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Alexander Zverev: पुराने जख्म भुलाकर ज्वेरेव बने फ्रेंच ओपन चैम्पियन, तोड़ पाएंगे अल्कारेज-सिनर का वर्चस्व?

रविवार को पेरिस की फिलिप-चैटरियर कोर्ट एक सपने के साकार होने की गवाह बनी. अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सालों लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया, और वो पहली बार ग्रैंड स्लैम चैम्पियन बन गए. 4 साल पहले सेमीफाइनल के दौरान जिस कोर्ट को उन्हें चोट के बाद व्हीलचेयर पर छोड़ना पड़ा था, उसी कोर्ट पर जर्मन खिलाड़ी के हाथों में फ्रेंच ओपन की चमचमाती ट्रॉफी थी.

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अलेक्जेंडर ज्वेरेव: ग्रैंड स्लैम का इंतजार खत्म. (Photo, AFP)
अलेक्जेंडर ज्वेरेव: ग्रैंड स्लैम का इंतजार खत्म. (Photo, AFP)

रविवार को पेरिस की फिलिप-चैटरियर कोर्ट एक सपने के साकार होने की गवाह बनी. अलेक्जेंडर ज्वेरेव के प्रोफेशनल टेनिस करियर का 13 सालों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया, और वो पहली बार ग्रैंड स्लैम चैम्पियन बन गए. वो भी उस कोर्ट पर जहां उनकी जिंदगी के सबसे खराब अनुभव और यादें रहीं. यहीं 2022 में फ्रेंच ओपन सेमीफाइनल में राफेल नडाल के खिलाफ ज्वेरेव को गंभीर चोट लगी थी. जिससे उन्हें दर्द से कराहते हुए व्हीलचेयर पर कोर्ट छोड़ना पड़ा था. लेकिन 4 साल बाद उसी कोर्ट पर 29 वर्षीय जर्मन खिलाड़ी के हाथों में coupe des mousquetaires (फ्रेंच ओपन चैम्पियन को दी जाने वाली ट्रॉफी) थी. 

उतार-चढ़ाव वाले फाइनल की कहानी

फ्रेंच ओपन के खिताबी मुकाबले में ज्वेरेव को अपना पहला फाइनल खेल रहे 24 वर्षीय इटली के फ्लेवियो कोबोली ने कड़ी चुनौती दी. पहला और तीसरा सेट हारने के बाद कोबोली ने दूसरा और चौथा सेट जीतकर मैच को बराबरी पर ला दिया. लेकिन अपना चौथा ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल रहे ज्वेरेव ने पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इस बार दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने पांचवें सेट के पहली ही गेम में इटालियन प्लेयर की सर्विस ब्रेक कर दी.

इसके बाद कोबोली ने वापसी की भरसक कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई सफलता नही मिली. आख़िरकार करीब साढ़े 4 घंटे तक चले रोमांचक मुकाबले को ज्वेरेव ने 6-1, 4-6, 6-4, 6-7 (5), 6-1 से जीतकर फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया. जीतते ही वो रोलां गैरों की लाल बजरी पर गिर गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे. 

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विशाल चुनौतियों को मात देकर ज्वेरेव ने पूरा किया सपना 

दुनिया के नंबर-3 खिलाड़ी ज्वेरेव के लिए ग्रैंड स्लैम चैम्पियन बनना बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. उनके पास ओलंपिक गोल्ड, मास्टर्स-1000 टाइटल, ATP फाइनल ट्रॉफी समेत टेनिस का हर बड़ा खिताब था. लेकिन बहुप्रतीक्षित ग्रैंड स्लैम टाइटल अभी भी उनसे दूर था. इससे पहले वो अपने 3 ग्रैंड स्लैम फाइनल हार चुके थे. टाइटल के इतने करीब पहुंचकर उनका खेल दबाव में बिखर जाता था. जिससे उन पर ‘चोकर’ का तमगा भी लगने लगा.

