धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का व्रत और व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पालन करने से भगवान गणेश और बुध देव की कृपा प्राप्त होती है. इससे बुद्धि, शिक्षा, व्यापार, धन-संपत्ति और कार्यों में सफलता मिलने के साथ जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. माना जाता है कि बुधवार का व्रत करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और उसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
एक समय की बात है एक व्यक्ति का विवाह हुए कई वर्ष बीत गए. विवाह के बाद उसकी पत्नी एक बार अपने मायके गई हुई थी. पत्नी के मायके में रहने के कई दिनों बाद उसका पति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिए ससुराल पहुंचा. ससुराल में कुछ दिन तक रहने के बाद वह पत्नी को मायके से विदा करने की बात अपने सास-ससुर के कही. बुधवार का दिन होने के कारण उसके सास-ससुर ने कहा कि इस दिन बेटी ससुराल नहीं जा सकती इस कारण विदाई नहीं हो सकती है. लेकिन वह व्यक्ति नहीं माना और अपनी पत्नी को मायके से विदा कराकर अपने घर की तरफ चल दिया. रास्ते में जाते वक्त पत्नी को बहुत तेज से प्यास लगी तब पति पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा.
काफी देर के बाद जब वह पानी लेकर वापस लौटा तो उसने देखा कि पत्नी के पास उसी की वेशभूषा में कोई अन्य व्यक्ति पत्नी के संग बैठकर बाते करता हुआ दिखाई दिया. दोनों व्यक्ति आपस में लड़ने लगे. पहले व्यक्ति ने गुस्से में दूसरे व्यक्ति से पूछना लगा कि वह कौन और क्यों उसकी पत्नी के साथ बैठकर बाते कर रहा है. फिर आपस में लड़ने लगे. दूसरे व्यक्ति ने कहा कि यह मेरी पत्नी है. दोनों की बीच भयानक लड़ाई होने लगी तब वहां पर कुछ सिपाही आ गए और स्त्री से उसके असली पति के बारे में पूछने लगे. दोनों व्यक्ति को देखकर स्त्री हैरान हो गई कि कौन मेरा पति है. वह दुविधा में पड़ गई क्योंकि दोनों एक जैसे ही लग रहे थे. तब पहला व्यक्ति परेशान होकर मन में कहा कि भगवान ये आपकी कैसी लीला है.
तभी आकाशवाणी हुई की बुधवार के दिन पत्नी को विदा करवा कर नहीं ले जाना चाहिए था. यह सब सुनकर पहला व्यक्ति समझ गया की यह भगवान बुध की लीला है. फिर वह व्यक्ति बुद्धदेव से प्रार्थना करने लगा और क्षमा मांगने लगा. फिर फौरन ही बुद्धदेव अंतर्ध्यान हो गए और उस व्यक्ति को अपनी पत्नी मिल गई. तभी से हर दिन बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा होने लगी.
आरती
ॐ जय बुध देव हरे, प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय बुध देव हरे...
शीत चंद्र के सुत तुम, क्षीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे, नैनन छवि अटके॥ ॐ जय बुध देव हरे...
रुद्र रूप धर तुम ही, जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते, सब जग के सुखकारी॥ ॐ जय बुध देव हरे...
तन पर पीत अम्बर, माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु, सुर नर मुनि मोहे॥ ॐ जय बुध देव हरे...
जो जन तेरी आरती, प्रेम सहित गावे।
सो निश्चय ही मनवांछित, फल पावे॥ ॐ जय बुध देव हरे...
बुध देव की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय बुध देव हरे...
-------समाप्त-------