सावन के महीने की कांवड़ यात्रा जारी है. हरिद्वार से गंगाजल लेकर लोग अपने निवास स्थान की ओर आगे बढ़ रहे हैं. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़िये इस गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करेंगे. इस दौरान हरिद्वार से आती हुई कई अनोखी और दिलचस्प कांवड़ भी दिखाई दे रही हैं. ऐसी ही एक कांवड़ हरिद्वार से मुजफ्फरनगर जनपद पहुंची, जिसमें देशभक्ति का संदेश छिपा हुआ था.
मुजफ्फरनगर की हृदय स्थली शिव चौक पर शुक्रवार को एक ऐसी कांवड़ पहुंची, जिसे देखकर वहां हर कोई दंग रह गया. इस कावड़ में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव बनकर तीन शिव भक्तों ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. क्रांतिकारी बनकर कांवड़ लाने वाले इन भोलों के हाथों में रस्सी बंधी हुई थी. कांवड़ियों ने अपने गले में गंगाजल की केन टांग रखी थी. ये कांवड़िये सामान्य केसरी रंग की पोशाक की जगह कैदियों वाली ड्रेस पहनकर कांवड़ लाते दिखाई दिए.
बता दें कि नौजवानों के मन में देशभक्ति की अलख जगाती इस कावड़ को देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा था. इस टोली के सदस्यों ने बताया कि वह हरिद्वार से गंगाजल भरकर दिल्ली में अपने निवास स्थान की ओर बढ़ रहे हैं. ये लोग रोजाना करीब 25 से 30 किलोमीटर पैदल चलकर अपने गंतव्य दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं.
कैसे आया क्रांतिकारी बनकर कांवड़ लाने का ख्याल?
इस टोली सदस्य शुभम सिंह बताते हैं कि हम देश के वीर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए आए हैं. हमारी देश की आजादी में इन क्रांतिकारियों का बड़ा बलिदान है. इसमें शुभ भगत सिंह, प्रवीण सुखदेव और तरुण राजगुरु बने हैं. इस टोली का एक सदस्य गोलू है, जो ब्रिटिश शासन वाले रोल में दिखाई दे रहा है.
इस टोली के सदस्यों का कहना है कि आजकल के जिन नौजवानों को नहीं पता कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव कौन थे और हमारे देश की आजादी में इनका क्या योगदान रहा है. हम उन्हें जागरुक करना चाहते हैं. युवाओं के अंदर देशभक्त जिंदा रहनी चाहिए. कांवड़ियों ने बताया कि वह दिल्ली के न्यू अशोक नगर से आए हैं और शिवरात्रि के दिन जब वह शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे, तब उनकी यात्रा पूरी हो जाएगी.