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साइबरडेकिंग क्या है? युवाओं के बीच बढ़ते एंटी-एआई आंदोलन की अंदरूनी कहानी

नया ट्रेंड सामने आया है, जिसको साइबरडेकिंग कहा जा रहा है और यह युवाओं (Gen-Z) के एक ग्रुप में काफी पसंद किया जा रहा है. इसमें कुछ लोग खुद के कंप्यूटर या डिवाइस तैयार करते हैं, जो बेसिक फीचर्स और ऑफलाइन भी काम करने का काबिलियत रखते हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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साइबरडेकिंग से फुल कंट्रोल चाहते हैं. (Photo: AI Generated)
साइबरडेकिंग से फुल कंट्रोल चाहते हैं. (Photo: AI Generated)

AI के युग में कंप्यूटर-फोन से लेकर एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन आदि में इसका यूज हो रहा है. AI का मकसद ऑटोमेशन, चैटबॉट्स आदि पर है. वहीं युवाओं (Zen-Z) में एक वर्ग ऐसा भी है, जो AI से अलग दिशा में जा रहा है. नए ट्रेंड को साइबरडेकिंग कहा जा रहा है. 

साइबरडेकिंग, असल में साइबरडेक से बना है. साइबरडेक एक ऐसा डू इट योरसेल्फ (DIY) पोर्टेबल कंप्यूटर है, जिसको लोग खुद तैयार करते हैं. इसको आमतौर पर Raspberry Pi, छोटी स्क्रीन, कीबोर्ड और रीसाइकल या पुराने सामान का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है. 

Gen-Z के बीच साइबरडेकिंग लोकप्रिय क्यों हो रही है?

साइबरडेकिंग के तहत तैयार किए जा रहे कंप्यूटर बनाने के प्रोसेस को एंटी AI से सीध जोड़ना सही नहीं है. युवाओं (Gen-Z) के एक वर्ग का मानना है कि दुनियाभर की टेक्नोलॉजी का कंट्रोल कुछ कंपनियों के पास हैं. 

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साइबरडेकिंग मुख्यधारा की तकनीक से कैसे अलग है?

साइबरडेकिंग के तहत ऐसे लैपटॉप या डिवाइस तैयार किए जाते हैं, जो सिर्फ बेसिक फीचर्स और ऑफलाइन काम करने की काबिलियत के साथ आते हैं. इसमें बहुत ही कम मात्रा में डेटा शेयर होता है. यूजर्स को बेहतर कंट्रोल मिलता  है और AI बेस्ट इकोसिस्टम से मुक्त रहता है. 

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यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर ढेरों लोग खुद के साइबरडेक के वीडियो तैयार करके पोस्ट कर रहे हैं. हर कोई अपने-अपने स्टाइल का साइबरडेक बना रहे हैं, जिसमें कोई इसे पर्स के साइज में बना रहा है और कोई इसको पुराने गेमिंग बॉक्स में तैयार कर रहा है. 

साइबरडेकिंग के फायदों की बात करें तो यहां यूजर्स को पूरी तरह से कस्टमाइजेशन का ऑप्शन मिल जाता है. इसमें कम लागत आती है और यूजर्स को मनमुताबिक फीचर्स आदि मिल जाते हैं.

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साइबरडेकिंग को एंटी-एआई ट्रेंड क्यों माना जाता है? 

कई साइबरडेक ऑफलाइन मॉडल पर काम करते है, जिसकी वजह से ये डेटा ट्रैकिंग और क्लाउड पर डिपेंडेंसी कम रहती है. साथ साइबरडेकिंग के तहत तैयार होने वाले डिवाइस में यूजर्स खुद की क्रिएटिविटी को बेहतर तरीके से पेश कर पाते हैं.

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