वैभव सूर्यवंशी के बल्ले की चमक किसी से छिपी नहीं है. कम उम्र में टी20 क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से तहलका मचा चुके इस युवा बल्लेबाज को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं. लेकिन टीम इंडिया की टी20 इंटरनेशनल प्लेइंग XI में उनकी एंट्री फिलहाल इतनी आसान नहीं है. टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने साफ कर दिया है कि वैभव प्रतिभाशाली हैं, शानदार फॉर्म में हैं, लेकिन उन्हें अपने मौके का इंतजार करना पड़ सकता है.
वेस्टइंडीज के खिलाफ 5 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज से पहले जियोस्टार के कार्यक्रम ‘फॉलो द ब्लूज: गौतम गंभीर अनफिल्टर्ड’ में गंभीर ने वैभव के साथ हुई बातचीत और टीम चयन को लेकर अपनी सोच खुलकर रखी. उन्होंने माना कि वैभव को मौका देने की मांग स्वाभाविक है, लेकिन प्लेइंग XI सिर्फ मौजूदा फॉर्म या सोशल मीडिया के शोर से तय नहीं होगी.
‘वैभव टैलेंटेड हैं, लेकिन इंतजार करना होगा’
गंभीर ने कहा कि वैभव अच्छी फॉर्म में थे, लेकिन उन्हें समझाया गया कि कभी-कभी आपको अपना मौका आने तक इंतजार करना पड़ता है. खासकर तब, जब टीम में कुछ खिलाड़ी लंबे समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आए हों.
गंभीर के मुताबिक, ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा का माहौल बनाए रखना भी जरूरी है. अगर कोई खिलाड़ी लंबे समय से टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो सिर्फ कुछ मैच खराब जाने के बाद उसे बाहर कर युवा खिलाड़ी को मौका देना उनके लिए सही फैसला नहीं होगा.
यही वह बिंदु है जहां वैभव की चुनौती सामने आती है. गंभीर ने साफ कहा कि अगर वैभव को प्लेइंग XI में शामिल किया जाता है, तो किसी मौजूदा खिलाड़ी को बाहर बैठाना पड़ेगा. उनके सामने अभिषेक शर्मा या संजू सैमसन में से किसी एक को बाहर करने का सवाल खड़ा होगा.
बाहर का शोर टीम चयन का आधार नहीं...
गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि बाहर का शोर टीम चयन का आधार नहीं हो सकता. उनके मुताबिक सोशल मीडिया यह तय नहीं करता कि प्लेइंग XI में कौन खेलेगा. फैसला इस आधार पर होगा कि कोच और कप्तान किस संयोजन को मैच जिताने के लिए सबसे बेहतर मानते हैं.
यानी वैभव की लोकप्रियता, उनकी उम्र या उनके हालिया प्रदर्शन से ज्यादा महत्व टीम कॉम्बिनेशन और मौजूदा खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को दिया जाएगा.
गंभीर ने कहा कि अगर वैभव को खिलाना है तो किसी ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना होगा जिसने पिछले डेढ़-दो साल में टीम के लिए प्रभावशाली प्रदर्शन किया है. उनके मुताबिक अचानक तीन-चार खराब मैचों के बाद ऐसे खिलाड़ियों को बाहर नहीं किया जा सकता.
संजू-अभिषेक पर क्यों कायम हैं गंभीर?
गंभीर की पूरी दलील टीम में निरंतरता बनाए रखने के इर्द-गिर्द है. उनका कहना है कि कोई भी टीम एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक बिना हारे नहीं जाती और लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतना तो और भी मुश्किल है.
ऐसे में एक खराब सीरीज या तीन-चार मैचों का खराब प्रदर्शन किसी खिलाड़ी को अचानक खराब खिलाड़ी नहीं बना देता. गंभीर ने इसी वजह से संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को टीम में बनाए रखने के फैसले को सही बताया.
यानी वैभव के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा उनकी फॉर्म नहीं, बल्कि मौजूदा खिलाड़ियों का प्रदर्शन और टीम में बना भरोसा है.
गंभीर के लिए लोकप्रिय फैसला नहीं, सही फैसला जरूरी...
गंभीर ने यह भी कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान है, लेकिन सही फैसला लेना मुश्किल. उनके मुताबिक कोच के तौर पर उनका काम वह फैसला लेना है जो टीम के लिए सही हो, भले ही बाहर से उस फैसले पर सवाल उठें.
यही सोच वैभव के मामले में भी दिखाई दे रही है. एक तरफ किशोर बल्लेबाज का जबरदस्त टैलेंट और फॉर्म है, दूसरी तरफ संजू और अभिषेक के साथ टीम इंडिया का बना हुआ संयोजन. गंभीर फिलहाल इस संयोजन को सिर्फ वैभव को मौका देने के लिए तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं.
वैभव के लिए संदेश साफ
गंभीर के बयान से यह साफ है कि वैभव को लेकर टीम मैनेजमेंट के मन में कोई संदेह नहीं है. उन्हें प्रतिभाशाली माना जा रहा है और उनकी फॉर्म भी स्वीकार की जा रही है. लेकिन टीम इंडिया की टी20 प्लेइंग XI में जगह पाने के लिए सिर्फ टैलेंट और फॉर्म काफी नहीं हैं.
वैभव को अब इंतजार करना होगा...और जब मौका आएगा, तब उसे भुनाने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी होगी. फिलहाल गंभीर का संदेश सीधा है- टीम में जगह सोशल मीडिया की मांग से नहीं, टीम की जरूरत और लगातार प्रदर्शन से तय होगी.
भारत-वेस्टइंडीज का टी20 शेड्यूल