Sawan 2026: सावन के सोमवार की भक्ति हो, नवरात्र का संयम हो या रमजान के पाक महीने के रोजे... हमारे धर्मों में उपवास को हमेशा से एक ऊंचा दर्जा दिया गया है. हम इसे सदियों से परंपरा मानकर निभाते आ रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे का वो सीक्रेट समझा है जो आज का विज्ञान भी मानता है? हाल ही में डॉ. शुभम वत्स ने अपनी बातचीत में उपवास (Fasting) को एक नए नजरिए से पेश किया है. उन्होंने इसे कोई पुरानी रस्म नहीं, बल्कि आपकी बॉडी के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफस्टाइल टूल बताया है.
धर्म एक टूल है, जो हमें स्वस्थ रखना चाहता है
पुराने समय में जब फिटनेस के लिए जिम या डाइटीशियन नहीं होते थे, तब हमारे धर्मों ने हमें उपवास करना सिखाया. डॉ. वत्स का मानना है कि फास्टिंग का असली मतलब है अपनी बॉडी के इंजन को थोड़ा आराम देना.
आज के दौर में लोग इसे इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) कहते हैं, लेकिन असल में यह वही तरीका है जो हमारे पूर्वजों ने सावन और रमजान जैसी परंपराओं के जरिए हमें सदियों पहले दिया था. जब हम व्रत रखते हैं, तो हम अनजाने में अपनी बॉडी को वह ब्रेक देते हैं जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
व्रत के नाम पर हम ये बड़ी गलतियां करते हैं
डॉ. वत्स ने एक बेहद जरूरी बात पर जोर दिया है. अक्सर लोग उपवास के दौरान जूस, फलाहार या व्रत वाली चीजों के नाम पर ढेर सारी चीनी, तली-भुनी चीजें या जंक फूड खा लेते हैं.
वह कहते हैं, अगर आप उपवास का फायदा चाहते हैं, तो उसे जंक से मत भरिए. फास्टिंग का मतलब है बॉडी को खाने की प्रक्रिया से ब्रेक देना, ताकि वह अंदर से खुद को रिपेयर (Repair) कर सके. अगर आप व्रत के नाम पर पकौड़े या ज्यादा मीठा खाएंगे, तो बॉडी का रिपेयर सिस्टम काम नहीं कर पाएगा.
ना बोलना ही असली फास्टिंग है
इस चर्चा का सबसे शानदार हिस्सा है स्वयं पर नियंत्रण (Self-Control). डॉ. वत्स के मुताबिक, फास्टिंग केवल पेट खाली रखने का नाम नहीं है. यह ना (No) बोलने की कला सीखने का तरीका है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम ना नहीं कह पाते.
फालतू खाने को ना: वो खाना जो शरीर के लिए जहर है.
दिखावे को ना: दूसरों के वैलिडेशन (तारीफ) की भूख को खत्म करना.
दूसरों को खुश करने को ना: हर किसी की हर बात पर हां कहना बंद करना.
जब आप व्रत रखकर अपनी भूख को कंट्रोल करते हैं, तो धीरे-धीरे आप अपनी लाइफ की बाकी इच्छाओं पर भी काबू पाना सीख जाते हैं. यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स है.
फास्टिंग: अमीर बनने जैसा तरीका
डॉ. वत्स ने एक दिलचस्प तुलना की है कि उपवास भी पैसे बचाने की तरह है. जैसे हम अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बचाकर (Invest करके) अपना भविष्य सुरक्षित करते हैं, वैसे ही उपवास करके हम अपनी बॉडी की ऊर्जा बचाते हैं.
जब आप फास्टिंग करते हैं, तो आपकी बॉडी फैट को एनर्जी में बदलना शुरू करती है. उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने रिसर्च के लिए उपवास किया, तो सबसे बड़ा बदलाव जो उन्होंने महसूस किया, वह थी उनकी नींद (Sleep quality). वह बताते हैं कि फास्टिंग के बाद उन्हें बच्चों जैसी सुकून भरी नींद आने लगी, जो आज के समय में किसी बड़े वरदान से कम नहीं है.
असली व्रत क्या है?
तो अगली बार जब आप सावन का व्रत रखें या रमजान का रोजा रखें, तो इसे सिर्फ एक धार्मिक औपचारिकता न समझें. इसे अपनी बॉडी और मन को रीसेट (Reset) करने के एक मौके की तरह देखें.
फास्टिंग आपको सिखाती है कि हमारे पास सब कुछ होने के बावजूद, हर चीज को हर समय अपनाना जरूरी नहीं है. संयम ही वह चाबी है जो आपको एक लंबी, हेल्दी और सुकून भरी लाइफ की ओर ले जाती है.