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नास्त्रेदमस, बाबा वेंगा और भविष्यमालिका की वो 5 खौफनाक भविष्यवाणियां, जो कर देंगी हैरान!

क्या आप जानते हैं कि सदियों पहले जी चुके महान भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस, रहस्यमयी बाबा वेंगा और भारत के प्राचीन ग्रंथ भविष्य मालिका में आने वाले समय को लेकर एक जैसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली चेतावनियां दी गई हैं? इन भविष्यवाणियों के अनुसार, दुनिया बहुत जल्द एक ऐसे विनाशकारी चक्रव्यूह में फंसने वाली है. तो आइए जानते हैं उन सभी भविष्यवाणियों के बारे में.

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भविष्य को लेकर जानें कई चौंकाने वाली भविष्यवाणियां (Photo: ITG)
भविष्य को लेकर जानें कई चौंकाने वाली भविष्यवाणियां (Photo: ITG)

क्या नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां सच में श्रीमद्भागवत महापुराण के श्लोकों से मेल खाती हैं? शास्त्रों के अनुसार, जब धरती पर अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा, शासक स्वार्थी हो जाएंगे और ऐसी अजीब महामारियां फैलेंगी कि लोग चलते-फिरते दम तोड़ देंगे, तब पूर्व दिशा यानी भारत की पावन भूमि से एक ऐसी दिव्य शक्ति का उदय होगा जो पूरी दुनिया को आध्यात्मिक मार्ग दिखाएगी. यानी जब हम अलग-अलग स्रोतों पौराणिक ग्रंथ, ज्योतिषीय गणनाएं, नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा जैसी भविष्यवाणियों को एक साथ देखते हैं, तो कुछ बातें हैरान करने वाली समान नजर आती हैं. ये संकेत देती हैं कि आने वाला समय बड़े बदलावों से भरा हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि उन सभी विशेष भविष्यवाणियों के बारे में.

1. प्राकृतिक संकट और पानी का बढ़ता प्रभाव

कई प्राचीन ग्रंथों और भविष्यवाणियों में यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में प्रकृति का संतुलन गड़बड़ा सकता है. मौसम पहले जैसा नहीं रहेगा. कहीं अचानक भारी बारिश होगी, तो कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है. ऐसे हालात में खेती और जीवन दोनों प्रभावित होंगे, और पानी को लेकर संघर्ष भी बढ़ सकता है.

कुछ भविष्यवाणियों में यह भी कहा गया है कि पृथ्वी का स्वरूप बदलने लगेगा. समुद्र का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ेगा और तटीय इलाकों पर इसका असर साफ दिखाई देगा. भविष्यमालिका में उल्लेख है कि समुद्र का पानी इतना बढ़ सकता है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच जाएगा.

नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा ने भी इसी तरह की आशंका जताई है. उनके अनुसार, बड़े-बड़े समुद्री तूफान और सुनामी तटीय शहरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. साथ ही, आने वाले वर्षों में पीने के पानी की कमी भी एक गंभीर समस्या बन सकती है.

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श्रीमद्भागवत महापुराण में भी इस स्थिति का वर्णन मिलता है. उसमें बताया गया है कि सूखे के कारण लोग भोजन के लिए परेशान होंगे और मौसम इतना अस्थिर हो जाएगा कि कभी अत्यधिक ठंड, कभी तेज धूप और तेज हवाएं लोगों के जीवन को कठिन बना देंगी. यानी जब वर्षा नहीं होगी, तो अकाल पड़ेगा और लोग भूख व डर से परेशान रहेंगे. बदलते मौसम के कारण जीवन और भी मुश्किल हो जाएगा.

2. बड़ा युद्ध और कई दिनों तक छाया अंधकार

कई भविष्यवाणियों में यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में दुनिया एक बड़े और विनाशकारी युद्ध का सामना कर सकती है. इसे कुछ लोग तीसरे विश्व युद्ध से जोड़कर देखते हैं, जिसमें कई देश शामिल होंगे और इसका असर पूरी दुनिया की आबादी पर पड़ेगा.

बाबा वेंगा ने भी चेतावनी दी थी कि 21वीं सदी में शक्तिशाली देशों के बीच टकराव बढ़ सकता है, जो आगे चलकर परमाणु युद्ध जैसी स्थिति बना सकता है. ऐसे संघर्ष का असर सिर्फ देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी मानवता को झेलना पड़ सकता है.

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में भी लंबे समय तक चलने वाले एक बड़े युद्ध का जिक्र मिलता है. उन्होंने संकेत दिया था कि यह संघर्ष कई वर्षों तक जारी रह सकता है और दुनिया में अस्थिरता बढ़ा सकता है.

