इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर हैरी केन ने फुटबॉल की दुनिया में इतिहास रच दिया है. 33 साल की उम्र में केन ने पुरुष वर्ग का प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर पुरस्कार अपने नाम कर लिया. वह 2001 में माइकल ओवेन के बाद यह सम्मान जीतने वाले पहले इंग्लिश फुटबॉलर बन गए हैं. मंगलवार को लंदन के पैलेडियम में आयोजित समारोह में केन को विजेता घोषित किया गया. उन्होंने फ्रांस के स्टार काइलियन एम्बाप्पेऔर स्पेन के युवा खिलाड़ी लामिन यामाल को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की. एमबाप्पे दूसरे और यमाल तीसरे स्थान पर रहे.
केन के लिए यह कामयाबी उनके शानदार करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. उन्होंने पिछले सीजन में क्लब और देश के लिए 65 मुकाबलों में 73 गोल दागे. उनके इसी प्रदर्शन ने बायर्न म्यूनिख को कई खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. केन ने बैलन डी’ओर के साथ पुरुष वर्ग में 'स्ट्राइकर ऑफ द ईयर' का पुरस्कार भी जीता.
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25 साल बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी का दबदबा
बैलन डी’ओर जीतने वाले हैरी केन इंग्लैंड के पांचवें खिलाड़ी हैं. उनसे पहले सर स्टेनली मैथ्यूज, सर बॉबी चार्लटन, केविन कीगन और माइकल ओवेन यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुके हैं. ओवेन ने 2001 में बैलन डी’ओर अपने नाम किया था. उसके बाद इंग्लैंड का कोई खिलाड़ी यह सम्मान नहीं जीत सका था. अब केन ने 25 साल बाद इस इंतजार को खत्म किया है.
केन की जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि वह बायर्न म्यूनिख के लिए बैलन डी’ओर जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी बने हैं. उनसे पहले कार्ल-हाइंज रुमेनिगे ने 1980 और 1981 में लगातार दो बार यह पुरस्कार जीता था. केन की उपलब्धि ने जर्मन क्लब के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ दिया.
65 मैचों में 73 गोल, विरोधियों पर पड़े भारी
हैरी केन ने पिछले सीजन में गोल करने की अपनी क्षमता से फुटबॉल जगत को प्रभावित किया. उन्होंने क्लब और देश के लिए 65 मुकाबलों में 73 गोल किए. उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत बायर्न म्यूनिख ने बुंडेसलीगा और जर्मन कप का खिताब जीता. टीम ने जर्मन सुपर कप भी अपने नाम किया.
जर्मन कप के फाइनल में केन ने स्टटगार्ट के खिलाफ हैट्रिक लगाई थी. इस प्रदर्शन ने बायर्न की खिताबी जीत में अहम योगदान दिया. केन की निरंतर गोल करने की क्षमता और बड़े मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें बैलन डी’ओर की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाया.
एक सीजन में सर्वाधिक गोल करने के मामले में लियोनेल मेसी का रिकॉर्ड अब भी उनसे आगे है. मेसी ने 2011-12 सीजन में 82 गोल किए थे. दिए गए आंकड़ों के अनुसार, केन के 73 गोल इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद दूसरे स्थान पर हैं.
विश्व कप में भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड
केन ने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए भी शानदार प्रदर्शन किया. विश्व कप में छह गोल दागकर उन्होंने गैरी लिनेकर को पीछे छोड़ दिया और टूर्नामेंट के इतिहास में इंग्लैंड के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए. इस उपलब्धि के साथ वह विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पांच में पहुंच गए.
हालांकि, इंग्लैंड का अभियान सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से हार के साथ समाप्त हुआ और टीम तीसरे स्थान पर रही. टीम को खिताब नहीं मिल सका, लेकिन केन के व्यक्तिगत प्रदर्शन ने उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों की कतार में और मजबूत जगह दिलाई.
