Parivartini Ekdashi 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी (जिसे जलझूलनी एकादशी, वामन एकादशी या डोल ग्यारस भी कहा जाता है) के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और इस दिन वे करवट बदलते हैं. इसलिए इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
परिवर्तिनी एकादशी 2026 तिथि (Parivartini Ekadashi 2026 Date)
एकादशी तिथि की शुरुआत 21 सितंबर 2026 यानी आज रात 8 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर यानी कल ही रखा जाएगा.
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Partini Ekadashi 2026 Pujan Muhurat)
22 सितंबर 2026 को पूजा के लिए प्रातः काल और दोपहर के शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे.
पहला मुहूर्त- सुबह 06:10 बजे से लेकर सुबह 09:12 बजे तक.
अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक.
अभिजीत और दोपहर पूजा मुहूर्त: दोपहर 11:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे के बीच भगवान वामन और श्री हरि विष्णु का पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है.
व्रत पारण की तिथि और समय (Parivartini Ekadashi 2026 Paran Timings)
पारण की तिथि 23 सितंबर 2026 (बुधवार).
पारण का समय: 23 सितंबर 2026 की सुबह 06:10 बजे से 08:35 बजे के बीच.
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि
इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार का पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. फिर, भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, तुलसी दल, पंचामृत और ऋतु फल अर्पित करें. इसके बाद, पूजा के समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. आखिरी में इस दिन तांबे के बर्तन, तिल, दही या पीले वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है.