Guru Gochar 2026: ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धन, शिक्षा, भाग्य और समृद्धि का कारक माना जाता है. जब भी गुरु की चाल या राशि में बदलाव होता है, तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ने की मान्यता है. अक्टूबर के आखिरी दिन गुरु राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं. इस गोचर से कुछ राशियों के लिए नौकरी, कारोबार और आर्थिक मामलों में नए अवसर बनने की संभावना है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मेष, कर्क और धनु राशि के जातकों के लिए यह समय खास रह सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है.
31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे गुरु
देवगुरु बृहस्पति आज 31 अक्टूबर 2026 को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 13 दिसंबर 2026 को गुरु सिंह राशि में ही वक्री हो जाएंगे. फिर 25 जनवरी 2027 को वक्री अवस्था में वापस कर्क राशि में लौट आएंगे. इस तरह सिंह राशि में गुरु का यह पहला चरण करीब तीन महीने तक रहेगा.
वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है. इनका संबंध उच्च शिक्षा, विवाह, संतान, धार्मिक कार्यों, धन और ज्ञान से जोड़ा जाता है. ऐसे में गुरु के राशि परिवर्तन को कई राशियों के लिए नए अवसरों और बदलावों का संकेत माना जाता है.
मेष राशि: करियर में आगे बढ़ने के मिल सकते हैं मौके
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे सकता है. नौकरी करने वालों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने या लंबे समय से रुके काम आगे बढ़ने की संभावना है.
कर्क राशि: आर्थिक स्थिति में सुधार के बन सकते हैं योग
कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में अहम रह सकता है. नौकरी और कारोबार में किए गए प्रयासों के बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है. आय और खर्च के बीच संतुलन बनाने में सफलता मिल सकती है. जो लोग लंबे समय से किसी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं, उन्हें उससे निपटने के नए रास्ते मिल सकते हैं.
धनु राशि: भाग्य का साथ मिलने की बन सकती है संभावना
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर शिक्षा, करियर और भाग्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है. नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को नए विकल्प मिल सकते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी मेहनत जारी रखने का समय है.
जनवरी 2027 तक क्यों महत्वपूर्ण रहेगा गुरु का गोचर?
गुरु का यह राशि परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सिंह राशि में प्रवेश के कुछ ही सप्ताह बाद बृहस्पति वक्री हो जाएंगे. ज्योतिष में वक्री अवस्था को ग्रह की प्रत्यक्ष गति के विपरीत दिखाई देने वाली स्थिति कहा जाता है. इस दौरान ज्योतिषीय फलादेश में पुराने कामों की समीक्षा, अधूरी योजनाओं पर दोबारा ध्यान देने और फैसलों पर विचार करने जैसे संकेतों पर चर्चा की जाती है.
13 दिसंबर 2026 को वक्री होने के बाद गुरु 25 जनवरी 2027 को वापस कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. इसलिए अक्टूबर के अंत से जनवरी तक का समय गुरु के गोचर के लिहाज से खास रहेगा. अलग-अलग जातकों पर इसका प्रभाव उनकी चंद्र राशि और जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है.