आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को हराकर भले ही सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया हो. लेकिन इस दौरान उसकी एक बड़ी कमजोरी खुलकर सामने आई है. जो आगे नॉकआउट मैच में सूर्या ब्रिगेड पर भारी पड़ सकती है. वो कमी है भारत की घटिया फील्डिंग. कहा जाता है कि कैच मैच जिताते हैं, लेकिन अगर यही हाल रहा तो भारत के लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है.
रविवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में जब विपक्षी टीम ने 195 रन बनाए, तब भारतीय खिलाड़ियों ने तीन आसान कैच टपका दिए. रोस्टन चेज़ का कैच अभिषेक शर्मा ने छोड़ा, जिन्होंने बाद में 25 गेंदों पर 40 रन बना दिए. इसके बाद शेरफेन रदरफोर्ड का कैच तिलक वर्मा से छूटा और फिर अभिषेक ने ही पावेल का एक और कैच गिराया, जिन्होंने 19 गेंदों में 34 रन बना दिए. साफ है कि इन गलतियों की कीमत टीम को चुकानी पड़ सकती थी.
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अबतक टीम इंडिया ने इतने कैच छोड़े
यह सिर्फ एक मैच की बात नहीं है. पूरे टूर्नामेंट में भारत अब तक कुल 13 कैच छोड़ चुका है. टीम की कैच पकड़ने की सफलता दर सिर्फ 72.7 प्रतिशत है, जो सुपर-8 में पहुंची सभी टीमों में सबसे खराब है.
फील्डिंग में पाकिस्तान से भी फिसड्डी है भारत
अगर बाकी टीमों से तुलना करें तो अंतर साफ दिखता है. इंग्लैंड इस सूची में सबसे ऊपर है, उनकी कैच सफलता दर 87.2 प्रतिशत है. जिम्बाब्वे 85.4 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है. वेस्टइंडीज 84.6 प्रतिशत, न्यूजीलैंड 83.9 प्रतिशत और पाकिस्तान 83.3 प्रतिशत के साथ भारत से काफी आगे हैं. दक्षिण अफ्रीका की दर 81.1 प्रतिशत और श्रीलंका की 77.8 प्रतिशत है. इन सबके मुकाबले भारत सबसे नीचे 72.7 प्रतिशत पर है.
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पाकिस्तान के खिलाफ मैच में तो हाल और भी खराब रहा. उस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने चार कैच छोड़ दिए थे. हालांकि भारत वह मैच जीत गया, लेकिन हर बार किस्मत साथ दे, यह जरूरी नहीं. आगे सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम से सामना है. ऐसी ही फील्डिंग रही, तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है.