केन्या के एक खूबसूरत द्वीप पर अब तेल रिफाइनरी बनाने की तैयारी है. हिंद महासागर के किनारे बसे लामू द्वीप पर नाइजीरिया के अरबपति कारोबारी अलिको डांगोटे 16 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं. 30 सितंबर 2026 को इस प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने के लिए कार्यक्रम हुआ. Photo: AFP
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो समेत कई अफ्रीकी नेता इसमें शामिल हुए. इस रिफाइनरी से करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों को डर है कि इससे समुद्र, मछलियों और पर्यटन को नुकसान हो सकता है. Photo: AFP
लामू द्वीप अपने खूबसूरत बीच, पुरानी इमारतों और पारंपरिक नावों के लिए जाना जाता है. यहां का पुराना शहर 2001 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. यहां पर्यटन और मछली पकड़ना लोगों की कमाई के बड़े साधन हैं. ऐसे में इतनी बड़ी तेल रिफाइनरी बनने से लोगों के मन में रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. Photo: AFP
इस रिफाइनरी को डांगोटे ग्रुप बना रहा है. इसमें हर दिन 7 लाख बैरल कच्चे तेल को साफ करके इस्तेमाल लायक बनाने की योजना है. इससे पेट्रोल, डीजल और विमान में इस्तेमाल होने वाला ईंधन जैसे उत्पाद बनाए जा सकेंगे. कंपनी का लक्ष्य है कि इस रिफाइनरी को 2030 तक चालू कर दिया जाए. Photo: AFP
केन्या सरकार को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से देश में उद्योग बढ़ेंगे और दूसरे देशों से तैयार ईंधन खरीदने की जरूरत कम होगी. इस प्रोजेक्ट के साथ बिजली बनाने की सुविधा भी तैयार करने की योजना है. हालांकि, रिफाइनरी चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की जरूरत होगी, जिसे दूसरे देशों से मंगाया जाएगा. Photo: AFP
इस प्रोजेक्ट से करीब 60 हजार लोगों को सीधे और दूसरे कामों के जरिए रोजगार मिलने का अनुमान है. इसके अलावा, 1,000 युवाओं को काम सिखाने के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर बनाने की भी योजना है. इससे स्थानीय युवाओं को नई चीजें सीखने और नौकरी पाने का मौका मिल सकता है. Photo: AFP
हालांकि, द्वीप के लोगों को चिंता है कि इन नौकरियों का फायदा उन्हें कितना मिलेगा. उन्हें डर है कि काम करने के लिए दूसरे इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं. ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि स्थानीय लोगों को कितनी नौकरियां मिलती हैं और उन्हें काम की ट्रेनिंग देने के लिए क्या किया जाता है. Photo: AFP
लामू में बहुत से लोग मछली पकड़कर और पर्यटकों को सेवाएं देकर कमाई करते हैं. यहां लोग समुद्र, बीच और पुराने शहर को देखने आते हैं. अगर रिफाइनरी बनने से समुद्र या आसपास के इलाके पर बुरा असर पड़ता है, तो पर्यटन से जुड़े लोगों की कमाई भी घट सकती है. Photo: AFP
पर्यावरण संगठनों को डर है कि रिफाइनरी से समुद्र का पानी गंदा हो सकता है. तेल का रिसाव होने या फैक्ट्री के कचरे का सही तरीके से निपटारा नहीं होने पर मछलियों और दूसरे समुद्री जीवों को नुकसान पहुंच सकता है. Photo: AFP
मैंग्रोव के जंगलों और समुद्र में रहने वाले जीवों पर भी असर पड़ने की आशंका है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि रिफाइनरी से पर्यावरण को कितना नुकसान होगा. इसके लिए वैज्ञानिक जांच करना और निर्माण के दौरान पर्यावरण पर नजर रखना जरूरी होगा. Photo: AFP
रिफाइनरी बनाने के लिए जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ स्थानीय लोगों ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर किया है. उनका कहना है कि उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए. जमीन के मालिकाना हक और मुआवजे को लेकर भी चिंता जताई गई है. Photo: AFP
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि पर्यावरण की जांच की जाएगी और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा होगी. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह की जांच और स्थानीय लोगों से बातचीत पहले ही होनी चाहिए थी. जमीन से जुड़े मामले पर कोर्ट में सुनवाई भी जारी है. Photo: AFP
केन्या सरकार के लिए यह रिफाइनरी उद्योग बढ़ाने और रोजगार देने का बड़ा मौका है. लेकिन लामू के लोगों की कमाई समुद्र, मछलियों और पर्यटन से भी जुड़ी है. इसलिए इस प्रोजेक्ट में सिर्फ रोजगार और कारोबार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा. Photo: AFP
यह देखना अहम होगा कि रिफाइनरी से स्थानीय लोगों को कितना फायदा मिलता है और समुद्र को नुकसान से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं. Photo: AFP