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वहीं, भविष्यमालिका में एक अलग ही दृश्य का वर्णन मिलता है. इसमें कहा गया है कि एक समय ऐसा आएगा जब आकाश में दो सूरज जैसे दिखाई देंगे. इसे कुछ लोग किसी खगोलीय घटना या विस्फोट से जोड़ते हैं. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि पृथ्वी पर कुछ समय के लिए घना अंधेरा छा जाएगा, जो कई दिनों तक रह सकता है.

इन सभी बातों को मिलाकर देखें, तो अलग-अलग स्रोत एक ही तरह की चेतावनी देते नजर आते हैं कि भविष्य में युद्ध और उससे जुड़ी भयावह परिस्थितियां मानव जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं.

3. जब सत्ता से गायब होने लगेगा धर्म और इंसानियत

कई भविष्यवाणियों में यह बताया गया है कि समय के साथ शासन व्यवस्था कमजोर हो सकती है. खासकर कलयुग के अंतिम दौर में ऐसे लोग सत्ता में आ सकते हैं, जिनके फैसले समाज के हित में नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए होंगे. दया, न्याय और धर्म जैसी बातें धीरे-धीरे कम होती नजर आ सकती हैं.

भविष्य मालिका में भी ऐसे समय का जिक्र मिलता है, जब कानून का असर खत्म हो जाएगा और व्यवस्था बिखरने लगेगी. लोगों के बीच भरोसा कम होगा और हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि अपने ही एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाएं.

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श्रीमद्भागवत पुराण के श्लोक भी इसी ओर इशारा करते हैं. उसमें कहा गया है कि शासक लालच में डूबे होंगे, गलत काम करेंगे और उनके आचरण में गिरावट आएगी. वे धर्म के मार्ग से हटकर केवल अपने लाभ के बारे में सोचेंगे.

एक अन्य वर्णन में यह भी बताया गया है कि झूठ, दिखावा और अधूरी समझ के आधार पर शासन चलाया जाएगा. ऐसे में सच्चाई की कद्र कम हो जाएगी और जो नेता जनता की रक्षा के लिए होते हैं, वही उनका शोषण करने लगेंगे.

नास्त्रेदमस ने भी ऐसे दौर का जिक्र किया है, जहां कुछ शक्तिशाली लेकिन गलत सोच वाले लोग दुनिया में अशांति और अव्यवस्था फैलाएंगे.

4. खतरनाक बीमारियां और जहरीली होती हवा-पानी

कई ग्रंथों और भविष्यवाणियों में यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं. विज्ञान की तरक्की के बावजूद ऐसी नई और अजीब बीमारियां फैल सकती हैं, जिनका इलाज तुरंत मिलना आसान नहीं होगा. इससे लोगों के लिए खुद को सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है.

भविष्य पुराण में भी इस तरह की स्थिति का वर्णन मिलता है. उसमें कहा गया है कि समय के साथ हवा और पानी दोनों प्रदूषित हो जाएंगे, जिससे नई-नई महामारियां फैल सकती हैं. ये बीमारियां तेजी से फैलकर बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर सकती हैं.

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बाबा वेंगा ने भी एक अलग तरह की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि बर्फ के नीचे दबे पुराने और खतरनाक वायरस दोबारा सक्रिय हो सकते हैं, जिससे एक नई वैश्विक महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा.

भविष्य मालिका में तो हालात और भी गंभीर बताए गए हैं. उसमें उल्लेख है कि कुछ बीमारियां इतनी अचानक और घातक होंगी कि लोग चलते-फिरते ही दम तोड़ देंगे, और स्थिति ऐसी हो सकती है कि मृतकों को संभालने वाले भी कम पड़ जाएं.

5. कल्कि अवतार और नए युग की शुरुआत

कई भविष्यवाणियों में जहां एक ओर कठिन समय और संकट की बात कही गई है, वहीं अंत में एक अच्छी शुरुआत का संकेत भी मिलता है. अलग-अलग ग्रंथों और भविष्यवक्ताओं के अनुसार, जब हालात सबसे ज्यादा बिगड़ेंगे, तब एक दिव्य शक्ति का उदय होगा जो दुनिया को सही दिशा दिखाएगी.

श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे. कहा जाता है कि उनका जन्म शम्भल नाम के स्थान पर एक ब्राह्मण परिवार में होगा. वे अधर्म का नाश करेंगे और धर्म की फिर से स्थापना करेंगे.

भविष्य मालिका में भी इसी तरह का वर्णन मिलता है. संत अच्युतानंद जी के अनुसार, भगवान जगन्नाथ कल्कि रूप में प्रकट होकर बुराई का अंत करेंगे और अपने भक्तों की रक्षा करेंगे. इसके बाद एक लंबे समय तक शांति और सत्य का युग चलेगा.

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नास्त्रेदमस और एडगर कायसी ने भी भविष्य में एक ऐसे महान व्यक्ति के आने की बात कही है, जो पूर्व दिशा यानी भारत से जुड़ा होगा. उनके अनुसार, यह नेतृत्व दुनिया को शांति और आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाएगा.

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