TikTok ने जो दुनिया में शॉर्ट वीडियो का ट्रेंड शुरू किया था, वो अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा. शॉर्ट वीडियोज या रील्स की बाढ़ सी है. पहले इंस्टाग्राम फोटो बेस्ड ऐप था, लेकिन अब वहां सिर्फ रील्स हैं. इसी तरह अब फेसबुक के साथ भी होने जा रहा है. पहले फेसबुक की मेन फीड पर लिखे हुए पोस्ट्स और फोटोज देखने को मिलते थे, लेकिन अब ये बदल जाएगा.
Meta भारत में Facebook के एक नए वर्जन की टेस्टिंग कर रहा है, जिसमें ऐप खोलते ही सबसे पहले पूरा स्क्रीन वीडियो और Reels दिखाई देंगी. यानी Facebook का वह पुराना अंदाज, जिसमें News Feed सबसे पहले खुलता था, धीरे-धीरे पीछे जा सकता है.
अभी यह बदलाव सभी यूजर्स के लिए नहीं आया है. मेटा इसे भारत में चुनिंदा यूजर्स के साथ टेस्ट कर रहा है. जिन लोगों को यह नया इंटरफेस मिलेगा, उनके लिए फेसबुक खुलते ही वीडियो स्क्रीन सामने आ सकती है. हालांकि यूजर्स के पास वापस पुराने फीड फर्स्ट अनुभव पर जाने का विकल्प भी रहेगा और सामान्य फीड अलग टैब में उपलब्ध रहेगा.
फेसबुक अब फेसबुक कम और Reels ज्यादा होगा?
यही इस बदलाव की सबसे बड़ी बात है. फेसबुक की पहचान लंबे समय तक दोस्तों की पोस्ट, फोटो, लिंक, ग्रुप और कम्युनिटी से जुड़ी रही है. लेकिन मेटा अब प्लेटफॉर्म के सबसे बड़े फोकस को वीडियो की तरफ ले जाता दिख रहा है.
नए टेस्ट में ऐप खोलने के बाद यूजर को सीधे फुल-स्क्रीन वीडियो अनुभव दिया जा रहा है. इसका मतलब यह नहीं है कि फेसबुक से फोटो या टेक्स्ट पोस्ट गायब हो जाएंगे. बल्कि Meta यह देखना चाहता है कि अगर यूजर को ऐप में एंटर करते ही वीडियो दिखाया जाए तो वह ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर रहता है या नहीं.
यह बदलाव खास तौर पर भारत के लिए दिलचस्प है क्योंकि मेटा के लिए भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है. कंपनी के विज्ञापन आंकड़ों के मुताबिक भारत में फेसबुक की ऑडियंस 40 करोड़ से ज्यादा है. ऐसे में भारत में किया गया कोई भी बड़ा इंटरफेस टेस्ट काफी बड़े पैमाने पर यूजर्स के बिहेवियर को समझने का मौका देता है.
TikTok के बाद भारत बना Reels का बड़ा बाजार
भारत में Meta का वीडियो पर जोर नया नहीं है. 2020 में TikTok पर बैन के बाद इंस्टाग्राम ने भारत में Reels को तेजी से आगे बढ़ाया था. इसके बाद छोटे वीडियो भारतीय इंटरनेट यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए.
अब वही स्ट्रैटिजी फेसबुक पर भी दिखाई दे रही है. Meta ने पिछले साल यह भी कहा था कि फेसबुक पर पोस्ट किए जाने वाले सभी नए वीडियो रील्स के तौर पर शेयर किए जाएंगे, चाहे उनकी लंबाई या फॉर्मेट कुछ भी हो. कंपनी ने फेसबुक के वीडियो टैब का नाम भी Reels कर दिया था. यानी मेटा धीरे-धीरे फेसबुक पर वीडियो और Reels को कोई अलग फीचर नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के मुख्य अनुभव का हिस्सा बना रहा है.
Meta ऐसा क्यों कर रहा है?
इस बदलाव के पीछे सिर्फ डिजाइन बदलने की वजह नहीं है. असली खेल यूजर के समय का है. आज इंस्टाग्राम, YouTube और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर लोग लगातार स्क्रॉल करते हुए वीडियो देखते हैं. मेटा भी चाहता है कि फेसबुक इस आदत से पीछे न रहे. कंपनी के मुताबिक युवा यूजर्स फेसबुक पर अपने समय का करीब 60 फीसदी हिस्सा वीडियो देखने में खर्च करते हैं.
भारत में वीडियो की खपत भी बहुत बड़ी है. Meta की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक उसके प्लेटफॉर्म पर सर्वे में शामिल कम से कम 97 फीसदी यूजर्स ने रोज वीडियो देखने की बात कही थी, जबकि 89 फीसदी Gen Z यूजर्स ने Reels रोज देखने की बात कही.
क्या Facebook का पुराना Feed खत्म हो जाएगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. मेटा अभी इस नए अनुभव को टेस्ट कर रहा है. कंपनी ने कुछ यूजर्स के लिए पुराने फीड पर वापस जाने का विकल्प भी रखा है. इसका मतलब है कि अभी यह तय नहीं है कि भविष्य में हर फेसबुक यूजर को ऐप खोलते ही Reels दिखाई देंगी. लेकिन अगर टेस्ट के दौरान मेटा को बेहतर वीडियो एंगेजमेंट और ज्यादा यूजर टाइम मिलता है, तो इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है.