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कभी पाकिस्तानी क्रिकेटर से मिला था मुस्ल‍िम बनने का ऑफर, अब भारत में वही ख‍िलाड़ी लगा रहा मंदिर-मंदिर चक्कर

श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर तिलकरत्ने दिलशान इन दिनों भारत में अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं, जहां उन्होंने मां कामाख्या और आस्था केंद्र खाटू श्याम जैसे मंदिरों के दर्शन किए. यह सिलसिला उस पुराने विवाद के बाद फिर सुर्खियों में है, जब पाकिस्तानी बल्लेबाज अहमद शहजाद ने उन्हें इस्लाम अपनाने का ऑफर दिया था, जिसे दिलशान ने ठुकरा दिया था.

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अब मंदिरों की राह पर दिलशान... (Photo, instagram\(@tmdilshan.23)
अब मंदिरों की राह पर दिलशान... (Photo, instagram\(@tmdilshan.23)

क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, कई बार खिलाड़ियों की निजी आस्थाओं और जिंदगी के फैसलों का आईना भी बन जाता है. श्रीलंका के पूर्व स्टार बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह बल्ला नहीं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा है.

49 साल के दिलशान इन दिनों भारत दौरे पर हैं और लगातार धार्मिक स्थलों के दर्शन कर रहे हैं. असम के प्रसिद्ध मां कामाख्या मंदिर से लेकर राजस्थान के आस्था केंद्र खाटू श्याम मंदिर तक, उनका यह सफर पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में डूबा नजर आता है.

दिलशान ने 27 मार्च को इंस्टाग्राम पर मां कामाख्या मंदिर की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा-  'इस यात्रा में खुद को बेहद धन्य महसूस कर रहा हूं… यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा विनम्र बना देती है.'

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Instagram\T.M Dilshan (@tmdilshan.23)

इसके दो दिन बाद, 29 मार्च को उन्होंने खाटू श्याम मंदिर से भी पोस्ट शेयर किया और इसे 'शांति और भक्ति से भरा अनुभव' बताया.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दिलशान ने राजस्थान के नाथद्वारा स्थित ‘Statue of Belief’ का भी दौरा किया, जिसकी झलक सोशल मीडिया पर दिखी. यहां 369 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा है

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... लेकिन दिलशान की यह आध्यात्मिक यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके करियर से जुड़ा एक पुराना विवाद फिर याद किया जा रहा है.

जब मैदान पर मिला था ‘धर्म बदलने’ का ऑफर

यह घटना पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच एक वनडे मैच के बाद की है, जब पाकिस्तानी बल्लेबाज अहमद शहजाद ने दिलशान से बातचीत के दौरान धर्म को लेकर टिप्पणी कर दी थी.

शहजाद ने कहा था, 'अगर कोई गैर-मुस्लिम इस्लाम अपनाता है, तो उसे सीधे जन्नत मिलती है.'

इस पर दिलशान का जवाब उतना ही सीधा था, 'मुझे जन्नत पसंद नहीं है.'

बताया जाता है कि इस बातचीत का वीडियो भी सामने आया था, जिसने काफी विवाद खड़ा किया. हालांकि बाद में पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट ने इसे 'निजी बातचीत' बताकर मामला शांत करने की कोशिश की.

पहले मुस्लिम… फिर बदली आस्था

कम लोग जानते हैं कि दिलशान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. उनका नाम पहले तुवान मुहम्मद दिलशान था, लेकिन 16 साल की उम्र में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. आज वही दिलशान भारत में मंदिर-मंदिर जाकर शांति और सुकून तलाश रहे हैं.

क्रिकेट से परे, एक अलग सफर

दिलशान का यह रूप दिखाता है कि खिलाड़ी सिर्फ रिकॉर्ड्स और रन तक सीमित नहीं होते. उनकी अपनी आस्था, सोच और जिंदगी की राह होती है, जो समय के साथ बदलती भी है और नई कहानियां भी गढ़ती है.

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दिलशान ने श्रीलंका के लिए 87 टेस्ट (5492 रन, 40.98 औसत, 39 विकेट), 330 वनडे (10290 रन, 39.27 औसत, 106 विकेट) और 80  (1889 रन, 28.19 औसत, 9 विकेट) टी20 खेले.

अब सवाल ये नहीं कि दिलशान किस धर्म से जुड़े हैं… बल्कि ये है कि उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा क्या एक बड़ा संदेश दे रही है?
 

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