ऐसे में कंपनियां अब कर्मचारियों पर खर्च कम करके टेक्नोलॉजी पर ज्यादा पैसा लगा रही हैं. यही वजह है कि Oracle जैसे बड़े नाम भी छंटनी कर रहे हैं.

IT सेक्टर के लिए क्या संकेत?

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Oracle की छंटनी सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है. यह पूरे IT सेक्टर में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है. अब कंपनियां ज्यादा कर्मचारियों के बजाय AI और ऑटोमेशन पर भरोसा कर रही हैं. यानी आने वाले समय में नौकरियों का पैटर्न बदल सकता है. जहां पहले हजारों लोग काम करते थे, वहां अब कम लोग और ज्यादा मशीनें काम करेंगी.

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