बॉलीवुड में जब भी खूंखार विलेन की बात होती है, तो दिमाग में सबसे पहले डैनी डेन्जोंगपा का चेहरा आता है. अपनी दमदार आवाज और खतरनाक अंदाज से पर्दे पर हीरो के पसीने छुड़ाने वाले डैनी की असली जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है. फिल्मों में उन्होंने खूब नाम कमाया, लेकिन उनकी कमाई का असली जरिया एक्टिंग नहीं, बल्कि शराब का बिजनेस बना. उन्होंने अपनी मेहनत से एक ऐसी कंपनी खड़ी कर दी, जो आज देश की बड़ी ब्रुअरी कंपनियों में गिनी जाती है.
दिलचस्प बात यह है कि डैनी ने इस बिजनेस के जरिए शराब कारोबारी विजय माल्या को भी पूर्वोत्तर भारत में पैर जमाने से रोकने की कोशिश की थी. इसके लिए उन्होंने 40 करोड़ रुपये खर्च करके एक बड़ी कंपनी का अधिग्रहण किया था. आज जिस एक्टर को लोग फिल्मों के खूंखार विलेन के तौर पर जानते हैं, वह पर्दे के पीछे एक सफल बिजनेसमैन भी हैं.
आर्मी में जाना चाहते थे डैनी, मां की एक बात ने बदल दिया फैसला
डैनी डेन्जोंगपा का जन्म सिक्किम में हुआ था. बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का था. लेकिन 1960 के दशक में चीन के साथ तनाव और युद्ध के दौरान उन्होंने तबाही और हिंसा का ऐसा मंजर देखा कि उनकी मां डर गईं. उन्होंने डैनी से सेना में न जाने की गुजारिश की. मां की बात मानकर डैनी ने अपना फैसला बदल दिया.
इसके बाद उन्होंने संगीत की दुनिया में दिलचस्पी दिखाई और पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में एक्टिंग की पढ़ाई की. यहां से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई. 70 के दशक में उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार निभाए और धीरे-धीरे बॉलीवुड के सबसे खतरनाक विलेन में अपनी जगह बना ली.
गांव के नाम पर शुरू की शराब कंपनी
फिल्मों में सफलता मिलने के बाद भी डैनी का अपने होमटाउन सिक्किम से लगाव कम नहीं हुआ. वह मुंबई की भागदौड़ से दूर अपने घर और परिवार के साथ वक्त बिताना चाहते थे. इसी वजह से उन्होंने तय किया कि साल का कम से कम आधा समय सिक्किम में बिताएंगे.
यहीं से उनके बिजनेसमैन बनने की कहानी शुरू हुई. डैनी ने सिक्किम के अपने गांव युकसोम के नाम पर साल 1987 में 'युकसोम ब्रुअरीज' की शुरुआत की. शुरुआत में यह एक छोटा कारोबार था, जिसका मकसद स्थानीय लोगों को रोजगार देना और सिक्किम की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था.
लेकिन डैनी का यह छोटा सा बिजनेस धीरे-धीरे बड़ा होता चला गया. देखते ही देखते उनकी कंपनी देश की तीसरी सबसे बड़ी ब्रुअरी और पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी ब्रुअरी बन गई.
विजय माल्या को रोकने के लिए खर्च किए 40 करोड़ रुपये
डैनी ने साल 2005 में अपने बिजनेस का विस्तार शुरू किया. इसी साल उन्होंने ओडिशा में 'डेंजोंग ब्रुअरीज' की स्थापना की. इसके बाद 2009 में असम की कंपनी 'राइनो एजेंसीज लिमिटेड' का अधिग्रहण कर लिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील के लिए डैनी ने करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए थे. उस वक्त विजय माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रुअरीज (UB) भी पूर्वोत्तर भारत के बाजार में एंट्री करने की तैयारी कर रही थी.
डैनी को पता था कि अगर यूनाइटेड ब्रुअरीज ने इस बाजार में कदम रख दिया, तो उनके बिजनेस को बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे में उन्होंने अपनी बाजार में पकड़ मजबूत करने के लिए राइनो एजेंसीज का अधिग्रहण किया. एक तरफ विजय माल्या की बड़ी कंपनी थी और दूसरी तरफ डैनी का स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ कारोबार. लेकिन डैनी ने अपनी रणनीति से बिजनेस की दुनिया में अलग पहचान बना ली.
'फिल्मों से ज्यादा ब्रुअरीज से होती है कमाई'
डैनी ने एक इंटरव्यू में अपने बिजनेस की सफलता पर खुलकर बात की थी. साल 2009 में द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उनका ब्रुअरी बिजनेस कैसा चल रहा है, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया था, "बहुत अच्छा. अब सिक्किम में मेरी तीन ब्रुअरीज हैं. असल में यही मेरी रोजी-रोटी का जरिया हैं. एक्टिंग तो बस यूं ही हो जाती है."
उनकी इस बात से साफ था कि फिल्मों में नाम और शोहरत मिलने के बावजूद बिजनेस उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका था.
मनमर्जी से करते हैं काम, मुंबई की गर्मी भी नहीं पसंद
डैनी ने काफी पहले तय कर लिया था कि वह शोहरत के पीछे भागने के बजाय अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जिएंगे. साल 2018 में स्क्रॉल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें मुंबई की गर्मी बिल्कुल पसंद नहीं है. वह नवंबर से जनवरी के बीच ही मुंबई में शूटिंग करना पसंद करते हैं.
डैनी ने कहा था कि मुंबई की गर्मी में बाल तक सीधे रखना मुश्किल हो जाता है. पसीने और उमस की वजह से स्क्रीन पर हर कोई परेशान नजर आता है. उन्होंने यह भी बताया कि वह रविवार को काम नहीं करते और कई बार उनका काम करने का मन ही नहीं होता.
फिल्मों में काम करने की मजबूरी अब उनके पास नहीं थी. बिजनेस से होने वाली कमाई ने उन्हें इतनी आजादी दे दी थी कि वह अपनी मर्जी से फिल्में चुन सकें.
'ऊंचाई' में आखिरी बार आए थे नजर
डैनी ने अपने फिल्मी करियर में 'धुंध', 'द बर्निंग ट्रेन', 'अग्निपथ', 'हम', 'क्रांतिवीर' और 'घातक' जैसी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए. साल 2010 में रजनीकांत की फिल्म 'एंथिरन' में भी वह मुख्य विलेन बने थे. इसके अलावा 'बेबी' और 'नाम शबाना' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अहम भूमिकाएं निभाईं.
साल 2022 में आई सूरज बड़जात्या की फिल्म 'ऊंचाई' में वह आखिरी बार बड़े पर्दे पर नजर आए थे. साल 2003 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था.