नागोया एशियन गेम्स में स्टार वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने भारत को मेडल दिलाकर अपना सफर सिल्वर के साथ खत्म किया. महिलाओं के 60 किग्रा सांडा फाइनल में उन्हें चीन की झांग शियाओयू ने 2-0 से हराया.
रोशिबिना ने विवादों के बीच रिंग में शानदार प्रदर्शन किया. फाइनल से पहले उन्होंने वियतनाम की 2023 वर्ल्ड चैम्पियन गुयेन थी थू थुय को हराकर गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बनाई थी. हालांकि फाइनल में चीन की झांग शियाओयू ने दोनों राउंड में दबदबा बनाया और रोशिबिना को 0-2 से हरा दिया.

यह 25 साल की रोशिबिना का एशियन गेम्स में तीसरा मेडल है. उन्होंने 2018 जकार्ता-पालेमबांग में ब्रॉन्ज और 2023 हांगझोऊ गेम्स में सिल्वर जीता था. इस तरह वह एशियन गेम्स में वुशू में लगातार तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.
'मैं इसे नजरअंदाज करूंगी...' विवाद के बाद बोलीं रोशिबिना, फेडरेशन के फैसले को बताया सही
रोशिबिना देवी ने अपने चयन को लेकर हुए विवाद पर पहली बार खुलकर बात की. मणिपुर की इस 25 वर्षीय वुशू खिलाड़ी ने साथी खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों को नजरअंदाज करने की बात कही.
रॉशिबिना ने कहा- जो हुआ, वह मेरी वजह से नहीं था. यह फेडरेशन का फैसला था. मुझे लगता है कि फेडरेशन ने अच्छा फैसला लिया.दिव्यांशी ने जून में श्रीनगर में हुए एशियन गेम्स ट्रायल में रॉशिबिना को हराया था. लेकिन बाद में ACL चोट के कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. इसके बाद दिव्यांशी ने रॉशिबिना पर एशियन गेम्स टीम में जगह बनाने के लिए उनके खिलाफ काम करने और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया था.
Wushu Association of India (WAI) के मुताबिक, अगस्त के आखिरी सप्ताह में दिव्यांशी की MRI में हाई-ग्रेड ACL टियर और बड़े स्तर पर सूजन सामने आई थी. इसी वजह से उन्हें टीम से हटाया गया. बाद में दिव्यांशी ने WAI के समर्थन से वापसी की बात कही, लेकिन रोशिबिना और उनके परिवार को परेशान करने के आरोप पर वह कायम रहीं.
रोशिबिना, जो सिलेक्शन ट्रायल्स में युवा दिव्यांशी चौधरी से हार गई थीं, लेकिन बाद में अपनी युवा प्रतिद्वंद्वी के चोटिल होने के बाद टीम में जगह बना ली, महिलाओं के 60kg सांडा फाइनल में चीन की दमदार खिलाड़ी झांग शियाओयू से 0-2 से हार गईं. रोशिबिना ने बताया कि उन्हें एशियन गेम्स टीम में शामिल किए जाने की जानकारी टीम के रवाना होने से कुछ दिन पहले ही मिली थी.
उन्होंने कहा- जब मैं यहां एशियन गेम्स के लिए आई तो काफी परेशानी थी. मुझे तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला. अगर मुझे ज्यादा समय मिलता तो मैं बेहतर कर सकती थी.
जब उनसे पूछा गया कि परेशानी क्या थी, तो उन्होंने कहा- मैं शुरुआत में टीम में नहीं थी. बस यही बात थी.
बाकी सांडा खिलाड़ी का कैसा रहा प्रदर्शन
रोशिबिना के सिल्वर से भारतीय वुशू कैम्प को राहत मिली, क्योंकि बाकी सांडा खिलाड़ी पोडियम तक नहीं पहुंच सके. पुरुषों के 56 किग्रा वर्ग में आर्यन क्वार्टर फाइनल में हार गए, जबकि महिला 52 किग्रा में अपर्णा राउंड ऑफ 16 में बाहर हो गईं. पुरुषों के 75 किग्रा में विक्रांत बलियान को शुरुआती राउंड में हार मिली.
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ताओलू में भी भारत का कोई खिलाड़ी पोडियम राउंड तक नहीं पहुंच सका. महिला नानक्वान और नानदाओ में लांगलेंटोंबी देवी हंजाबाम ने 18.839 का संयुक्त स्कोर बनाया और 9वें स्थान पर रहीं. महिला चांगक्वान में न्येमान वांगसू 9.573 के फाइनल स्कोर के साथ 15वें स्थान पर रहीं. पुरुष चांगक्वान के मजबूत फाइनल फील्ड में सूरज सिंह मायांगलंबम 11वें स्थान पर रहे.
कौन है रोशिबिना देवी?
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई गांव से आने वाली रोशिबिना देवी एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. वह SAI NCOE इम्फाल में महिला 60 kg सांडा वर्ग में कोच मैबाम प्रेमकुमार सिंह के अंडर ट्रेनिंग करती हैं. रोशिबिना भारत की सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाली वुशू प्लेयर्स में शामिल हैं. उन्होंने 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज जीता था. इसके बाद 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल अपने मेडल का रंग बेहतर किया. वह एशियन गेम्स में वुशू का सिल्वर जीतने वाली दूसरी भारतीय बनी थीं. 
अब 2026 एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीतने वाली रोशिबिना ने लगातार तीन एशियन गेम्स में मेडल जीतने की उपलब्धि हासिल कर ली है. वह एशियन गेम्स में वुशू में तीन लगातार मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं. उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें 2023 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा खेल सम्मान है. इसी साल इंटरनेशनल वुशु फेडरेशन (IWUF) ने उन्हें फीमेल वुशु एथलीट ऑफ द ईयर (सांडा) का खिताब भी दिया था.
रोशिबिना देवी ने कब कब कौन से मेडल जीते और अन्य रिकॉर्ड