तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है. पर अब चीन के ही वैज्ञानिकों की नई स्टडी ने इस मेगा डैम की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसमें कहा गया है कि जिस जगह डैम बन रहा है, उसके नीचे एक एक्टिव फॉल्ट लाइन है. अगर यहां बड़ा भूकंप आता है तो डैम और उससे जुड़ी दूसरे स्ट्रक्चर्स पर असर पड़ सकता है. चीन ने जुलाई 2025 में 167.8 अरब डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू किया था.
यह डैम तिब्बत में उस जगह बन रहा है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय की गहरी घाटी से होकर गुजरती है. फिर भारत के अरुणाचल प्रदेश में दाखिल होती है. चीन का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से हर साल 300 अरब किलोवॉट-घंटे से ज्यादा बिजली बनेगी. इससे करीब 30 करोड़ लोगों की एक साल की बिजली की जरूरत पूरी हो सकेगी. लेकिन नई स्टडी आने के बाद इस प्रोजेक्ट की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं.
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क्या कहती है नई स्टडी?
यह स्टडी चीन के भूवैज्ञानिकों ने की है. इसमें कहा गया है कि डैम के पास मौजूद पाइजेन फॉल्ट लाइन (Paizhen Fault) लंबे समय से एक्टिव है. फॉल्ट लाइन यानी धरती की ऊपरी परत में मौजूद ऐसी दरार, जहां टेक्टोनिक प्लेटें खिसकती रहती हैं. इसी हलचल की वजह से भूकंप आते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार हलचल की वजह से आसपास की चट्टानें कमजोर हो चुकी हैं. इससे डैम, सुरंग, पुल, सड़क और जलाशय जैसी बड़ी संरचनाओं की नींव पर असर पड़ सकता है.

भूकंप का खतरा क्यों है?
पाइजेन गांव हिमालय के उस हिस्से में है, जहां अक्सर भूकंप आते हैं. यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं. इसलिए यह इलाका भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है. स्टडी में 2017 में तिब्बत के मिलिन इलाके में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप का भी जिक्र किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे साफ है कि यह फॉल्ट लाइन आज भी सक्रिय है. अगर फ्यूचर में बड़ा भूकंप आता है तो लैंडस्लाइड हो सकता है. चट्टानें गिर सकती हैं. इससे डैम की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
स्टडी में कहा गया है कि डैम के आसपास की कमजोर पहाड़ी ढलानों को मजबूत किया जाना चाहिए. साथ ही ऐसी सुरक्षा व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिससे लैंडस्लाइड का खतरा कम हो सके. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके में निर्माण के दौरान भूकंप के खतरे को हमेशा ध्यान में रखना होगा.
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चीन का क्या कहना है?
चीन इन चिंताओं को खारिज करता रहा है. उसका कहना है कि यह प्रोजेक्ट सबसे ऊंचे इंजीनियरिंग मानकों के हिसाब से बनाया जा रहा है. चीन का दावा है कि इस डैम से पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा. साथ ही इससे नदी के आसपास आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के असर को कम करने में मदद मिलेगी. चीन यह भी कहता है कि इस प्रोजेक्ट का भारत और बांग्लादेश जैसे नीचे की ओर बसे देशों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
यह स्टडी चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, चाइना जियोलॉजिकल सर्वे और दूसरी सरकारी रिसर्च संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. यह रिसर्च पिछले महीने चीनी भाषा की वैज्ञानिक जर्नल सेडीमैंट्री जियोलॉजी एंड तैथ्यान जियोलॉजी में छपी हुई थी.
नई स्टडी से एक बार फिर यह सवाल उठ गया है कि भूकंप वाले इलाके में बन रहे इस मेगा डैम की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी. वैज्ञानिकों ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है. वहीं चीन अब भी कह रहा है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित है और इससे नीचे की ओर बसे देशों पर कोई खतरा नहीं होगा.