Guru Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति यानी देवगुरु गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है. गुरु वृष राशि से निकलकर 18 जून 2026 कोपुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं. पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है, जो अपने आप में अत्यंत शुभ और सिद्धियों से भरा होता है. गुरु का इस विशिष्ट नक्षत्र में आना कई राशियों के लिए सुनहरे दौर की शुरुआत करने वाला है. आइए जानते हैं कि इस खगोलीय बदलाव का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है.
क्या है पुष्य नक्षत्र का महत्व?
पुष्य नक्षत्र का अर्थ है पोषण करने वाला. यह नक्षत्र स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. जब ज्ञान और विस्तार के कारक गुरु, पोषण देने वाले पुष्य नक्षत्र में आते हैं, तो यह भौतिक सुख-सुविधाओं, धन-संपत्ति में वृद्धि और करियर में नई ऊंचाइयों का संकेत देता है.
इन राशियों के लिए खुलेगा तरक्की का द्वार:
मेष राशि: आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा. लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे. आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी.
कर्क राशि: चूँकि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं और यह आपकी ही राशि के लिए अत्यधिक शुभ है, यह समय आपके लिए निवेश और व्यक्तिगत विकास के लिए बेहतरीन रहने वाला है. मान-सम्मान में वृद्धि होगी.
तुला राशि: अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है. गुरु का यह गोचर आपके करियर में स्थिरता लाएगा.
धनु राशि: आपके लिए यह गोचर विदेश यात्रा या काम से जुड़ी नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है. शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में आप काफी आगे रहेंगे.
उपाय: गुरु की कृपा पाने के लिए क्या करें?
गुरु और पुष्य नक्षत्र की इस शुभ युति का लाभ उठाने के लिए:
पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार के दिन चने की दाल या पीली मिठाई का दान करना अत्यंत शुभ होगा.
मंत्र जाप: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः' का कम से कम 108 बार जाप करें.
विष्णु सहस्त्रनाम: पुष्य नक्षत्र के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करना गुरु के शुभ प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है.