बिहार सरकार की एक वेबसाइट में बड़ी सिक्योरिटी खामी मिलने का दावा किया गया है. दावा है कि इस खामी की वजह से करोड़ों लोगों का आधार नंबर, पेंशन और दूसरी सरकारी योजनाओं से जुड़ा डेटा खतरे में आ सकता था.
इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि इस खामी का पता किसी बड़ी साइबर सिक्योरिटी कंपनी ने नहीं, बल्कि बिहार के 21 साल के एक (GenZ) छात्र ने लगाया. इस खबर के सामने आने के बाद सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक यह खामी बिहार महादलित विकास मिशन (BMVM) की वेबसाइट से जुड़ी थी. छात्र का दावा है कि वेबसाइट में मौजूद एक सिक्योरिटी बग की वजह से कई सरकारी डेटाबेस तक पहुंच बनाई जा सकती थी.
इनमें आधार नंबर, पेंशन योजनाओं और दूसरी सरकारी स्कीमों से जुड़ी जानकारी शामिल थी. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि किसी हमलावर ने इस खामी का गलत इस्तेमाल किया या नहीं.
छात्र का कहना है कि उसने इस खामी की जानकारी सबसे पहले जिम्मेदार अधिकारियों और CERT-In को दी, ताकि इसे ठीक किया जा सके. बाद में उसने सोशल मीडिया पर भी इस मामले का जिक्र किया. उसके मुताबिक शुरुआती स्तर पर शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया.
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रिपोर्ट्स के अनुसार इस खामी की वजह से आधार नंबर, पेंशन रिकॉर्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं का डेटा सामने आने का खतरा था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर कोई साइबर क्रिमिनल इस कमजोरी का फायदा उठाता, तो बड़ी संख्या में लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच सकता था. हालांकि अब तक ऐसा कोई आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है कि इस डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ है.
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी वेबसाइटों पर रेगुलर सिक्योरिटी ऑडिट, समय-समय पर अपडेट और जिम्मेदारी से बग रिपोर्ट करने की व्यवस्था बेहद जरूरी है. छोटी सी तकनीकी गलती भी बड़े डेटा रिस्क में बदल सकती है, खासकर तब जब वेबसाइट पर आधार या दूसरी निजी जानकारी मौजूद हो.