भारतीय हॉकी के लिए अगस्त का महीना सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि इतिहास बदलने का मौका लेकर आ रहा है. 1975 में पहली और आखिरी बार विश्व कप जीतने के 50 साल पूरे होने के बीच टीम इंडिया एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी हॉकी ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के इरादे से उतरेगी. 14 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड्स और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत आधी सदी पुराने खिताबी सूखे को खत्म करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगा.
हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत ने 20 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है. कप्तानी की जिम्मेदारी एक बार फिर स्टार ड्रैग फ्लिकर और डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह के हाथों में होगी, जिन्होंने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत को लगातार दो कांस्य पदक दिलाकर 41 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया था.
हरमनप्रीत के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
हरमनप्रीत की अगुआई में भारतीय टीम ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को दुनिया की शीर्ष हॉकी टीमों में शामिल किया है, लेकिन विश्व कप का मंच अब भी अधूरी कहानी की तरह है.
भारत ने आखिरी बार 1975 में कुआलालंपुर में विश्व कप जीता था. इसके बाद 1971 में बार्सिलोना में कांस्य और 1973 में एम्सटर्डम में रजत पदक हासिल किया. लेकिन इसके बाद से विश्व कप में पोडियम पर वापसी का इंतजार जारी है.
2023 के पिछले संस्करण में भारतीय टीम नौवें स्थान पर रही थी. ऐसे में इस बार लक्ष्य सिर्फ बेहतर प्रदर्शन नहीं, बल्कि पदक जीतकर सुनहरी यादें लौटाना होगा.
प्रो लीग की निराशा के बाद नई चुनौती
विश्व कप से पहले भारतीय टीम का एफआईएच प्रो लीग अभियान उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. यूरोपीय चरण में भारत ने 16 मुकाबलों में सिर्फ चार जीत दर्ज कीं, जबकि पांच मैच ड्रॉ रहे और सात में हार मिली. टीम नौ टीमों की तालिका में आठवें स्थान पर रही, सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर.
हालांकि कोच क्रेग फुल्टन का मानना है कि विश्व कप के लिए चुनी गई टीम में अनुभव और युवा जोश का सही संतुलन है.
उन्होंने कहा,'यह एक संतुलित टीम है. इसमें टूर्नामेंट खेलने का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी भी हैं और ऐसे युवा भी, जिन्होंने अपने प्रदर्शन के दम पर जगह बनाई है, सिर्फ नाम के आधार पर नहीं.'
अनुभव और युवा जोश का मिश्रण
भारत की टीम में अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह भी शामिल हैं, जो देश के सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। उनके अनुभव के साथ हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद और नीलकंठ शर्मा जैसे खिलाड़ी मिडफील्ड को मजबूती देंगे.
गोलकीपिंग की जिम्मेदारी मोहित एचएस और सूरज करकेरा संभालेंगे. डिफेंस में हरमनप्रीत के साथ अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं.
फॉरवर्ड लाइन में भारत को मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह और शिलानंद लाकड़ा से गोल की उम्मीद होगी.
चार खिलाड़ियों को नहीं मिली जगह
24 सदस्यीय प्रो लीग टीम में शामिल चार खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप टीम में जगह नहीं मिल सकी. डिफेंडर अमंदीप लाकड़ा, मिडफील्डर राज कुमार पाल, रबिचंद्र सिंह मोइरांगथेम और फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी को टीम में शामिल नहीं किया गया.
स्क्वॉड लिमिट के कारण टीम प्रबंधन को यह मुश्किल फैसला लेना पड़ा.
भारत के ग्रुप में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स
विश्व कप में भारत को पूल-डी में रखा गया है, जहां उसके साथ इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स हैं. भारत अपने सभी ग्रुप मुकाबले नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन में खेलेगा.
भारत अपने अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ करेगा. इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड और 19 अगस्त को पाकिस्तान से भिड़ेगा. पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला ग्रुप स्टेज का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है.
'प्रेस, काउंटर, परफॉर्म' होगी भारत की रणनीति
कोच क्रेग फुल्टन ने टीम की रणनीति को साफ शब्दों में बताया है. उन्होंने कहा,'प्रेस, काउंटर, परफॉर्म सिर्फ हमारी रणनीति नहीं है, बल्कि यही हमारी ट्रेनिंग और सोच का हिस्सा है. हम आगे के बारे में नहीं सोच रहे हैं. हर मैच को एक-एक करके खेलना हमारा लक्ष्य है.'
अब सवाल सिर्फ इतना है कि क्या हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली यह टीम 50 साल पुराने इंतजार को खत्म कर पाएगी? क्या भारतीय हॉकी एक बार फिर विश्व चैम्पियन बनने की कहानी लिख पाएगी?
15 अगस्त से शुरू होने वाला यह अभियान भारत के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि गौरवशाली अतीत को लौटाने की कोशिश होगी.
भारतीय टीम -
गोलकीपर - मोहित एचएस और सूरज करकेरा
डिफेंडर - हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच
मिडफील्डर - मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालागे
फॉरवर्ड - मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह और शिलानंद लाकड़ा.