इस साल राधा अष्टमी का त्योहार 19 सितंबर को मनाया जाएगा. राधाष्टमी केवल राधारानी के प्राकट्य का पर्व नहीं, बल्कि ब्रज की उस भक्ति परंपरा का उत्सव है, जिसमें राधा और कृष्ण को एक-दूसरे से अलग नहीं माना जाता है. कृष्ण जहां आनंद और प्रेम के स्वरूप माने जाते हैं. वहीं राधा उस प्रेम की अनुभूति और माधुर्य का स्वरूप हैं. इसी कारण ब्रज में कृष्ण के नाम से पहले राधा का स्मरण करने की परंपरा भी विशेष रूप से दिखाई देती है. राधाष्टमी पर मंदिरों से लेकर घरों तक राधारानी के लिए विशेष श्रृंगार और भोग तैयार किए जाते हैं.
राधाष्टमी के भोग में खास आकर्षण राधारानी की प्रिय अरबी के व्यंजन का विशेष महत्व है. ब्रज क्षेत्र की कुछ स्थानीय भोग परंपराओं और मान्यताओं में अरबी से बने सात्विक व्यंजनों को राधारानी के भोग से जोड़ा जाता है. ब्रज के मंदिरों में भी राधारानी को अरबी से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. अरबी की सूखी सब्जी, हल्के मसालों से बनी अरबी या अरबी से तैयार अन्य पारंपरिक व्यंजन भोग की थाली में रखना ब्रज की पटरानी राधा जी को विशेष प्रिय है.
माखन-मिश्री के साथ सजेगी भोग की थाली
राधारानी को भोग लगाते समय सात्विक और घर में उपलब्ध सामग्री से तैयार पकवानों के साथ खीर, पेड़ा, पंजीरी, माखन-मिश्री, दूध से बनी मिठाइयां, फल, धनिया पंजीरी, मालपुआ और अरबी के व्यंजन भोग लगाना चाहिए. ब्रज की परंपरा में देशी घी, दूध, दही और मावे से बने पकवानों का विशेष स्थान है. भोग में पकवानों की संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा और भावना का माना जाता है.
ऐसे मनाएं राधाष्टमी
राधाष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान की सफाई कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र का श्रृंगार करें. गुलाब, चमेली, मोगरा या उपलब्ध सुगंधित पुष्प अर्पित करें. इसके बाद राधारानी को वस्त्र, आभूषण और पुष्पमाला अर्पित कर पंचामृत से प्रतीकात्मक अभिषेक करें. पूजा के दौरान “राधे-राधे” नाम का जाप और राधा-कृष्ण के भजनों का संकीर्तन राधा-कृष्ण की विशेष कृपा बरसाता है. दोपहर के समय भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें.
राधा को कृष्ण की शक्ति क्यों माना जाता है?
वैष्णव भक्ति परंपरा में राधा को कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति माना गया है. इसका अर्थ उस शक्ति से है जो प्रेम, आनंद और भक्ति की अनुभूति कराती है. जिस प्रकार सूर्य और उसकी रोशनी को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार राधा और कृष्ण के संबंध को भी प्रेम और आनंद के अभिन्न स्वरूप के रूप में समझाया जाता है. इसलिए राधा को केवल कृष्ण की प्रिय के रूप में देखना उनके आध्यात्मिक स्वरूप को सीमित करना माना जाता है. राधा भक्ति की वह भावना हैं जिसमें प्रेम अपने सर्वोच्च रूप में दिखाई देता है.
अरबी से बना व्यंजन
सादा अरबी की सूखी सब्जी- जीरा, सेंधा नमक और हल्के मसालों के साथ.
अरबी की मसालेदार सब्जी- उबली अरबी को हल्के मसालों में भूनकर.
अरबी की कुरकुरी फ्राई- पतले टुकड़े काटकर कुरकुरे किए जाते हैं.
अरबी के पत्तों के पकौड़े/पात्रा- अरबी के पत्तों में बेसन का मिश्रण लगाकर तैयार किया जाता है.
अरबी की कचौरी- अरबी को मसालों के साथ भरावन की तरह इस्तेमाल करके.
अरबी के कोफ्ते- अरबी से गोल कोफ्ते बनाकर सात्त्विक ग्रेवी में पकाए जा सकते हैं.
अरबी की टिक्की- उबली अरबी, सेंधा नमक और मसालों से.
दही वाली अरबी- अरबी को दही की हल्की ग्रेवी में तैयार किया जाता है.
अरबी की खट्टी-मीठी सब्जी- थोड़ा मीठा और खट्टा स्वाद देकर.
अरबी के पत्तों की सब्जी- पत्तों को अच्छी तरह पकाकर पारंपरिक तरीके से तैयार किया जा सकता है.