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Google का बड़ा खुलासा, 13 लाख डिवाइस में छिपा बैठा था वायरस, हो रही थी जासूसी

Google ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि एक एंड्रॉयड पार्टनर ने जानबूझकर 13 लाख डिवाइस के अंदर मैलवेयर को इंस्टॉल किया गया है. इसकी मदद से उनके फोन को कंट्रोल किया. इस दौरान उनके इंटरनेट का एक्सेस किया और विज्ञापन आदि दिखाया गया है.

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13 लाख डिवाइस में पहुंचाया वायरस. (Photo: Unsplash)
13 लाख डिवाइस में पहुंचाया वायरस. (Photo: Unsplash)

Google ने एक बड़ा खुलासा कर दिया है, जिसमें बताया है कि एक एंड्रॉयड पार्टनर ने जानबूझकर 13 लाख डिवाइस में मैलवयेर को इंस्टॉल किया गया है. इसके बाद एक बोटनेट को क्रिएट किया है, जिसके बाद यूजर्स के डिवाइस और उसके इंटरनेट का चोरी छिपे इस्तेमाल किया गया है.  

रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी के शेन्जेन स्थित मैन्युफैक्चचर वीडियोस्ट्रांग टेक्नोलॉजी ने जानबूझकर ऐसा किया है. गूगल ने बताया है कि यह मैलवेयर मुख्य रूप से एंड्रॉयड TV सेट-टॉप बॉक्स में मौजूद था. 

यह मैलवेयर मुख्य रूप से एंड्रॉयड TV सेट टॉप बॉक्स में मौजूद था. यह मैलवेयर मुख्य रूप से Android TV सेट-टॉप बॉक्स में मौजूद था. इसकी मदद से कंपनी ने यूजर्स की जानकारी के बिना 'आपराधिक सहयोगियों' को उनके इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी.

गूगल ने अपने ब्लॉगपोस्ट में कहा है कि हम पूरे विश्वास के साथ आकलन करते हैं कि वीडियो स्ट्रांग टेक्नोलॉजी ने आर्थिक लाभ उठाने के लिए इस बैकडोर और बॉटनेट को तैयार किया और डिवाइसों में इंस्टॉल किया. फिर उनको ऑपरेटर किया गया. 

कर्मचारी की गलती नहीं थी 

कंपनी ने बताया है कि यह किसी एक कर्मचारी की गलती या डेवलपमेंट के दौरान होने वाली कोई चूक नहीं है. गूगल ने अब वीडियोस्ट्रांग टेक्नोलॉजी को सर्टिफाइड एंड्रॉयड डिवाइस को बनाने और उनके लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने से प्रतिबंधत कर दिया है. 

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Videostrong Technology को बैन किया 

कंपनी के मुताबिक, यह अभियान किसी एक कर्मचारी की गलती या डेवलपमेंट के दौरान हुई किसी चूक का नतीजा नहीं था. Google ने अब Videostrong Technology को सर्टिफाइड Android डिवाइस बनाने या बेचने और उनके लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने से प्रतिबंधित कर दिया है.

वीडियोस्ट्रांग टेक्नोलॉजी एक ओरिजनल एक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) और ओरिजनल डिजाइन मैन्युफैरक्चरर (ODM) कंपनी है. यह अपने कस्टमर के लिए प्रोडक्ट तैयार करने के साथ-साथ खुद के भी प्रोडक्ट तैयार करती है. 

इस कंपनी की स्थापना साल 2011 में हुई थी. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इसके प्रोडक्ट पर 60 से ज्यादा देशों में 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच चुके हैं. 

बॉटनेट क्या होता है? 

गूगल ने बताया है कि बॉटनेट एक संक्रमित डिवाइसों का एक नेटवर्क होता है. हैकर्स मैलवेयर इंस्टॉल करने के बाद डिवाइस को अपने कंट्रोल में ले सकते हैं. 

संक्रमित डिवाइसों का इस्तेमाल विज्ञापन संबंधित धोखाधड़ी, डेटा चोरी और मैलवेयर को इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

यह भी पढ़ें: रूस के 'गूगल' पर अटैक... न पैसा निकाल पा रहे लोग, न खुल रहे डिजिटल लॉक

अधिकतर इंफेक्टेड डिवाइस एंड्रॉयड टीवी सेट टॉप बॉक्स  थे. हालांकि टेलीहेल्थ डिवाइस, कराओके मशीन और डिजिटल साइनेज सिस्टम में भी यह मैलवेयर पाया गया है. कंपनी ने बॉटनेस को कंट्रोल करने वाले डोमेन और सर्वर को बंद करने की लीगल एक्शन भी लिया है. 

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पहले भी आ चुके हैं कई मामले 

बॉटनेट का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. बीते साल जर्मनी के अधिकारियों ने BadBox नाम से एक बॉटनेट को ब्लॉक किया था. इसकी वजह से लाखों एंड्रॉयड डिवाइस प्रभावित हुए थे. इसके अलावा Vo1d नाम के एक अन्य बॉटनेट ने करीब 16 लाख एंड्रॉयड टीवी को संक्रमित किया था. 

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