मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित ऐतिहासिक जवारी मंदिर की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. मूर्ति रक्षित-मूर्ति संरक्षित फाउंडेशन के चेयरमैन राकेश दलाल का दावा है कि प्रतिमा का लापता मस्तक खोज लिया गया है और नवंबर में इसे मूल विग्रह से जोड़ने की प्रक्रिया प्रस्तावित है. इस खबर ने प्राचीन भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर नई उम्मीद जगाई है.
नौ साल का संघर्ष, अब पूरी प्रतिमा देखने की उम्मीद
राकेश दलाल के मुताबिक जवारी मंदिर की करीब सात फीट ऊंची ऐतिहासिक विष्णु प्रतिमा का मस्तक मिलने की जानकारी उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने इसे देश की प्राचीन धरोहर को उसके मूल स्वरूप में पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उनका कहना है कि पुरातत्व विभाग के नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हुए बदलावों से इस दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है.
दलाल ने इस पहल के लिए केंद्र सरकार, पुरातत्व विभाग और इससे जुड़े अधिकारियों का आभार जताया है. हालांकि, प्रतिमा के मस्तक की खोज और उसे मूल विग्रह से जोड़ने की प्रस्तावित प्रक्रिया के संबंध में आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, लेकिन जारी रखा प्रयास
राकेश दलाल ने बताया कि प्रतिमा के खंडित मस्तक को ठीक कराने और मंदिर के संरक्षण की अनुमति के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिका का डायरी नंबर 32820/2025 बताया गया है. उनके अनुसार, अदालत ने इसे पुरातत्व विभाग से जुड़ा मामला मानते हुए याचिका खारिज कर दी थी. इस दौरान अदालत में की गई एक कथित टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ था.
दलाल का कहना है कि अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद भी उन्होंने इस मुद्दे पर प्रयास जारी रखे. प्रतिमा के मस्तक के गायब होने और प्राचीन कलाकृतियों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी की आशंका को देखते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और संस्कृति मंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है. ये आशंकाएं उनकी ओर से उठाई गई हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है.
24 नवंबर को 'एक दीप, एक संकल्प' अभियान की तैयारी
राकेश दलाल अब इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ जनभागीदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं. उन्होंने 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर खजुराहो के जवारी मंदिर परिसर में पूजा करने और एक दीप जलाने की अनुमति मांगी है. इसके साथ ही उन्होंने 'एक दीप, एक संकल्प' अभियान को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए यूनेस्को के निदेशक से भी अपील की है.
दलाल ने लोगों से 24 नवंबर को अपने घरों और मंदिरों में एक दीप जलाकर अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है. उनका उद्देश्य प्राचीन भारतीय धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है.
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भगवान विष्णु की ऐतिहासिक प्रतिमा के मस्तक को मूल विग्रह से जोड़ने की प्रक्रिया कब और किस तरह पूरी होती है. यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो खजुराहो की इस प्राचीन धरोहर को उसके मूल स्वरूप के करीब लाने की दिशा में यह एक अहम कदम हो सकता है.