2020 के यूएस ओपन फाइनल में उनके पास 2 सेट की बढ़त थी. फिर 2024 फ्रेंच ओपन फाइनल में भी अल्कारेज के खिलाफ ज्वेरेव तीन सेट के बाद 2-1 से आगे थे. लेकिन हर बार वो हारने का कोई ना कोई तरीक़ा ढूंढ लेते. फ्रेंच ओपन के फाइनल में भी वही कहानी दोहराने का डर दिखने लगा था. चौथे सेट में वो क्रैम्प से जूझने लगे, लेकिन इस बार ज्वेरेव ने संयम रखते हुए मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया. कोबोली की हर चुनौती के सामने वो डटे रहे, जिसका फल उन्हें पहले ग्रैंड स्लैम टाइटल के रूप में मिला. 

Germany's Alexander Zverev.
अलेक्जेंडर ज्वेरेव: सपना हुआ पूरा. (Photo, AFP)

ज्वेरेव की फ्रेंच ओपन जीत इसलिए भी और खास है क्योंकि इसी टूर्नामेंट में उन्हें अपने करियर की सबसे गंभीर चोट का सामना करना पड़ा था. 2022 में स्पेनिश दिग्गज और क्ले कोर्ट किंग राफेल नडाल के खिलाफ वो सेमीफाइनल खेल रहे थे. दूसरे सेट में अचानक जर्मन खिलाड़ी का टखना वहीं मुड़ गया और वो कोर्ट पर बुरी तरह गिर गए. दर्द से कराहते और आंसुओं के साथ उन्हें व्हीलचेयर पर कोर्ट छोड़ना पड़ा.

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उनके दाएं टखने में 2 फ्रैक्चर और 7 लिगामेंट टूट गए थे. सर्जरी के बाद वो कई महीनों तक खेल से दूर रहे. 4 साल बाद रविवार को उसी कोर्ट पर ज्वेरेव एक बार फिर उतरे, लेकिन इस बार वो अपनी पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी के साथ वहां से निकले. इतना ही नहीं, ज्वेरेव बचपन से ही टाइप-1 डायबिटीज से भी जूझ रहे हैं. मैचों के दौरान वो अक्सर अपना ब्लड शुगर जांचते रहते हैं. 

अल्कारेज-सिनर के दबदबे को चैलेंज कर पाएंगे ज्वेरेव?

ज्वेरेव की फ्रेंच ओपन जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वो मेंस टेनिस में जारी अल्कारेज-सिनर की डुओपॉली को तोड़ पाएंगे? जर्मन खिलाड़ी अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीत तो गए, लेकिन इस बार उन्हें भाग्य का भी काफी साथ मिला. दो बार के डिफेंडिंग चैम्पियन अल्कारेज चोट के कारण फ्रेंच ओपन में खेल नहीं पाए. वहीं इटली के वर्ल्ड नंबर-1 प्लेयर यानिक सिनर को दूसरे राउंड में ही अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा. फिर 24 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता जोकोविव भी तीसरे राउंड में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए. ऐसे में ज्वेरेव के पास अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीतने का ये सबसे अच्छा मौका था, जिसे उन्होंने बिना गलती किए दोनों हाथों से लपक लिया. 

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इसके साथ ही ज्वेरेव ने अल्कारेज-सिनर की जोड़ी का पिछले 9 ग्रैंड स्लैम जीतने का सिलसिला भी तोड़ दिया. ये जीत जर्मन खिलाड़ी के करियर के लिए बड़ी बूस्ट साबित हो सकती है. साथ ही मेंस टेनिस की राइवलरी को भी रोमांचक बना सकती है. अपने पहले ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल के 6 साल बाद आखिरी लाइन को पार कर फ्रेंच ओपन जीत उन्हें आत्मविश्वास देगी.

अल्कारेज-सिनर का सामने करने के लिए उन्हें नई ऊर्जा मिलेगी. ज्वेरेव को पता होगा कि वो दबाव से उबरकर टेनिस के सबसे बड़े टूर्नामेंट जीत सकते हैं. अल्कारेज-सिनर के दबदबे को ज्वेरेव चुनौती दे पाएंगे या नहीं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. फिलहाल वो अपने पहले ग्रैंड स्लैम टाइटल का लुत्फ उठाने के पूरे हकदार हैं. जैसा कि जीत के बाद ज्वेरेव ने कहा, 'मैं हमेशा ग्रैंड स्लैम चैम्पियन रहूंगा. कोई मुझसे ये नहीं छीन सकता.'

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