भारत में डिजिटल इंडिया की बात होती है. सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने, मोबाइल से काम करने और लोगों को दफ्तरों के चक्कर से बचाने के दावे किए जाते हैं. लेकिन जब कोई डिजिटल सुविधा काम करना बंद कर दे, तब आम आदमी क्या करे? क्या उसे अपना काम कराने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा? मेरा Indane गैस कनेक्शन इस सवाल की एक बड़ी मिसाल बन गया है.
मेरा गैस कनेक्शन झारखंड के रांची में है, जबकि मैं दिल्ली में रहता हूं. मेरा परिवार रांची में रहता है और वहीं इस गैस कनेक्शन का इस्तेमाल करता है. अब गैस सिलेंडर बुक करने की कोशिश करता हूं तो पता चलता है कि eKYC पूरी नहीं है. मैंने पिछले कई दिनों से मोबाइल के जरिए ई-केवाईसी करने की कोशिश की, लेकिन हर बार प्रक्रिया बीच में ही फेल हो जाती है. कभी फेस वेरिफिकेशन नहीं होता तो कभी स्क्रीन आगे नहीं बढ़ती.
मैंने रांची की S.K Gas Service से संपर्क किया. वहां से मुझे बताया गया कि eKYC कराने के लिए रांची आना होगा. अगर ऐसा नहीं किया तो गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा. यानी दिल्ली में रहने वाला एक ग्राहक सिर्फ इसलिए अपने शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाए, क्योंकि कंपनी का डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम उसके फोन पर काम नहीं कर रहा है.
अप्रैल से ही नहीं मिल रहा इंडेन नया गैस कनेक्शन - SK Gas Service Ranchi
यह सिर्फ मेरी परेशानी नहीं है. देश में लाखों ऐसे लोग हैं, जिनका गैस कनेक्शन उनके पुराने शहर, गांव या माता-पिता के घर पर है, जबकि नौकरी और दूसरे कारणों से वे किसी दूसरे शहर में रहते हैं. ऐसे लोगों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए, न कि एक नई परेशानी.
रांची की एस. के. गैसे सर्विस ने बताया कि कई महीनों से नया कनेक्शन नहीं मिल रहा है. यानी सिर्फ एक ऑप्शन बचता है. दिल्ली से रांची जा कर सेंटर पर वेरिफिकेशन कराया जाए या घर वालों को भूखा रखा जाए या फिर ब्लैक में गैस खरीदा जाए. रांची में ब्लैक मार्केट में 2200 से 2500 रुपये तक का एक गैस सिलेंडर मिल रहा है. क्या इसका मतलब ये लगाया जाए कि कालाबाजारी को बढ़ावा देने के लिए ये सब किया जा रहा है?
सरकार ने घर बैठे ई-केवाईसी की सुविधा दी, फिर एजेंसी क्यों बुला रही है?
पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियां एलपीजी ग्राहकों के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन को जरूरी बना रही हैं. इसका उद्देश्य फर्जी कनेक्शन खत्म करना, एक ही परिवार के नाम पर मौजूद गलत या डुप्लीकेट कनेक्शन की पहचान करना और सरकारी सब्सिडी का सही लोगों तक पहुंचना है. इस उद्देश्य पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. लेकिन सवाल इस प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 19 सितंबर 2026 को जारी अपनी जानकारी में साफ बताया था कि बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन के लिए ग्राहक को गैस एजेंसी तक जाना जरूरी नहीं है. Indane ग्राहक IndianOil ONE ऐप के जरिए घर बैठे यह प्रोसेस पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मचारी भी अपने मोबाइल ऐप से वेरिफिकेशन कर सकता है. ग्राहक गैस एजेंसी के शोरूम पर जाकर भी यह काम करा सकते हैं.
यानी सरकार खुद तीन रास्ते बता रही है. ऐसे में अगर कोई ग्राहक दिल्ली में बैठकर अपने फोन से सत्यापन नहीं कर पा रहा है तो उसे मदद देने के बजाय सीधे रांची बुलाना कितना सही है? कई बार इंडेन में शिकायत करने के बाद भी कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला. कस्टमर केयर की तरफ से भी यही बताया गया कि आप चाहे जहां भी हैं आपको खुद गैस एजेंसी जा कर वेरिफिकेशन कराना होगा, क्योंकि eKYC की डेट की खत्म हो गई है.
मेरा सवाल है कि अगर ऐप में तकनीकी खराबी है तो क्या एजेंसी या कंपनी के पास कोई दूसरा तरीका नहीं होना चाहिए? क्या ग्राहक को शिकायत दर्ज कराने, वेरिफिकेशन की समस्या ठीक कराने या किसी दूसरे अधिकृत माध्यम से अपनी पहचान साबित करने का विकल्प नहीं मिलना चाहिए?
ऐप फेल हो जाए तो ग्राहक की क्या गलती?
आजकल बैंकिंग से लेकर सरकारी दस्तावेजों तक, ज्यादातर सेवाओं में मोबाइल ऐप का इस्तेमाल बढ़ रहा है. लेकिन डिजिटल सुविधा तभी उपयोगी है, जब वह ठीक से काम भी करे.
आधार फेस ऑथेंटिकेशन में कैमरे, रोशनी, इंटरनेट कनेक्शन, चेहरे की सही पहचान और ऐप के तकनीकी सिस्टम की भूमिका होती है. कई बार इन वजहों से सत्यापन पूरा नहीं हो पाता. UIDAI भी अपने दिशा-निर्देशों में अच्छी रोशनी, साफ कैमरा और चेहरे को ठीक से फ्रेम में रखने की सलाह देता है.
लेकिन बार-बार कोशिश करने के बाद भी अगर वेरिफिकेशन नहीं हो रहा है तो ग्राहक के पास क्या विकल्प है? क्या उसे हर बार वही प्रक्रिया दोहराते रहना चाहिए?
यहां असली जिम्मेदारी तेल कंपनी की है और सरकार की है. अगर कंपनी किसी डिजिटल प्रक्रिया को मैंडेटरी बना रही है तो उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीकी समस्या आने पर ग्राहक को तुरंत मदद मिले. ऐप में फेल होने का कारण बताया जाए, शिकायत का नंबर मिले और समस्या ठीक करने की समय सीमा तय हो.