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Karwa Chauth 2026: दिख गया करवा चौथ का चांद, ऐसे खोलें व्रत

karwa chauth 2026 : करवा चौथ का चांद दिख गया है. जानें चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें, छलनी से पति का चेहरा देखने के बाद व्रत कैसे खोलें और पूजा की पूरी विधि.

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करवा चौथ का चांद दिख गया है.
करवा चौथ का चांद दिख गया है.

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं का चांद देखने का इंतजार अब खत्म हो गया है. गुरुवार, 29 अक्टूबर को दिल्ली, असम के गुवाहाटी और उत्तर प्रदेश के लखनऊ व सीतापुर में चंद्रमा के दर्शन हो गए हैं. सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा. शाम को करवा माता की पूजा और व्रत कथा सुनने के बाद महिलाएं चांद निकलने का इंतजार कर रही थीं. चंद्रमा के दर्शन के बाद अब महिलाएं अर्घ्य देकर व्रत खोल रही हैं.

हालांकि, कुछ इलाकों में आसमान में बादल छाए रहने और खराब मौसम के कारण चांद दिखाई देने में देरी हुई. ऐसे में महिलाओं को अपने शहर में चंद्रमा के दर्शन होने का इंतजार करना पड़ा..

दिल्ली, गुवाहाटी, लखनऊ और सीतापुर में दिखा करवा चौथ का चांद

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की रस्म शुरू हो गई है. दिल्ली में चांद दिखने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी करवा चौथ की रस्में निभाईं. वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और सीतापुर में भी चंद्रमा के दर्शन होने की खबर है. असम के गुवाहाटी में भी चांद दिखाई देने के बाद महिलाओं ने व्रत खोलने की तैयारी की.

चांद दिखने के बाद ऐसे खोलें करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद सबसे पहले चंद्रदेव को जल से अर्घ्य दें. इसके बाद दीपक जलाकर चंद्रमा की पूजा करें और पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें.

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पूजा के बाद परंपरा के अनुसार छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखें. इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलें. फिर मिठाई, फल या भोजन ग्रहण कर सकती हैं. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में व्रत खोलने की रस्मों में थोड़ा अंतर हो सकता है.

बादलों के कारण चांद नहीं दिखा तो क्या करें?

अगर आपके शहर में चंद्रोदय का अनुमानित समय बीत चुका है, लेकिन बादलों की वजह से चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा कर सकती हैं.

कुछ मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करके प्रार्थना की जाती है. कुछ परंपर

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