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किस नस्ल की भैंसों को कहते हैं घी की खान? जिन्हें लाकर लोग ऑनलाइन बेच रहे घी

घी और मक्खन का कारोबार शुरू करने वाले पशुपालकों के लिए ज्यादा फैट वाला दूध फायदेमंद हो सकता है. मुर्रा, जाफराबादी, नीली रावी और भदावरी जैसी भैंसों के दूध में अच्छे फैट की जानकारी दी गई है.

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दूध का इस्तेमाल घी, मक्खन और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है. ( Photo: ITG)
दूध का इस्तेमाल घी, मक्खन और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है. ( Photo: ITG)

अगर आप दूध से घी और मक्खन बनाकर बेचने का कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो भैंस की नस्ल का चुनाव काफी मायने रखता है. दरअसल, दूध में फैट जितना ज्यादा होगा, उससे घी और मक्खन निकालने की क्षमता भी उतनी बेहतर हो सकती है. इसी वजह से डेयरी कारोबार में ज्यादा फैट वाले दूध देने वाली भैंसों की नस्लों की मांग रहती है. पशुपालन से जुड़ी एक रिपोर्ट में मुर्रा, जाफराबादी, नीली रावी और भदावरी जैसी भैंसों की नस्लों का जिक्र किया गया है. इनके दूध में दूसरी कई नस्लों की तुलना में अच्छा फैट पाया जाता है. यही वजह है कि इनसे मिलने वाले दूध का इस्तेमाल घी, मक्खन और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है.

भदावरी भैंस के दूध में सबसे ज्यादा फैट
भदावरी भैंस को ज्यादा फैट वाले दूध के लिए जाना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके दूध में करीब 8 से 13 प्रतिशत तक फैट पाया जा सकता है. ज्यादा फैट होने की वजह से इससे घी और मक्खन जैसे प्रोडक्ट तैयार करने में फायदा हो सकता है. भदावरी नस्ल मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में पाई जाती है. छोटे स्तर पर डेयरी या घी-मक्खन का कारोबार शुरू करने वाले किसान इस नस्ल को विकल्प के तौर पर देख सकते हैं.

जाफराबादी भैंस भी देती है अच्छा फैट वाला दूध
जाफराबादी भैंस गुजरात की प्रमुख नस्लों में शामिल है. इसका शरीर काफी बड़ा होता है और यह अच्छी मात्रा में दूध देने के लिए जानी जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, जाफराबादी के दूध में करीब 7 से 9 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है. ऐसे में इसके दूध से घी और मक्खन जैसे प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं. अगर किसान दूध बेचने के बजाय उससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाकर बेचना चाहते हैं, तो यह नस्ल एक विकल्प हो सकती है.

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मुर्रा भैंस क्यों है इतनी खास?
मुर्रा भैंस देश की सबसे चर्चित डेयरी नस्लों में से एक है. हरियाणा और पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में इसका पालन किया जाता है. अच्छी दूध उत्पादन क्षमता की वजह से डेयरी फार्मिंग में इसकी खास पहचान है. रिपोर्ट के अनुसार, मुर्रा के दूध में करीब 7 से 8 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है. इसका मतलब है कि इसके दूध से घी और मक्खन जैसे प्रोडक्ट तैयार करने के लिए अच्छा कच्चा माल मिल सकता है. मुर्रा की खासियत सिर्फ फैट ही नहीं, बल्कि इसकी दूध उत्पादन क्षमता भी मानी जाती है. यही वजह है कि डेयरी कारोबार में किसान अक्सर इस नस्ल को प्राथमिकता देते हैं.

नीली रावी का दूध भी घी के लिए उपयोगी
नीली रावी भैंस मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र से जुड़ी नस्ल है. इसे दूध उत्पादन और दूध में अच्छे फैट के लिए जाना जाता है. रिपोर्ट में इसके दूध में करीब 6 से 8 प्रतिशत तक फैट होने की जानकारी दी गई है. इसलिए इससे भी घी और मक्खन जैसे डेयरी प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. आज के समय में सिर्फ कच्चा दूध बेचने के बजाय उससे घी, मक्खन, पनीर और दूसरे प्रोडक्ट बनाकर बेचने का विकल्प भी मौजूद है. खासकर घी को पैक करके ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, ऑनलाइन कारोबार शुरू करने से पहले दूध की लागत, पशुओं के चारे का खर्च, घी निकालने की लागत, पैकेजिंग, डिलीवरी और मार्केटिंग जैसे खर्चों का हिसाब लगाना जरूरी है. सिर्फ ज्यादा फैट वाला दूध होने से मुनाफा तय नहीं होता.

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नस्ल चुनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
भैंस खरीदते समय केवल नस्ल के नाम पर फैसला नहीं करना चाहिए. पशु की उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की स्थिति, पिछले रिकॉर्ड, चारे की उपलब्धता और स्थानीय मौसम भी देखना जरूरी है. साथ ही, किसी भी नस्ल में दूध की मात्रा और फैट हर पशु में एक जैसा नहीं होता. इसलिए खरीदारी से पहले पशु विशेषज्ञ या अनुभवी पशुपालक की सलाह लेना बेहतर रहता है. कुल मिलाकर, अगर कोई किसान दूध से घी और मक्खन बनाकर अपना कारोबार बढ़ाना चाहता है, तो मुर्रा, जाफराबादी, नीली रावी और भदावरी जैसी ज्यादा फैट वाले दूध की नस्लों के बारे में जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है. लेकिन बिजनेस शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार और पूरे खर्च का हिसाब जरूर करना चाहिए.

ऑनलाइन घी बेचने के लिए एफएसएसएआई के मुख्य नियम
अगर आप ऑनलाइन घी बेचने का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको एफएसएसएआई का रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना होगा. यह आपके बिजनेस के टर्नओवर और काम के प्रकार के हिसाब से तय होता है. घी की क्वालिटी भी एफएसएसएआई के तय मानकों के मुताबिक होनी चाहिए. नियमों के अनुसार घी में कम से कम 99.5 फीसदी मिल्क फैट और अधिकतम 0.5 फीसदी नमी होनी चाहिए. इसके अलावा घी की शुद्धता जांचने के लिए कई दूसरे मानक और टेस्ट भी तय किए गए हैं.

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घी के पैकेट पर प्रोडक्ट का नाम, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, नेट क्वांटिटी, बनाने की तारीख और एक्सपायरी या बेस्ट बिफोर डेट जैसी जरूरी जानकारी साफ-साफ लिखनी होती है. घी बनाने, पैक करने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई और हाइजीन के नियमों का पालन करना भी जरूरी है. अगर आप घी को अमेजॉन-फ्लिपकार्ट या किसी दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए बेचते हैं, तब भी एफएसएसएआई के नियम लागू होते हैं. यानी ऑनलाइन घी बेचने के लिए सिर्फ अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट होना ही काफी नहीं है, बल्कि जरूरी एफएसएसएआई लाइसेंस और लेबलिंग नियमों का पालन करना भी जरूरी है.

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