मेटा के ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कापलान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने पर माफी मांगी है और कंपनी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सुधार का भरोसा दिया है.
जोएल कपलान ने बताया कि उन्होंने कंपनी में हुई इस टेक्निकल गलती के लिए केंद्रीय मंत्री से मिलकर मेटा की ओर से माफी मांगी है. इस घटना के बाद कंपनी ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया है. प्रधानमंत्री के पोस्ट पर पाबंदी लगाए जाने के बाद सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी. इसके बाद मेटा के वैश्विक नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आधिकारिक तौर पर खेद व्यक्त किया है.
दरअसल, सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने बुधवार को मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने के लिए माफी की मांग की. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव को लिखे एक पत्र में लोकसभा सचिवालय के निदेशक ने कहा कि अगर जकरबर्ग तीन दिनों के अंदर माफी नहीं मांगते हैं तो उन्हें मिली सुरक्षा और छूट वापस ली जा सकती है.
पत्र में कहा गया कि पीएम मोदी के Gen Z और छात्रों से जुड़े वीडियो को 5-6 घंटे तक हटाना एक बेहद गंभीर मामला है. संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा प्रतिनिधियों ने माना कि पीएम का वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक अनुपलब्ध था. यदि जकरबर्ग 3 दिनों में माफी नहीं मांगते हैं तो उनकी कानूनी सुरक्षा वापस ली जा सकती है.
गूगल के इंडिया प्रमुख पर कार्रवाई की सिफारिश
संसदीय पैनल ने गूगल इंडिया के प्रमुख के खिलाफ सरकारी कार्रवाई की भी मांग की, क्योंकि उन पर आरोप है कि निवेशकों ने धोखाधड़ी वाले निवेश ऐप्स के जरिए 48 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. समिति चाहती है कि भारत सरकार गूगल इंडिया के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई करे.
सरकार ने मेटा को घेरा
इसके अलावा सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्र के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत के दौरान मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कंपनी के प्लेटफॉर्म के संचालन में कमियों के फैलने पर भी माफी मांगी.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान सरकारी अधिकारियों ने मेटा के अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे और उन्हें बताया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी कंपनी की जिम्मेदारी है. सरकार ने स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म बच्चों के शोषण वाले कंटेंट से विज्ञापन से कमाई नहीं कर सकते और साथ ही 'सेफ हार्बर' सुरक्षा का दावा भी नहीं कर सकते.
सूत्रों ने बताया कि चर्चा में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन (सामग्री की निगरानी) शामिल थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाए जाने का कोई जिक्र नहीं हुआ.
CSAM और प्लेटफॉर्म संचालन को लेकर माफी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों और मेटा के ग्लोबल लीडरशिप के बीच दो दिवसीय बैठक के दौरान मांगी गई. इस बैठक में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पालन पर चर्चा हुई.
मेटा ने कंटेंट को बढ़ावा देने की बात मानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान मेटा ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई कमियों को स्वीकार किया और हानिकारक सामग्री से ठीक तरह से न निपटने पर खेद जताया. कंपनी ने ये भी स्वीकार किया कि कुछ खास कैटेगरी के कंटेंट को बढ़ावा देने (बूस्ट करने) के लिए बड़ी रकम खर्च की गई थी, जिस पर उन्होंने दुख जताया. इस मामले पर चर्चा के लिए मेटा अधिकारियों को कल (गुरुवार) फिर से एक और बैठक के लिए बुलाया गया है.
सरकारी अधिकारियों ने ये भी संकेत दिया कि मेटा शायद 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट' के तहत मध्यस्थों (intermediaries) को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का हकदार नहीं हो सकता है, क्योंकि इसके एल्गोरिदम सक्रिय रूप से तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट आगे बढ़ाया जाएगा और उपयोगकर्ताओं को दिखाया जाएगा.
आमतौर पर आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) मिलती है. हालांकि, अधिकारियों ने दलील दी कि मेटा एक साधारण मध्यस्थ (Intermediary) नहीं है क्योंकि उसके एल्गोरिदम खुद यह तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किसे दिखाया जाएगा full stop इसलिए मेटा पर सेफ हार्बर सुरक्षा लागू नहीं होती है.