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संघर्ष से शिखर तक पहुंचे केन
केन का सफर उन खिलाड़ियों से अलग रहा है, जिन्होंने किशोरावस्था में ही दुनिया भर में पहचान बना ली थी. टोटेनहम हॉटस्पर की अकादमी से निकलने के बाद उन्हें शुरुआती दौर में पहली टीम में नियमित मौके नहीं मिले. उन्हें अनुभव हासिल करने के लिए चार बार लोन पर दूसरे क्लबों में भेजा गया. निचली लीगों में खेलने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर टोटेनहम की पहली टीम में जगह बनाई.
इसके बाद केन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकरों में शामिल हुए और फिर बायर्न म्यूनिख से जुड़कर जर्मनी में अपनी पहचान बनाई. बैलन डी’ओर की जीत उनके इसी लंबे संघर्ष और लगातार बेहतर प्रदर्शन का बड़ा इनाम है.
भावुक भाषण में परिवार और साथियों को कहा धन्यवाद
लंदन के पैलेडियम में आयोजित समारोह के दौरान केन ने भावुक भाषण दिया. उन्होंने अपने करियर में मदद करने वाले लोगों का आभार जताया और उन सभी को याद किया, जिन्होंने उनके मुश्किल दौर में साथ दिया. अपने भाषण के अंत में उन्होंने परिवार के लिए खास संदेश दिया.
इस समारोह के लिए लंदन के पैलेडियम को पहली बार चुना गया था. पुरस्कार के 70 साल पूरे होने के अवसर पर यह आयोजन खास रहा. बैलन डी’ओर का पहला पुरस्कार 1956 में इंग्लैंड के सर स्टेनली मैथ्यूज ने जीता था.
अब चैम्पियंस लीग और इंग्लैंड के साथ खिताब पर नजर
बैलन डी’ओर जीतने के बावजूद केन के करियर में दो बड़े लक्ष्य अब भी बाकी हैं. वह चैम्पियंस लीग का खिताब जीतना चाहते हैं और इंग्लैंड के साथ किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की ट्रॉफी उठाना उनका सपना है.
टोटेनहम के साथ केन 2018-19 सीजन में चैंपियंस लीग के फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन उनकी टीम लिवरपूल से 0-2 से हार गई थी. बायर्न म्यूनिख के साथ भी उन्हें सेमीफाइनल में निराशा झेलनी पड़ी. दूसरी ओर, इंग्लैंड के साथ बड़े टूर्नामेंट का खिताब जीतने की उनकी कोशिश भी अब तक पूरी नहीं हुई है.
केन की बैलन डी’ओर जीत ने उनके व्यक्तिगत करियर को नई ऊंचाई दी है. अब उनकी नजर उन ट्रॉफियों पर होगी, जो उन्हें क्लब और देश के लिए भी इतिहास रचने का मौका दे सकती हैं.
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महिला वर्ग में एलेक्सिया पुटेलास की तीसरी जीत
पुरुष वर्ग में हैरी केन की ऐतिहासिक जीत के साथ महिला वर्ग का बैलन डी’ओर भी चर्चा में रहा. स्पेन की स्टार मिडफील्डर एलेक्सिया पुटेलास ने तीसरी बार यह पुरस्कार अपने नाम किया. उन्होंने पिछले सीजन में बार्सिलोना के साथ कई खिताब जीते थे, जिनमें महिला चैंपियंस लीग भी शामिल थी.
ऑफ सीजन में लंदन सिटी लायनेस से जुड़ीं 32 वर्षीय पुटेलास ने स्पेन की राष्ट्रीय टीम के साथ पिछले दिसंबर में महिला नेशंस लीग का खिताब भी जीता था. उन्होंने अपनी ही देश की खिलाड़ी एताना बोनमती के लगातार तीन साल के दबदबे को खत्म किया.
इस तरह बैलन डी’ओर समारोह में हैरी केन और एलेक्सिया पुटेलास ने अपने-अपने वर्ग में फुटबॉल का प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मान हासिल किया.