44 दिन और 49 मैचों का सफर जब अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचा तो ये तय था कि या तो इतिहास दोहराया जाएगा या फिर नया इतिहास रचा जाएगा. मेलबर्न
क्रिकेट ग्राउंड पर करीब 1 लाख लोग इसी ऐतिहासिक लम्हे का गवाह बनने पहुंचे थे. के तमाम रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के खाते में जमा थे, इसलिए उनके खेमे में
जोश भरपूर था लेकिन इस वर्ल्डकप में न्यूजीलैंड की दमदार फॉर्म, एक भी मैच ना हारने का सिलसिला और लीग राउंड में ऑस्ट्रेलिया को पटखनी देने का कारनामा उन्हें
भी एक मजबूत विरोधी के तौर पर पेश कर रहा था. रनों से भरी मेलबर्न की पिच पर टॉस अहम था. किस्मत का साथ न्यूजीलैंड को मिला और ब्रैंडन मैक्कलम ने झट
से बल्लेबाज़ी चुन ली. अपने वन-डे करियर का आखिरी मैच खेल रहे क्लार्क भी चाहते तो बल्लेबाजी करना ही थे लेकिन टॉस हारे थे इसलिए उन्हें गेंदबाज़ी में ही पहले
दम दिखाना था. सेमीफाइनल के दबाव भरे मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले 11 खिलाड़ियों पर ही दोनों टीमों ने भरोसा जताया और टीम में बिना किसी बदलाव के
खिताब की फाइनल जंग में उतर पड़े. न्यूजीलैंड के ओपनर ब्रैंडन मैक्कलम और मार्टिन गप्टिल अपने करियर की सबसे बड़ी पारी खेलने मैदान में उतरे.
न्यूजीलैंड को झटके पर झटका
मैक्कलम और गप्टिल पूरे टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड को शानदार शुरुआत देते आए थे. एक बार फिर से उन्हें यही करना था लेकिन फाइनल का दबाव इस जोड़ी पर भारी पड़
गया. कप्तान मैक्कलम ने पारी के पहले ही ओवर में ऐसी गलती की जो उन्हें शायद जीवनभर भुलाए नहीं भूलेगी. मिचेल स्टार्क के ओवर की पांचवी गेंद एकदम सीधी
थी, मैक्कलम को उसे सीधे बल्ले से खेलना था लेकिन इससे पहले कि उनका बल्ला नीचे आता गेंद ऑफ स्टंप लेकर उड़ चुकी थी. मैदान में मौजूद हर दर्शक अपनी
सीटों से खड़े होकर स्टार्क के लिए तालियां बजा रहा था और ब्रैंडन मैक्कलम खामोशी से बिना कोई रन बनाए पवेलियन की तरफ लौट रहे थे. न्यूजीलैंड ने 1 रन पर 1
विकेट खो दिया था. केन विलियम्सन क्रीज पर आए तो उन पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी थी. मार्टिन गप्टिल के साथ मिलकर उन्होंने धीरे-धीरे न्यूजीलैंड की पारी को आगे
बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया. स्टार्क, हेज़लवुड और जॉनसन की ऑस्ट्रेलियाई पेस बैट्री ने कहर बरपाना शुरू कर दिया. जितनी गेंदों पर रन बन रहे थे उससे ज्यादा गेंदों
पर न्यूजीलैंड के बल्लेबाज बीट हो रहे थे. अगले 10 ओवर तक विलियम्सन और गप्टिल ने बेहद धीमी बल्लेबाज़ी की. इस दौरान न्यूजीलैंड का औसत सिर्फ 3 रन प्रति
ओवर था. 12वें ओवर में क्लार्क ने गेंदबाज़ी में अचानक बदलाव किया और ग्लेन मैक्सवेल को गेंद थमा दी. मैक्सवेल ने अपनी दूसरी ही गेंद पर वो कर दिखाया जिसकी
किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. एक शॉर्ट ऑफ लेंथ ऑफब्रेक गेंद को पंच करने के लिए गप्टिल थोड़ा पीछे हुए लेकिन गेंद उतनी स्पिन नहीं हुई जितनी उम्मीद थी.
जब तक गप्टिल का बल्ला गेंद तक पहुंचता, गेंद उनके ऑफ स्टंप की गिल्लियां बिखेर चुकी थी. 34 गेंदों पर सिर्फ 15 रन बनाकर इस टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के सबसे
बड़े स्टार मार्टिन गप्टिल की विदाई हुई. विलियम्सन के साथ मिलकर उन्होंने 10.3 ओवर में सर्फ 32 रन जोड़े. 11.2 ओवर में न्यूजीलैंड का स्कोर 33 रन पर 2 विकेट
था. अगले ओवर में विलियम्सन भी चलते बने. जॉनसन की एक लेंथ गेंद को सीधे पुश करने की कोशिश में वो जॉनसन को ही कैच थमा बैठे. विलियम्सन ने 33 गेंदों
पर 12 रन बनाए. पारी के 50 रन भी पूरे नहीं हुए थे और न्यूजीलैंड के तीन अहम बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे.
