Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में हर महीने एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी को अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से इतना पुण्य मिलता है, जितना हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने से प्राप्त होता है. इसलिए इस एकादशी पर कथा सुनना और व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है. तो पंडित प्रवीण मिश्र से सुनते हैं योगिनी एकादशी की व्रत कथा.
योगिनी एकादशी की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत की कथा भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी. स्वर्ग लोक में अलकापुरी नामक एक सुंदर नगरी थी, जहां कुबेर नाम के राजा का शासन था. वे भगवान शिव के परम भक्त थे. उनके यहां हेम नाम का एक माली रोज पूजा के लिए फूल लाया करता था. हेम की पत्नी विशालाक्षी बहुत सुंदर थी और वह उससे अत्यधिक प्रेम करता था.
एक दिन हेम मानसरोवर से फूल तो ले आया, लेकिन अपनी पत्नी के प्रेम में इतना खो गया कि वह समय पर पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका. जब कुबेर को यह बात पता चली, तो वे बहुत क्रोधित हो गए. उन्होंने हेम को श्राप दे दिया कि वह अपनी पत्नी से दूर हो जाएगा और पृथ्वी पर जाकर कोढ़ी बनकर जीवन व्यतीत करेगा.
श्राप के प्रभाव से हेम तुरंत स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर आ गया और उसके शरीर में कोढ़ हो गया. उसकी पत्नी भी उससे अलग हो गई. वह लंबे समय तक कष्ट सहता रहा, लेकिन उसे अपने पिछले जन्म की बातें याद थीं. एक दिन भटकते हुए वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा. ऋषि ने उसकी दशा देखकर कारण पूछा, तब हेम ने अपनी पूरी कहानी बता दी.
उसकी पीड़ा सुनकर मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. हेम ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया. इस व्रत के प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया, वह अपने पुराने रूप में लौट आया और अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा. यही कारण है कि योगिनी एकादशी को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि देने वाला व्रत माना जाता है.
योगिनी एकादशी व्रत की विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें और उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र रखें. श्रद्धा के साथ भगवान को फूल, फल अर्पित करें और दीप जलाकर आरती करें. गुड़ और चने का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है.