वंश बढ़ाने की चाह सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है. जंगल की दुनिया में भी इसके लिए ऐसी जंग होती है, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. अफ्रीका में जंगली कुत्तों की प्रजाति खतरे में पड़ी हैं. दुनिया में इनकी संख्या करीब 6600 बची है. ये 39 अलग समूहों में बंटे हुए हैं. एक नए शोध ने चौंकाने वाली बात बताई है. ये कुत्ते मादा को खोजने के लिए पूरे महाद्वीप में हजारों किलोमीटर का सफर करते हैं. ताकि उनसे प्रजनन करके वंश बढ़ा सके. यही करने के लिए तीन कुत्ते भाइयों ने 8 महीने में 4126 किलोमीटर का सफर तय किया.
यह किसी भी अफ्रीकी मैमल यानी स्तनपाई जानवर का अब तक का सबसे लंबा दर्ज किया गया माइग्रेशन यानी प्रवास है. यह अध्ययन इकोलॉजी नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं ने जाम्बिया में जंगली कुत्तों के समूहों को GPS लगाकर ट्रैक किया. ये कुत्ते जाम्बिया से निकलकर पांच पड़ोसी देशों में या उनके करीब पहुंचे.
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चार अलग-अलग समूहों ने कुल मिलाकर 9863 किलोमीटर का सफर तय किया. यह दूरी अमेरिका की चौड़ाई से दोगुनी से ज्यादा है. लीड रिसर्चर स्कॉट क्रेल ने कहा कि वे 1991 से इन कुत्तों की स्टडी कर रहे हैं. उन्हें कभी नहीं लगा था कि 2026 में वे यह रिजल्ट पाएंगे कि पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका की ज्यादातर महत्वपूर्ण आबादियां अब भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

जंगली कुत्तों का सामाजिक जीवन और प्रवास की जरूरत
अफ्रीकी जंगली कुत्ते सख्त नियमों वाले झुंड में रहते हैं. आमतौर पर झुंड में सिर्फ सबसे ताकतवर जोड़ी ही बच्चे पैदा करती है. बाकी सदस्य, खासकर दो और तीन साल के युवा कुत्ते, साथी खोजने और नया इलाका बनाने के लिए झुंड छोड़ देते हैं. अध्ययन के मुताबिक नीचे के सदस्य या तो प्रमुख बनने का इंतजार करते हैं.
रिश्तेदारों की मदद करके अपना फायदा लेते हैं या फिर तुरंत प्रजनन के मौके की तलाश में निकल पड़ते हैं. यही वजह है कि वे इतनी लंबी दूरी तय करते हैं. यह सफर आसान नहीं होता. कई कुत्ते रास्ते में मर जाते हैं. ज्यादातर मौतें बुशमीट शिकार के लिए बिछाए गए तार के फंदों में फंसने से होती हैं.
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एक फीमेल डॉग जिसका कोड EWD-1355 था, जाम्बिया से 2300 किलोमीटर का सफर करके मोजाम्बिक पहुंची. वहां जून 2022 में वह फंदे में फंसकर मर गई. जाम्बियन कार्निवोर प्रोग्राम की टीम ने इन कुत्तों को ट्रैक किया. वे बार-बार नदियां पार करते. बड़ी सड़कों को पार करते. ग्रेट रिफ्ट वैली की पहाड़ियों पर चढ़ते-उतरते और शहरों तथा झीलों के किनारे से गुजरते दिखे.

इंसानी बस्ती के बीच भी कनेक्टिविटी बनी हुई है
जाम्बिया की आबादी 2010 के बाद करीब 50% बढ़ गई है. इससे जंगली जानवरों के रहने के इलाके बंट गए हैं. देश का करीब 40% हिस्सा संरक्षण क्षेत्र घोषित है, लेकिन फंड की भारी कमी है. इसके बावजूद जंगली कुत्ते मानव बहुल इलाकों से गुजरते हुए लंबी दूरी तय कर रहे हैं.
जाम्बियन कार्निवोर प्रोग्राम के सीईओ मैट बेकर ने कहा कि कुत्ते हमें दिखा रहे हैं कि कनेक्टिविटी अब भी काम कर रही है. अब हमें इसे बचाने और मजबूत करने के लिए और प्रयास करने होंगे. यह खोज संरक्षण के लिए बहुत जरूरी है. पहले माना जाता था कि अलग-अलग आबादियां एक-दूसरे से कटी हुई हैं. लेकिन अब साफ है कि ये कुत्ते अब भी एक-दूसरे तक पहुंच सकते हैं.
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अगर प्रवास के रास्तों यानी कॉरिडोर को सुरक्षित रखा जाए तो पूरे महाद्वीप में इनकी सुरक्षा बेहतर हो सकती है. अफ्रीकी जंगली कुत्तों को कई खतरे हैं. इनमें घर का टूटना, शिकार की कमी, शिकारी फंदे, बीमारी और इंसानों से संघर्ष शामिल हैं. लंबी दूरी तय करने की क्षमता दिखाती है कि अगर रास्ते खुले रखे जाएं तो आबादियां एक-दूसरे से जुड़कर मजबूत हो सकती हैं.

संरक्षण की नई दिशा और चुनौतियां
शोध बताता है कि सिर्फ संरक्षित क्षेत्रों को बचाना काफी नहीं है. उनके बीच के कॉरिडोर भी सुरक्षित रखने होंगे. ये कॉरिडोर नदियों, सड़कों और शहरों के बीच से गुजरते हैं. इंसानों की बढ़ती आबादी और खेती के लगातार विस्तार से ये रास्ते बंद हो रहे हैं. शिकारी फंदों की समस्या भी बड़ी है.
बुशमीट के लिए बिछाए गए तार कई बार जंगली कुत्तों को फंसा लेते हैं. बीमारी का खतरा भी बना रहता है. लंबे सफर में वे दूसरे जानवरों या पालतू कुत्तों के संपर्क में आ सकते हैं. स्कॉट क्रेल जैसे वैज्ञानिक लंबे समय से इन जानवरों पर नजर रखे हुए हैं. उनका कहना है कि यह खोज उम्मीद जगाती है.
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पहले लगता था कि आबादियां अलग-थलग पड़ गई हैं. लेकिन कुत्ते खुद दिखा रहे हैं कि वे अब भी जुड़ सकते हैं. जाम्बिया और पड़ोसी देशों में संरक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने की जरूरत है. फंड की कमी बड़ी बाधा है. अगर स्थानीय समुदायों को साथ लेकर फंदे हटाने और कॉरिडोर बचाने के काम किए जाएं तो नतीजे बेहतर हो सकते हैं.
यह स्टडी सिर्फ जंगली कुत्तों के बारे में नहीं है. यह दिखाता है कि बड़े स्तनपाई जानवर इंसनी बस्तियों वाले इलाकों में भी लंबी दूरी तय कर सकते हैं. संरक्षण की रणनीति में इस बात को शामिल करना होगा. प्रवास के रास्तों को सुरक्षित रखने से न सिर्फ जंगली कुत्ते बल्कि दूसरे जानवर भी फायदा उठा सकते हैं.