ईरान के कप्तान मेहदी टारेमी ने कहा है कि उनकी टीम के लिए यह विश्व कप आसान नहीं रहा है. इसकी वजह ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध, ट्रेनिंग कैंप में बदलाव, वीजा दिक्कतें और यात्रा से जुड़ी परेशानियां हैं. अमेरिका इस टूर्नामेंट का सह मेजबान भी है, इसलिए टीम को कई स्तर पर दबाव झेलना पड़ रहा है.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी टीम रविवार को मेक्सिको के तिजुआना स्थित अपने ट्रेनिंग बेस से लॉस एंजिलिस पहुंची. यह बेस अमेरिकी सीमा के ठीक पार है और उस स्टेडियम से करीब 140 मील, यानी 225 किलोमीटर दूर है, जहां ईरान सोमवार रात न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना ग्रुप चरण का पहला मैच खेलेगा. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान का ट्रेनिंग कैंप अमेरिका से हटाया गया था, और तब से टीम को लगातार कई तरह की रुकावटों का सामना करना पड़ा है.
टारेमी ने कहा कि विश्व कप में पहुंचने के पहले पल से उन्होंने तनाव महसूस किया है. उनका कहना था कि जब किसी टूर्नामेंट में तनाव होता है, तो शांति और खुशी वाला वह अनुभव नहीं मिल पाता जिसकी बात हमेशा की जाती है. टारेमी ने यह भी कहा कि सिर्फ ईरान ही नहीं, कई देशों को वीजा दिक्कतों और ट्रेनिंग कैंप में बदलाव का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, इस बार विश्व कप को लेकर लोगों में वैसा उत्साह शायद नहीं रहा जैसा आम तौर पर होता है.
जंग के बीच ईरान का मिशन वर्ल्ड कप
28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था और शुरुआती मिसाइल हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद युद्ध कई बार धीमा पड़ा और फिर दोबारा शुरू हुआ. रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते का एलान भी किया, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर बात नहीं हुई. 33 वर्षीय टारेमी, जो ओलंपियाकोस के लिए खेलते हैं और अपना तीसरा विश्व कप खेल रहे हैं, ने कहा कि इस तरह का तनाव खुशी को कम करता है और फुटबॉल शांति लाता है, इस संदेश को भी कमजोर करता है. उन्होंने कहा कि इस विश्व कप का माहौल इससे बेहतर हो सकता था, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि आगे सभी टीमों के प्रशंसकों के लिए हालात बेहतर होंगे.
युद्ध से पहले ईरान ने एरिजोना के टक्सन में ट्रेनिंग की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में टीम जल्दी से बाजा कैलिफोर्निया चली गई. इसके बाद ईरान ने चाहा कि उसके ग्रुप चरण के मैच अमेरिका के बाहर कराए जाएं, लेकिन फीफा ने यह मांग यह कहकर ठुकरा दी कि लॉजिस्टिक्स और अनुबंध इसकी इजाजत नहीं देते. तब से ईरान को कई और व्यवस्थागत दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. टीम के एक प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि मीडिया रिलेशंस समूह के 2 सदस्यों को शुरुआती मैच के लिए अमेरिकी वीजा नहीं मिला. टीम और उसके साथ यात्रा कर रहे प्रशंसकों को मैच टिकट को लेकर भी कई समस्याएं हुईं.
ईरान के कोच अमीर गालेनोई ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि इन हालात का असर फुटबॉल की भावना पर नकारात्मक पड़ा है. उनका कहना था कि फुटबॉल का काम देशों और संस्कृतियों को साथ लाना है. उन्होंने कहा कि जीत और हार अपनी जगह है, लेकिन फुटबॉल का खेल खुशी लाने के लिए है. गालेनोई ने माना कि इन परिस्थितियों का असर टीम के तकनीकी फोकस पर पड़ा है, लेकिन उन्होंने खिलाड़ियों का ध्यान रणनीति और तकनीक पर बनाए रखने की कोशिश की है.
The anthem of the Team Iran (Team Melli), #WorldCup 2026.
— Iran In Hyderabad (@IraninHyderabad) June 15, 2026
(Artwork of Homayeh Parvaz) pic.twitter.com/QSzObz50xM
ईरानी टीम को अपने मैचों के लिए अमेरिका में सिर्फ छोटी और सीमित यात्राएं करने दी जा रही हैं. टीम मैच से एक दिन पहले आती है और खबरों के मुताबिक मैच के तुरंत बाद लौट जाती है. ईरान अपना अगला मैच अगले रविवार को फिर कैलिफोर्निया के इंगलवुड में बेल्जियम के खिलाफ खेलेगा. इसके बाद 26 जून को सिएटल में मिस्र के खिलाफ ग्रुप चरण का आखिरी मैच होगा. टारेमी ने बिना ज्यादा जानकारी दिए कहा कि तिजुआना से सोफी स्टेडियम तक पहुंचने में, बहुत छोटी उड़ान शामिल होने के बावजूद, करीब पांच घंटे लगे.
गालेनोई ने कहा कि इसका असर तो पड़ता है. उन्होंने मेक्सिको के लोगों का शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि ईरानी मुश्किल हालात से मौके निकालना जानते हैं, और उनका ध्यान सिर्फ लोगों को खुशी देने पर है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ईरानी टीम सोफी स्टेडियम के मैदान पर उतरी ताकि खिलाड़ी इस नए मैदान को समझ सकें. खिलाड़ी छोटे समूहों में स्टेडियम में घूमे, ऊंचे स्टैंड्स को देखा और घास की हालत भी परखी.
फीफा रैंकिंग में मज़बूत है ईरान
ईरान इस विश्व कप के लिए सबसे पहले क्वालिफाई करने वाली टीमों में शामिल था और फीफा रैंकिंग में फिलहाल 20वें स्थान पर है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरानी टीम शायद अमेरिका में सुरक्षित नहीं होगी. इसके बाद ईरानी अधिकारियों के बीच यह बहस भी हुई कि टीम को टूर्नामेंट में खेलना चाहिए या नहीं. लॉस एंजिलिस क्षेत्र को ईरान के 2 मैचों की मेजबानी के लिए शायद इसलिए चुना गया क्योंकि ईरान के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी ईरानी आबादी यहीं रहती है. शहर का तथाकथित तेहरानजेलिस इलाका उन हजारों परिवारों से भरा है जो 1970 के दशक के आखिर में इस्लामिक क्रांति के बाद देश छोड़कर चले गए थे.
टारेमी और गालेनोई जानते हैं कि अमेरिका में रहने वाले कई ईरानी उनकी टीम के खिलाफ भी समर्थन कर सकते हैं. स्टेडियम के अंदर और बाहर ईरानी सरकार के खिलाफ अलग अलग प्रदर्शनों की भी खबर है. फिर भी टीम नेतृत्व ने साफ किया कि वह इसे अलग नजर से देख रहा है. टारेमी ने कहा कि टीम हर ईरानी के लिए खेलती है, चाहे वह विदेश में हो या ईरान में. उनके मुताबिक लोगों की राय अलग हो सकती है, लेकिन टीम यहां लोगों को जोड़ने और जहां भी वे रहते हों, सभी ईरानियों को खुशी देने की कोशिश के लिए आई है. उन्होंने कहा कि टीम राजनीति में नहीं पड़ती और उसका काम फुटबॉल खेलना है. कुल मिलाकर, ईरानी टीम अपना अभियान युद्ध, यात्रा, वीजा और माहौल से जुड़ी मुश्किलों के बीच शुरू कर रही है, लेकिन कप्तान और कोच दोनों का कहना है कि उनका फोकस मैदान पर ही रहेगा.