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बिजली बिल, चालान... सावधान! एक SMS और खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट

साइबर फ्रॉड अब बिजली बिल और ट्रैफिक चालान के नाम पर फर्जी SMS और APK लिंक भेजकर लोगों को ठग रहे हैं. I4C ने इन फर्जी मैसेजों से सावधान रहने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी है. साइबर ठग आजकल नकली वेबसाइट बनाकर भी लोगों को ठग रहे हैं. ऐसे में आपको बेहद अलर्ट रहने की जरूरत है.

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साइबर फ्रॉड नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं. (Photo- Pexels)
साइबर फ्रॉड नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं. (Photo- Pexels)

मोबाइल फोन पर अचानक एक मैसेज आता है- 'आपका बिजली बिल अपडेट नहीं है, आज रात बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा.' या फिर- 'आपके वाहन का ट्रैफिक चालान पेंडिंग है, तुरंत भुगतान करें, वरना कानूनी कार्रवाई होगी.' मैसेज देखने के बाद स्वाभाविक है कि व्यक्ति घबरा जाए और बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए उसमें दिए लिंक पर क्लिक कर दे.

लेकिन यही जल्दबाजी आज साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है. साइबर ठग अब सिर्फ बैंक अधिकारी या पुलिस बनकर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि बिजली विभाग, ट्रैफिक पुलिस, RTO और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं.

इन मैसेजों में ऐसा माहौल बनाया जाता है कि सामने वाले के पास सोचने या वेरिफिकेशन करने का समय ही नहीं होाता. अक्सर बिजली कनेक्शन काटने का डर दिखाकर ठगी की जाती है. ऐसे में Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C ने खुद अनपेड इलेक्ट्रिसिटी बिल के नाम पर भेजे जाने वाले फर्जी SMS को लेकर चेतावनी जारी की है.

कैसे डराते हैं साइबर ठग?

I4C के मुताबिक साइबर अपराधी बिजली बिल बकाया होने का दावा करते हुए SMS भेजते हैं और लोगों को लिंक पर क्लिक करने या किसी नंबर पर संपर्क करने के लिए उकसाते हैं. इसे साइबर अपराध की भाषा में smishing यानी SMS के जरिए phishing का तरीका कहा जाता है.

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ऐसे मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा. कई बार मैसेज में एक मोबाइल नंबर दिया जाता है और ग्राहक से कहा जाता है कि वो तुरंत उस नंबर पर संपर्क करे. 

बिजली काटने की धमकी देकर डराते हैं फ्रॉड

इसके बाद ठग खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर बात कर सकता है. वो उपभोक्ता को किसी वेबसाइट पर जाने, कोई ऐप डाउनलोड करने या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी देने के लिए कह सकता है. I4C ने सलाह दी है कि ऐसे संदिग्ध SMS के लिंक पर क्लिक न करें और अनजान सोर्स से कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड न करें. साथ ही ऐसे मैसेज में मांगी गई निजी या वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए. 

बिजली KYC स्कैम पहले भी आ चुका है सामने

बिजली बिल के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड को लेकर सरकार पहले भी कार्रवाई कर चुकी है. जून 2024 में Department of Telecommunications ने Electricity KYC Update Scam के खिलाफ कार्रवाई की थी. सरकार के मुताबिक ठग SMS और व्हाट्सएप के जरिए बिजली KYC अपडेट कराने के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे थे. कुछ मामलों में पीड़ितों को malicious APK files भेजी गईं, जिन्हें डाउनलोड करने के बाद मोबाइल और वित्तीय जानकारी खतरे में पड़ सकती थी.

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DoT के मुताबिक इस अभियान में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध मोबाइल नंबरों और हैंडसेट की पहचान की गई और कार्रवाई की गई. यानी बिजली बिल का मैसेज अगर बिल्कुल असली दिखाई भी दे रहा हो, तब भी सिर्फ SMS या व्हाट्सएप पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है.

यह भी पढ़ें: 72 बैंक खाते, फर्जी फर्में और 5600 करोड़ का ट्रांजैक्शन, कानपुर पुलिस ने खोला साइबर फ्रॉड का राज, दो आरोपी गिरफ्तार

अब ट्रैफिक चालान के नाम पर नया जाल

साइबर अपराधियों का दूसरा बड़ा हथियार है- फर्जी ई-चालान मैसेज. मान लीजिए किसी व्यक्ति को व्हाट्सएप पर मैसेज आता है कि उसकी गाड़ी का चालान कट गया है. साथ में गाड़ी नंबर, चालान नंबर और जुर्माने की रकम जैसी जानकारी दी जाती है. इससे मैसेज बिल्कुल सरकारी लग सकता है. इसके बाद ठग व्यक्ति को भुगतान करने के लिए लिंक या कोई APK फाइल भेज सकता है.

I4C की जनवरी 2026 की साइबर सुरक्षा सामग्री में फर्जी RTO ई-चालान APK को लेकर चेतावनी दी गई है. इसमें बताया गया कि व्हाट्सएप के जरिए 'RTO e-Challan' या 'VAHAN PARIVAHAN' जैसे नाम वाली APK फाइल भेजी जा सकती है. ऐसी malicious application फोन तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने और निजी और वित्तीय जानकारी को खतरे में डालने में इस्तेमाल हो सकती है.

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यही वजह है कि किसी भी चालान की जानकारी व्हाट्सएप या SMS में आए लिंक से नहीं, बल्कि आधिकारिक सरकारी माध्यम से ही वेरिफाई करनी चाहिए.

APK फाइल सबसे बड़ा खतरा क्यों?

