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फरवरी की 'कूलनेस' कहां चली गई? मौसम में बदलाव दे रहा खतरनाक संकेत

भारत में शीत लहर का पैटर्न बदल रहा है. 2026 में जनवरी में शीत लहर वाले 24 दिन रिकॉर्ड हुए, लेकिन फरवरी में एक भी नहीं. यह पांच सालों में पहली बार हुआ. कुल 15 राज्यों में फैली 24 घटनाएं, जो पिछले पांच सालों में दूसरी सबसे कम हैं. ठंड अब मुख्य सर्दी महीनों तक सीमित नहीं रही. समय और जगह के अनुसार बदल रही है.

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अनंतनाग में एक व्यक्ति जमी हुई पेड़ की डाल को देख रहा है. (Photo: PTI)
अनंतनाग में एक व्यक्ति जमी हुई पेड़ की डाल को देख रहा है. (Photo: PTI)

भारत में शीत लहर अब बदल रही हैं. डाउन टू अर्थ (DTE) के विश्लेषण से पता चला है कि ये घटनाएं अब सिर्फ मुख्य सर्दीभारत में शीत लहर का पैटर्न बदल रहा है. 2026 में जनवरी में शीत लहर वाले 24 दिन रिकॉर्ड हुए, लेकिन फरवरी में एक भी नहीं. यह पांच सालों में पहली बार हुआ. कुल 15 राज्यों में फैली 24 घटनाएं, जो पिछले पांच सालों में दूसरी सबसे कम हैं. ठंड अब मुख्य सर्दी महीनों तक सीमित नहीं रही. समय और जगह के अनुसार बदल रही है. के महीनों (जनवरी-फरवरी) तक सीमित नहीं रह गई हैं. इनका समय और जगह दोनों बदल रहे हैं, जिससे मौसम की अनिश्चितता बढ़ गई है.

2026 में क्या हुआ?

इस साल जनवरी में देशभर में कुल 24 शीत लहर के दिन आए. लेकिन फरवरी में एक भी शीत लहर का दिन नहीं आया. सर्दी का मौसम 28 फरवरी को खत्म हो रहा है. IMD के अनुसार अब तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने वाला है. आखिरी शीत लहर 25 जनवरी को राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के कुछ इलाकों में देखी गई, जबकि शीत लहर वाले दिन 27 जनवरी तक हिमाचल में रहे. 

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इससे फरवरी 2026 पिछले पांच सालों में पहला ऐसा महीना बन गया, जिसमें कोई शीत लहर नहीं आई. 2022 से 2025 तक फरवरी में शीत लहर के दिन आए थे—2022 में 6, 2023 में 1, 2024 में 7 और 2025 में 5 दिन.

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पूरे सर्दी के मौसम (जनवरी-फरवरी) में 2026 में कुल 24 शीत लहर के दिन थे, जो 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए थे. यह पिछले पांच सालों में दूसरी सबसे कम संख्या है (2023 में 21 दिन सबसे कम थे). 2024 में 38, 2022 में 30 और 2025 में 26 दिन थे.

Where has February coolness gone

शीत लहर क्या होती है?

IMD के अनुसार

  • शीत के दिन: अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री कम हो.
  • गंभीर शीत दिवस: 6.4 डिग्री से ज्यादा कम.
  • शीत लहर: न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री कम.
  • गंभीर शीत लहर: 6.4 डिग्री से ज्यादा कम. 

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जगह में बदलाव?

2022 से 2026 तक शीत लहरें ज्यादातर उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में केंद्रित रहीं, लेकिन फैलाव हर साल अलग रहा.

  • 2022: 14 राज्यों में 30 दिन, दक्षिण या दक्षिण-पूर्व में कोई प्रभाव नहीं.
  • 2023: 17 राज्यों में सबसे ज्यादा फैलाव (5 साल में सर्वाधिक), लेकिन कुल दिन सिर्फ 21. तेलंगाना और कर्नाटक में भी शीत लहर आई.
  • 2024: 38 दिन, लेकिन सिर्फ 13 राज्यों तक सीमित.
  • 2025: सिर्फ 9 राज्यों में, लेकिन तेलंगाना में एक दिन.
  • 2026: फिर 15 राज्यों तक फैला (2023 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा), कर्नाटक दक्षिण का एकमात्र प्रभावित राज्य रहा. ओडिशा में भी 7 दिन शीत लहर/शीत दिवस आए.

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समय में बड़ा बदलाव: पोस्ट-मॉनसून में बढ़ोतरी

सामान्यतः शीत लहरें नवंबर-दिसंबर (पोस्ट-मॉनसून) में कम और जनवरी-फरवरी (सर्दी) में ज्यादा होती हैं. 2022-2024 में सर्दी में 65-72% घटनाएं हुईं. लेकिन 2025 में सब उलट गया—पोस्ट-मॉनसून में 65% (49 दिन, 5 साल में सबसे ज्यादा) और सर्दी में सिर्फ 35%.

नवंबर 2025 में अकेले 20 दिन शीत लहर आईं (2022 से 10 गुना ज्यादा), जो 7 नवंबर से शुरू हुई. यह 13 राज्यों में फैली, जिसमें उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व-उत्तर-पूर्व और दक्षिण सभी क्षेत्र शामिल थे. यह दिखाता है कि शीत लहरें अब मुख्य सर्दी के महीनों तक सीमित नहीं हैं. 

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कारण और प्रभाव?

विश्लेषण में कहा गया है कि 2023 जैसी स्थितियां (अल नीनो विकसित होने की संभावना) फरवरी में ठंड कम होने का कारण हो सकती हैं. पिछले साल ला नीना के कारण दक्षिण, मध्य और पूर्व में ठंड ज्यादा थी. अल नीनो से सर्दी जल्दी खत्म हो सकती है. गर्मी तेज हो सकती है. शीत लहरों की कमी रबी फसलों जैसे गेहूं को नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि ठंड फसलों के लिए जरूरी होती है.

विश्लेषण से साफ है कि भारत में शीत लहरों का पैटर्न बदल रहा है- समय पहले आना, जगह का फैलाव बढ़ना-घटना और अनियमितता बढ़ना. यह छोटी-मोटी उतार-चढ़ाव हो सकती हैं. जलवायु परिवर्तन से बड़े बदलाव का संकेत. इन्हें लगातार ट्रैक करना जरूरी है, ताकि किसानों, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन के लिए बेहतर तैयारी हो सके.

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