श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट मैच में देवदत्त पडिक्कल ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया है. 26 वर्षीय पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़कर टीम इंडिया को पहले दिन के खेल में मजबूत स्थिति में पहुंचाया. पडिक्कल काफी अरसे बाद भारत के लिए टेस्ट मैच खेलने उतरे थे. इससे पहले पडिक्कल ने अपना आखिरी टेस्ट नवंबर 2024 में खेला था. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाए और श्रीलंका दौरे पर मिले मौके को हाथ से नहीं जाने दिया. बाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए यह पारी सिर्फ तीन अंकों तक पहुंचने की कहानी नहीं थी. गॉल की मुश्किल पिच, भीषण गर्मी और उमस के बीच उन्हें थकान से भी लड़ना पड़ा.
देवदत्त पडिक्कल ने बताया कि तीसरे सेशन तक बल्लेबाजी करना आसान नहीं था और शतक के करीब पहुंचने पर वह नर्वस भी हो गए थे. गॉल में गर्मी और उमस के कारण खिलाड़ियों के शरीर से लगातार पानी निकल रहा था और थकान बढ़ती जा रही थी. उन्होंने BCCI (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) की ओर से शेयर किए गए वीडियो में कहा, 'मेरे लिए इस पारी में सबसे अहम चीज दृढ़ता थी. खासकर तीसरे सेशन में मैं काफी थकान महसूस कर रहा था. बहुत गर्मी थी और लगातार पसीना निकलने के कारण काफी फ्लूइड कम हो रहा था. ऐसे में खुद को आगे बढ़ाते रहना जरूरी था.'
गॉल की पिच ने भी बल्लेबाजों को खुलकर शॉट खेलने की आजादी नहीं दी. देवदत्त पडिक्कल के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में खराब शॉट से बचना और लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण था. पडिक्कल ने पहली पारी में केएल राहुल के साथ मिलकर 150 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की. दोनों ने श्रीलंका के स्पिनर्स प्रभात जयसूर्या और केशरा नुवांथा के खिलाफ संभलकर बल्लेबाजी की और मौका मिलने पर बड़े शॉट भी लगाए.
प्रैक्टिस मैच में भी किया था कमाल
केएल राहुल 77 रन बनाने के बाद क्रैम्प की समस्या के कारण रिटायर्ड हर्ट हुए. इसके बावजूद पडिक्कल ने अपना विकेट बचाए रखा और पहली टेस्ट सेंचुरी तक पहुंचे. इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ वार्म-अप मुकाबले में भी पडिक्कल ने शतक लगाया था. यानी उन्होंने अपनी शानदार फॉर्म को मुख्य सीरीज में भी बरकरार रखा.
देवदत्त पडिक्कल के लिए इस शतक के पीछे सबसे बड़ी कहानी उनका इंतजार रहा. उन्होंने कहा कि करीब दो साल तक टेस्ट टीम से बाहर रहने के दौरान धैर्य बनाए रखना आसान नहीं था. पडिक्कल ने कहा, 'मेरा पिछला टेस्ट 2024 में था. मुझे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और बाहर बैठकर देखना कभी आसान नहीं होता. लेकिन इस समय ने मुझे अपने खेल पर काम करने और जिन चीजों में सुधार की जरूरत थी, उन्हें बेहतर करने का मौका दिया.'
रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद पडिक्कल ने दोबारा भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई. अब गॉल में शतक ने नंबर-3 पर उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है. पडिक्कल ने यह भी स्वीकार किया कि 90 रन पार करने के बाद पहली टेस्ट सेंचुरी का दबाव महसूस होने लगा था. उन्होंने कहा कि शतक के करीब पहुंचते समय वह थोड़े नर्वस थे, लेकिन आखिरकार तीन अंकों तक पहुंचना राहत की बात रही.