खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) भगवान श्रीकृष्ण के कलियुग अवतार माने जाते हैं और इनकी महिमा अपार है. इनका प्रमुख मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू गांव में है, जिसे खाटू श्याम मंदिर कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त "जय श्री श्याम" का सच्चे मन से जाप करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. मंदिर में फाल्गुन महीने में लगने वाला खाटू श्याम मेला बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं. निशान यात्रा भी बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसमें भक्त पैदल यात्रा करके मंदिर में ध्वजा (निशान) चढ़ाते हैं.
खाटू श्याम जी के प्रमुख मंत्र इस तरह है-
जय श्री श्याम
हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा
खाटू वाले का जयकारा, जय श्री श्याम हमारा
पौराणिक कथा के अनुसार इनका असली नाम बर्बरीक था, जो महाभारत के महान योद्धा और घटोत्कच के पुत्र थे. उन्होंने श्रीकृष्ण को यह वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे. चूंकि पांडवों को विजय दिलाना सुनिश्चित था, श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति देखकर उनसे उनका सिर दान में मांग लिया. बर्बरीक ने सहर्ष शीश दान कर दिया. श्रीकृष्ण ने उनके बलिदान से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि कलियुग में तुम "श्याम" नाम से पूजे जाओगे और जो भी सच्चे मन से तुम्हें याद करेगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी.
साल 2026 की शुरुआत देशभर में आस्था की गूंज के साथ हुई. खाटू धाम से लेकर काशी, अयोध्या और शिरडी तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां कड़ाके की ठंड भी भक्तों के कदम नहीं रोक सकी. मंदिरों और धामों में दिखा यही उत्साह नए साल की पहली तस्वीर को खास बना गया.
नया साल शुरू हो चुका है और साल 2026 के पहले दिन भक्त मंदिरों में पूजा के लिए पहुंच रहे हैं. इसी तरह साल 2025 के अंत में भी खाटू श्याम मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी तादाद देखने को मिली थी. लोग साल के अंतिम दिन भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हुए दिखाई दिए. खाटू श्याम मंदिर में इस अवसर पर भक्तों की मौजूदगी ने धार्मिक आस्था को दर्शाया.
नए साल के मौके पर खाटू श्याम नगरी में हालात सामान्य से अलग हैं. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते मंदिर प्रशासन को दर्शन और व्यवस्थाओं को लेकर अहम फैसले लेने पड़े हैं. लोग बाबा के दीदार की आस में घंटों लाइन में इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
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नए साल पर देशभर के प्रमुख तीर्थस्थल श्रद्धालुओं से भरे रहते हैं, जहां लंबी कतारें और भीड़ आम होती हैं. अगर आप अपने नए साल की यात्रा को सुकून और भक्ति से भरपूर रखना चाहते हैं, तो जानिए किन जगहों पर इस साल जाने से बचना बेहतर होगा.
Khatu shyam baba: खाटू श्याम बाबा के मंदिर में भक्त प्रतिदिन ध्वज चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं. कुछ लोग यह ध्वज घर भी लेकर आते हैं. कहते हैं कि इसे घर पर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
Rajasthan के Dausa में खाटूश्यामजी दर्शन से लौट रहे श्रद्धालुओं की कार ट्रक से टकरा गई. हादसे में 7 बच्चों और 3 महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत, कई घायल. पुलिस जांच जारी.
सीकर की धार्मिक नगरी खाटू श्याम जी में गुरुवार को एक शर्मनाक घटना सामने आई, जहां श्रद्धालुओं और दुकानदारों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात लाठियों और मारपीट तक पहुंच गई. घटना श्याम कुंड के पास उस समय हुई जब मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालु तेज बारिश से बचने के लिए एक दुकान में जा घुसे.
राजस्थान के सीकर में खाटू श्याम जी के मंदिर के पास भक्तों और स्थानीय दुकानदारों के बीच झड़प हो गई. बारिश से बचने के लिए दुकान में घुसे भक्तों को दुकानदारों ने लाठी-डंडों से पीटा, जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं. इस घटना के विजुअल्स सामने आए हैं, लेकिन अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है.
राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम मंदिर को ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है. जानिए मंदिर कैसे पहुंचें, दर्शन का सही समय और ठहरने की सस्ती व्यवस्था.
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा 21 मई को राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर के दर्शन करने पहुंची. दरअसल, इस मंदिर की महिमा ही कुछ ऐसी है कि यहां पर हर रोज लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरियाणा के हिसार जिले में बाबा खाटू श्याम के धड़ की पूजा होती है. आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक कहानी.
राजस्थान के कस्बे खाटू में एक शख्स शराब के नशे में खाटू श्याम जी स्थित तोरण द्वार पर चढ़ गया और सबसे ऊपर की मंजिल पर चढ़कर तेज- तेज चिल्लाने लगा. यह देखकर मौके पर अफरा तफरी मच गई.
बाबा श्याम का मूल मंदिर 1027 ई. में रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने बनवाया था. मारवाड़ के शासक ठाकुर के दीवान अभय सिंह ने ठाकुर के निर्देश पर 1720 ई. में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. मंदिर ने इस समय अपना वर्तमान आकार ले लिया और मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की गयी थी. मूर्ति दुर्लभ पत्थर से बनी है.
खाटू बाबा का इतिहास आज से 5000 साल पहले की पौराणिक गाथा से जुड़ा है. महाभारत के युद्ध के दौरान हुई एक घटना से खाटू वाले बाबा श्याम का प्राकट्य माना जाता है. क्या है यह कथा?