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साइंस न्यूज़

केन-बेतवा नदी जोड़ो प्रोजेक्ट पर बवाल, डूब रहे घर-मंदिर... पन्ना टाइगर रिजर्व पर खतरा

ken betwa project
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मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन नदी पर बन रहे बांध को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं. केन-बेतवा नदी जोड़ो प्रोजेक्ट का मकसद बुंदेलखंड में पानी की कमी दूर करना, खेती के लिए सिंचाई बढ़ाना और लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है. लेकिन इस प्रोजेक्ट के कारण लोगों के घर, मंदिर और जमीन डूब रहे हैं. Photo: Reuters
 

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ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हुए नुकसान के हिसाब से पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल रहा है. करीब 4.6 अरब डॉलर यानी लगभग 44,600 करोड़ रुपये की लागत वाली इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण और पानी की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं. Photo: Reuters

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यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की बड़ी नदी जोड़ो योजना का पहला चरण है. इसके तहत मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ा जाना है. सरकार का कहना है कि इससे बुंदेलखंड में पानी की कमी दूर होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. वहीं, विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़ने पड़ रहे हैं. वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें उचित मुआवजा देने के साथ रहने के लिए दूसरी जगह भी दी जाए. Photo: Reuters

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केन-बेतवा प्रोजेक्ट के तहत केन नदी का पानी बेतवा नदी के क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना है. इसके लिए केन नदी पर दौधन बांध बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 44,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसका मकसद बुंदेलखंड के उन इलाकों तक पानी पहुंचाना है, जहां सूखे और पानी की कमी की समस्या रहती है. Photo: Reuters

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सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से 10.62 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा. करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने और 103 मेगावाट बिजली बनाने का भी लक्ष्य है. हालांकि, इस योजना से प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि पानी की समस्या दूर करने के लिए उनके घर और जमीन छीनना सही नहीं है. Photo: Reuters

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प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को जमीन के बदले मुआवजा दिया जा रहा है. सरकार ने प्रति हेक्टेयर कम से कम 12.5 लाख रुपये देने की पेशकश की है. इससे पहले यह रकम 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर थी. जिला प्रशासन के मुताबिक, 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है. Photo: Reuters

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लेकिन कुछ ग्रामीणों का कहना है कि इस रकम से उनके पूरे नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती. उनकी चिंता सिर्फ घर की नहीं, बल्कि खेती और कमाई के साधन छिनने की भी है. स्थानीय पुजारी धनिराम भटनागर ने बताया कि जिस मंदिर में काम करके उनकी कमाई होती थी, वह पानी में डूब गया है. उनका कहना है कि मुआवजे में घर का नुकसान तो शामिल है, लेकिन मंदिर से होने वाली कमाई खत्म होने की भरपाई नहीं हुई है. Photo: Reuters

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इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं. पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि दौधन बांध बनने से करीब 9,000 हेक्टेयर जमीन पानी में डूब सकती है. इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा भी शामिल है. पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण के लिए जाना जाता है. Photo: Reuters

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जंगल का हिस्सा डूबने से बाघों और दूसरे वन्यजीवों के रहने की जगह पर असर पड़ सकता है. सरकार का कहना है कि पेड़ लगाने और वन्यजीवों के संरक्षण जैसे उपायों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश की जाएगी. Photo: Reuters

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इस प्रोजेक्ट के फायदे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पानी से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि योजना इस अनुमान पर आधारित है कि केन नदी के क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा पानी है, जबकि बेतवा नदी के क्षेत्र में पानी की कमी है. लेकिन इस अनुमान की वैज्ञानिक रूप से पूरी पुष्टि नहीं हुई है. Photo: Reuters

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सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड में सिंचाई, पीने के पानी और बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी. वहीं, विरोध कर रहे लोगों और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों की चिंता है कि इसके लिए गांवों और जंगलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. Photo: Reuters

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इस तरह केन-बेतवा प्रोजेक्ट के सामने चुनौती सिर्फ पानी को एक नदी से दूसरी नदी तक पहुंचाने की नहीं है. प्रोजेक्ट से मिलने वाले फायदे के साथ प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना, उनके रहने और कमाई की व्यवस्था करना और जंगलों को होने वाले नुकसान को कम करना भी जरूरी है. Photo: Reuters

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