साइबर ठगों का तरीका लगातार बदल रहा है. पहले वो सिर्फ फर्जी लिंक भेजते थे. अब कई मामलों में सीधे मोबाइल ऐप यानी APK file भेजी जाती है. उदाहरण के लिए मैसेज में लिखा हो सकता है- 'आपका ई-चालान डाउनलोड करें', 'अपना Electricity Bill अपडेट करें', 'KYC तुरंत पूरा करें' और साथ में एक APK फाइल. 

एक बार व्यक्ति अनजान सोर्स से ऐप इंस्टॉल कर देता है तो वो अपने फोन को ऐसी परमिशन दे सकता है, जिनका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है.

National Informatics Centre ने जुलाई 2026 की साइबर सुरक्षा सलाह में साफ कहा कि SMS, WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए आए unknown APK links से ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसी फाइलें व्यक्तिगत, वित्तीय और बैंकिंग जानकारी चुरा सकती हैं. दिल्ली सरकार की साइबर सुरक्षा सामग्री भी चेतावनी देती है कि malicious APK बैंकिंग ऐप्स को निशाना बना सकते हैं और वित्तीय डेटा चोरी कर सकते हैं.

ठग सबसे पहले डर क्यों पैदा करते हैं?

इस पूरे साइबर फ्रॉड मॉडल में सबसे अहम चीज तकनीक नहीं बल्कि मानसिक दबाव है. साइबर अपराधी जानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को सोचने का समय मिल गया तो वो मैसेज की सच्चाई की जांच कर सकता है. इसलिए संदेश में urgency पैदा की जाती है. जैसे- 'आज रात बिजली कट जाएगी', '2 घंटे में चालान जमा करें, 'KYC नहीं किया तो कनेक्शन बंद', 'तुरंत भुगतान करें', 'आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी.'

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OTP मांगा तो समझिए खतरे की घंटी

अगर कोई व्यक्ति फोन पर खुद को बिजली विभाग, बैंक, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर OTP, PIN, password, CVV या बैंक की गोपनीय जानकारी मांगता है तो बेहद सतर्क हो जाएं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया लगातार ग्राहकों को चेताता रहा है कि OTP, PIN और कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए.

RBI के मुताबिक बैंक या RBI इस तरह SMS, ईमेल या फोन कॉल के जरिए ग्राहकों से OTP, PIN या बैंकिंग विवरण मांगने का तरीका नहीं अपनाते. इसलिए कोई व्यक्ति कितना भी भरोसेमंद लगे, अगर वो OTP बताने के लिए कह रहा है तो रुक जाइए. 

फर्जी वेबसाइट भी असली जैसी दिख सकती है

आजकल साइबर ठग सिर्फ लिंक नहीं भेजते, बल्कि ऐसी वेबसाइट तैयार कर लेते हैं जो देखने में सरकारी पोर्टल जैसी लग सकती है. वेबसाइट पर सरकारी लोगो, विभाग का नाम, चालान नंबर, वाहन नंबर और भुगतान का विकल्प तक मौजूद हो सकता है. यही कारण है कि सिर्फ वेबसाइट का डिजाइन देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए.

किसी भी बिल या चालान को SMS में दिए गए लिंक से नहीं, बल्कि खुद ऑफिशियल वेबसाइट या संबंधित विभाग के आधिकारिक ऐप को खोलकर जांचें.

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अगर मैसेज आए तो क्या करें?

सबसे पहला नियम है- घबराएं नहीं. अगर बिजली बिल का मैसेज आया है तो अपने बिजली वितरण निगम की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप खोलकर बिल की स्थिति जांचें, अगर ट्रैफिक चालान का संदेश आया है तो सरकारी ई-चालान सिस्टम या संबंधित आधिकारिक माध्यम से गाड़ी नंबर डालकर जानकारी वेरिफाई करें.

अगर मैसेज में कोई APK फाइल है तो उसे बिल्कुल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें. अगर फोन पर कोई व्यक्ति कॉल करके दबाव बना रहा है तो बातचीत खत्म करें और विभाग के ऑफिशियल नंबर से खुद संपर्क करें.

गलती से लिंक क्लिक हो गया तो?

अगर आपने संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दिया है तो तुरंत आगे की प्रक्रिया रोक दें. अगर कोई APK या संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कर दिया है तो इंटरनेट कनेक्शन बंद करना, संदिग्ध ऐप को हटाना और अहम अकाउंट्स की सुरक्षा देखना जरूरी हो सकता है. NIC की सलाह के मुताबिक संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में डिवाइस को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करना और अहम अकाउंट्स के पासवर्ड बदलना मददगार कदम है,

अगर बैंक खाते से पैसा निकल गया है तो समय बर्बाद न करें. 1930 पर तुरंत कॉल करेंभारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के मुताबिक financial cyber fraud की स्थिति में 1930 पर तुरंत कॉल किया जा सकता है. ये हेल्पलाइन 24x7 उपलब्ध है. शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी दर्ज की जा सकती है,

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I4C भी नागरिकों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने की सलाह देता है. यहां सबसे अहम बात समय है. पैसे निकलने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित सिस्टम में कार्रवाई शुरू होने की संभावना रहती है.

यह भी पढ़ें: हथियार, साइबर अटैक और तबाही का खौफ... एंथ्रोपिक CEO बोले- AI की रफ्तार पर लगे ब्रेक, सहमत हुए मस्क-ऑल्टमैन

संदिग्ध SMS या WhatsApp को भी रिपोर्ट कर सकते हैं.

हर संदिग्ध संदेश के बाद ठगी होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है. सरकार के संचार साथी के 'चक्षु' प्लेटफॉर्म पर नागरिक संदिग्ध fraud communication की रिपोर्ट कर सकते हैं. इसमें SMS, WhatsApp और कॉल के जरिए आने वाले संदिग्ध संचार की रिपोर्ट की जा सकती है.

जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर 'चक्षु' के जरिए संदिग्ध fraud communications के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

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