इंडिया टुडे की OSINT टीम ने नासा के सैटेलाइट चित्रों और दूर से देखने वाले डेटा का अध्ययन किया है. इन चित्रों में ईरान की राजधानी तेहरान के ऊपर जहरीला काला धुआं साफ दिख रहा है. अमेरिका और इजरायल के हमलों से तेल स्टोरेज और रिफाइनरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है जिससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा बढ़ गया है.
रविवार सुबह तेहरान के आसमान में ऊंची-ऊंची आग की लपटें दिख रही थीं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऐसी आग से जहरीले रसायन और प्रदूषक निकलते हैं. इनका असर कितना खतरनाक होगा. यह आग कितने समय तक जलती रहे.
यह भी पढ़ें: ... वो 13 देश जिन्होंने वॉर में जानमाल का नुकसान झेला, जानिए कहां गिरीं ड्रोन-मिसाइलें
9 मार्च को नासा के मॉडिस उपग्रह ने तेहरान के ऊपर लंबा और घना काला धुआं का सिलसिला कैद किया. यह धुआं हमलों के एक दिन बाद दिखा. चित्र में यह धुआं शहर के आसमान में 67 किलोमीटर तक फैला हुआ दिख रहा है.

शनिवार देर रात इजरायल की सेना ने ईरान के कई ऑयल डिपो पर हमला किया. इनमें तेहरान के शाहरण ईंधन डिपो, अल्बोर्ज प्रांत के तेल भंडारण स्थल, शहररे रिफाइनरी और कराज के फरदिस डिपो शामिल हैं. वीडियो फुटेज में मशरूम जैसा गैसीय धुआं उठता दिखा जिसे इंडिया टुडे की टीम ने जियो लोकेट करके शाहरण तेल डिपो के रूप में पहचाना.

सेंटिनल-5पी सैटेलाइट के वायुमंडलीय डेटा में युद्ध से पहले और बाद की तुलना में ट्रोपोस्फेरिक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत बढ़ी हुई दिखी. सबसे ज्यादा असर तीन जगहों पर पड़ा – तेहरान जिस पर सबसे ज्यादा हमले हुए, इस्फहान जो ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का महत्वपूर्ण केंद्र है और बंदर अब्बास जो देश का मुख्य नौसेना केंद्र है.
यह भी पढ़ें: आग उगलते सूरज का गुस्सा, 2034 में गिरने वाला NASA का सैटेलाइट आज ही धरती पर गिर रहा

सोशल मीडिया पर वीडियो में दिखा कि यह पहला मौका था जब ईरान में तेल सुविधाओं पर हमला किया गया. युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल के हमले मुख्य रूप से ईरान के नेतृत्व को खत्म करने, सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने, पुलिस स्टेशन पर हमला करने, मिसाइल बनाने की फैक्टरियों और लॉन्च साइटों को नष्ट करने तथा परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर केंद्रित थे.
यह भी पढ़ें: फॉस्फोरस बम क्या है... लेबनान पर जिसका इस्तेमाल कर रहा इजरायल!

तेहरान एक बहुत बड़ा शहर है जहां करीब एक करोड़ लोग रहते हैं. यहां घर, दुकानें, सड़कें, पानी की पाइपलाइन, अस्पताल और स्कूल सब एक-दूसरे के बहुत पास हैं. ईरानी मीडिया और स्थानीय लोगों ने बताया कि लक्षित स्थलों के आसपास घरों, दुकानों, सड़कों, पानी की लाइनों, अस्पतालों और स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
यह भी पढ़ें: ईरान के इस छोटे द्वीप पर हमला किया तो शुरू हो जाएगा वर्ल्ड वॉर-3... अमेरिका-इजरायल ने क्यों नहीं छुआ इसे अभी तक

सरकार ने लोगों को एसिड रेन यानी अम्लीय वर्षा के बारे में चेतावनी दी है. स्थानीय लोग कह रहे हैं कि उनकी गले में जलन हो रही है. आंखें जल रही हैं. जब बारिश ऐसे प्रदूषित हवा से होकर गिरती है तो धुआं और कणों को धोकर नीचे ले आती है जिससे काला पानी गिरता है.
यह युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि आसमान में भी चल रहा है. नासा और अन्य उपग्रहों के चित्र बता रहे हैं कि तेल की आग से निकला जहरीला धुआं सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. यह हवा के साथ दूर तक फैल सकता है. पड़ोसी देशों तथा वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है. स्थिति अब भी बदल रही है.