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कौन से ईरानी झंडे पर फीफा ने लगाया बैन? वर्ल्ड कप मैच में ग्राउंड ले जाना है मना

फीफा ने विश्व कप फुटबॉल स्टेडियमों में एक ईरानी झंडे पर प्रतिबंध लगा दिया है. वर्ल्ड कप मैच के दौरान इन झंडों को लहराना नियमों का उल्लंघन होगा. ऐसे में जानते फीफा ने ईरान के किस झंडे पर बैन लगाया है.

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फीफा ने लगाया ईरान के एक झंडे पर बैन (Photo - ITG)
फीफा ने लगाया ईरान के एक झंडे पर बैन (Photo - ITG)

इस बार वर्ल्ड कप फुटबॉल मैच के दौरान ग्राउंड में ईरान का एक झंडा लहराने पर फीफा ने बैन लगा दिया गया है. वहीं  फिलिस्तीनी ध्वज की अनुमति दी गई है. जानते हैं ईरान के कौन से झंडे पर फीफा ने बैन लगाया है. 

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, द एथलेटिक ने मंगलवार को बताया कि फीफा ने फैसला सुनाया है कि इस साल दुनिया के सबसे प्रसिद्ध फुटबॉल टूर्नामेंट में कई तरह की सिंबॉलिक चीजों की अनुमति नहीं दी जाएगी. 

फीफा का कहना है कि ईरान का पुराने झंडे, जो इस्लामिक क्रांति से पहले इस्तेमाल होते थे, उनकी आचार संहिता का उल्लंघन करता है. इसमें कहा गया है कि राजनीतिक, आपत्तिजनक औ भेदभावपूर्ण प्रकृति के बैनर, झंडे, पर्चे, कपड़े और अन्य सामान को मैच के दौरान ग्राउंड में ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

ईरान के इस्लामिक क्रांति से पहले वाले झंडे पर लगा बैन
द एथलेटिक की रिपोर्ट के अनुसार, फिलिस्तीनी ध्वज फीफा के एक सदस्य संघ का आधिकारिक रूप से स्वीकृत झंडा है. इसलिए इसकी अनुमति होगी. लॉस एंजिल्स में रहने वाली एक ईरानी महिला एमेल कार्साज, जो खुद को ईरान में स्वतंत्रता की पैरोकार बताती हैं. उन्होंने मंगलवार को द कैलिफोर्निया पोस्ट को बताया कि उन्हें फीफा के प्रतिबंध से ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है.

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उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि ईरानी फुटबॉल टीम मूल रूप से आईआरजीसी का प्रतिनिधित्व कर रही है और लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही है. उन्हें उम्मीद है कि ईरानी लोग बड़ी संख्या में इस्लामिक क्रांति से पहले वाले पहलवी दौर के झंडे लेकर मैचों में आएंगे.

उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि इससे हर कोई इतना नाराज हो जाएगा कि मैं शर्त लगा सकती हूं कि एक बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा. ईरानी लोग विरोध प्रदर्शन करने और दुनिया को यह बताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे कि वे हमारी टीम नहीं हैं.

झंडे पर बैन से शुरू हो सकता है विरोध प्रदर्शन
कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के ईरान और अमेरिकी नीति विशेषज्ञ करीम सजादपुर ने द एथलेटिक के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कारसाज की राय का समर्थन किया. करीम ने कहा कि लॉस एंजिल्स में ईरानियों को स्टेडियम में शेर और सूर्य का झंडा लाने से रोकना वैसा ही है जैसे अमेरिकियों को किसी अमेरिकी स्टेडियम में अमेरिकी झंडा लाने से रोकना. इससे बड़े पैमाने पर अशांति फैल जाएगी.

क्रांति-पूर्व ईरान की छवियों में हरे, सफेद और लाल रंग की धारियों वाली पृष्ठभूमि पर तलवार पकड़े हुए शेर और सूर्य को दर्शाया गया है. 1980 में इस्लामी क्रांति के बाद, देश ने एक नई राष्ट्रीय छवि को अपनाया, जिसमें उन्हीं हरे, सफेद और लाल पट्टियों के ऊपर एक इस्लामी प्रतीक चिह्न अंकित है.

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अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होंगे सारे मैच
फीफा ने इससे पहले भी पुराने ईरानी तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाया था. द एथलेटिक के अनुसार, कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में, शेर और सूर्य की आकृति वाले परिधान पहने प्रशंसकों को प्रवेश से रोक दिया गया था. क्रांति-पूर्व की तस्वीरों या प्रतीकों को अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों में ईरानी प्रवासी लोगों द्वारा पहचान और विरोध के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है.

विश्व कप अगले महीने कनाडा, मैक्सिको और अमेरिका में शुरू होगा. ईरान अपने ग्रुप स्टेज के मैचों की शुरुआत 15 जून को लॉस एंजिल्स के सोफी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ करेगा.

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