इलियट-टेलर ने संभाली पारी
सेमीफाइनल मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच जिताऊ पारी खेलने वाले ग्रांट इलियट और स्टार बल्लेबाज रॉस टेलर पर अब सारी ज़िम्मेदारी आ पड़ी. दोनों पर ना
सिर्फ विकेट बचाने का दबाव था बल्कि अपनी टीम को एक ऐसे स्कोर तक भी पहुंचाना था जहां से न्यूजीलैंड इस मुकाबले को जीतने के बारे में सोच सके. दोनों ने
मिलकर पहले तो पारी को जमाया और फिर तेजी से रन बनाने भी शुरू कर दिए. हालांकि 20वें ओवर में न्यूजीलैंड को एक और झटका लग सकता था लेकिन रिव्यू ने
उन्हें बचा लिया. मैक्सवेल की गेंद पर अंपायर धर्मसेना ने इलियट को एलबीडब्ल्यू करार दिया लेकिन टेलर के कहने पर इलियट ने इसके खिलाफ रिव्यू ले लिया. रीप्ले
से साफ था कि गेंद लेग स्टंप से बाहर जा रही थी. अंपायर को फैसला बदलना पड़ा. इसके बाद करीब 5 की औसत से खेले हुए इलियट और टेलर ने न्यूजीलैंड को 27वें
ओवर में 100 के पार पहुंचा दिया. इसके बाद जमकर बल्लेबाजी कर रहे इलियट ने 51 गेंदों पर 3 चौकों और एक छक्के की बदौलत अपनी हाफ सेंचुरी भी पूरी कर ली.
जिस साझेदारी की जरूरत न्यूजीलैंड को थी वो जम चुकी थी. 128 गेंदों पर दोनों ने 100 रन जोड़ डाले. 35वें ओवर तक न्यूजीलैंड का स्कोर 150 पर पहुंच चुका था.
गए टेलर, उधड़ गई न्यूजीलैंड की पारी
72 गेंदों पर 40 रन बनाने के बाद टेलर का धैर्य जवाब दे गया. 36वें ओवर की पहली ही गेंद पर फॉकनर ने टेलर को फंसा लिया. उनकी स्लो लेगकटर को ड्राइव करने
की कोशिश में टेलर विकेटकीपर हेडिन के हाथों धर लिए गए. हेडिन ने एक हाथ से डाइव लगाते हुए शानदार कैच पकड़ा. अंपायर को इस फैसले के लिए टीवी रीप्ले का
सहारा लेना पड़ा. सेमीफाइनल के दूसरे हीरो कोरी एंडरसन अब क्रीज पर थे. एक बार फिर हर कोई उनकी और इलियट की एक बेहतरीन साझेदारी की उम्मीद कर रहा था
लेकिन फॉकनर ने एक गेंद बाद ही सारी उम्मीदें तोड़ कर रख दीं. फॉकनर की फुल लेंथ बॉल पर एंडरसन का स्लो रिएक्शन उन्हें ले डूबा. गेंद उनके पैड से लगती हुई
स्टंप्स में समा गई. एंडरसन खाता तक नहीं खोल पाए. अगले ओवर में मिचेल स्टार्क ने न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज़ ल्यूक रॉन्की का शिकार किया. क्लार्क ने
शानदार कप्तानी करते हुए स्टार्क के लिए स्लिप रखी, जिसका इनाम उन्हें रॉन्की के कैच के रूप में मिला. स्टार्क की गेंद पर रॉन्की ने बल्ला अड़ाया और गेंद बल्ले का
बाहर किनारा लेती हुई सीधे क्लार्क के पास पहुंच गई. फाइनल मैच में खाता ना खोल पाने वाले रॉन्की न्यूजीलैंड के तीसरे बल्लेबाज बने. 35 से 40 ओवर के बीच
पावरप्ले में न्यूजीलैंड ने सिर्फ 15 रन बनाए और 3 विकेट गंवाए. 151 पर 6 विकेट खोकर कीवी टीम बैकफुट पर थी.
ऑस्ट्रेलिया ने कसा फंदा
पावरप्ले के बाद ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही ओवर में न्यूजीलैंड को फिर से झटका दे दिया. 41वें ओवर में जॉन्सन की जबरदस्त यॉर्कर का जवाब डेनियल विटोरी के पास
नहीं था. गेंद उनके पैड से लगती हुई स्टंप्स में जा घुसी . अपने वन-डे करियर की आखिरी पारी में विटोरी ने 21 गेंदों पर 9 रन बनाए. अगले ओवर में जमकर खेल रहे
ग्रांट इलियट भी गलती कर गए. फॉकनर की स्लोअर गेंद को लेग साइड पर उड़ाकर खेलने में वो जल्दबाज़ी कर गए और गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर
हेडिन के पास चली गई. इलियट ने 82 गेंदों पर 83 रन की शानदार पारी खेली जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल थे.
200 बनना हुआ मुहाल
न्यूजीलैंड के गेंदबाज अब बल्लेबाजी कर रहे थे और रन बनने मुश्किल ही नहीं बहुत मुश्किल हो गए थे. 45वें ओवर में मैट हेनरी बिना खाता खोले जॉनसन का शिकार
बन गए, उन्हें कवर प्वाइंट पर स्टार्क ने लपका. न्यूजीलैंड के लिए 200 का स्कोर अब दूर की कौड़ी लगने लगा. जॉनसन के इसी ओवर की आखिरी गेंद को बोल्ट ने
शॉर्टलेग पर खेला, जहां खड़े मैक्सवेल ने फुर्ती दिखाते हुए उसे नॉन स्ट्राइकर एंड पर सीधे विकेट में दे मारा. टिम साउदी गेंद से पहले क्रीज में नहीं लौट पाए और इसी
के साथ न्यूजीलैंड की पारी का अंत 183 रन पर हो गया. विश्व विजेता बनने के लिए कंगारू टीम को 184 रन बनाने होंगे. ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर वर्ल्डकप फाइनल
जैसे मुकाबले में उसे दिया गया, ये टारगेट बेहद मामूली था, जिसे बचाने के लिए न्यूजीलैंड के गेंदबाज़ों को ज़मीन-आसमान एक करने की जरूरत होगी.