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Garuda Puran: किस्मत बदल देंगे गरुड़ पुराण के 3 नियम, घर में बरसेगी सुख-समृद्धि!

Garud Puran Tips: गरुड़ पुराण में बताए गए ये 3 आसान काम बदल सकते हैं आपकी किस्मत. जानिए किन नियमों को अपनाने से घर में आती है सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा.

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जानिए किन नियमों को अपनाने से घर में आती है सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा.
जानिए किन नियमों को अपनाने से घर में आती है सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा.

Garuda Puran: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण को एक बेहद महत्वपूर्ण महापुराण माना गया है. इसमें न केवल मृत्यु के उपरांत की अवस्थाओं का वर्णन मिलता है, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने के सही तौर-तरीके, नैतिकता, कर्तव्य और सफलता हासिल करने के अचूक सूत्र भी सिखाए गए हैं. आचार्य और विद्वानों का मानना है कि यदि व्यक्ति अपनी दैनिक जीवनशैली में गरुड़ पुराण में बताए गए कुछ खास नियमों को अपना ले, तो उसका सोया हुआ भाग्य भी जाग सकता है और घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण में वर्णित उन 3 बेहद सरल और महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में, जो जीवन की हर बाधा को दूर कर सकते हैं. 

1. नियमित रूप से अन्नदान करना
हिन्दू धर्म में अन्न दान को महादान कहा गया है.  गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार गरीब, असहाय या भूखे लोगों को भोजन करवाता है, उसके जीवन से दरिद्रता दूर होने लगती है. अन्नदान करने से घर में मां अन्नपूर्णा और माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है.  ऐसा करने से न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि परिवार में कभी भी धन-धान्य की कोई कमी नहीं आती. 

2. गौ माता की सेवा और पहली रोटी निकालना
सनातन संस्कृति में गाय को गौ माता कहा गया है, इसमें सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, घर में जब भी रोटियां बनाई जाएं, तो उसमें से पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए. इसके अलावा, नियमित रूप से गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करना बेहद शुभ माना गया है. ऐसा करने से व्यक्ति की कुंडली में मौजूद कई तरह के ग्रह दोष शांत होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है,  जीवन में सकारात्मकता व सफलता का मार्ग खुलता है. 

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3. पितरों का सम्मान और तर्पण
हमारे पूर्वज या पितर हमारे परिवार की नींव होते हैं.  गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो लोग अपने पितरों का आदर-सम्मान करते हैं, उनकी तिथि पर श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान या दान-पुण्य करते हैं, उन्हें पितृ आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.  पितरों के प्रसन्न रहने से घर में चल रहा कलह-क्लेश शांत होता है, वंश की वृद्धि होती है, इससे घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति व समृद्धि का स्थायी वास बना रहता है. 

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