बिहार में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के बीच सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने घोषणा की है कि अब पेपर लीक को संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाएगा. अब तक पेपर लीक को संगठित अपराध नहीं माना जाता था. सरकार का कहना है कि समय के साथ अपराध का स्वरूप और उसे अंजाम देने का तरीका तेजी से बदल रहा है. हाल के मामलों में संगठित गिरोह, आधुनिक तकनीक और कई स्तरों पर फैले नेटवर्क की भूमिका सामने आई है.
सरकार के अनुसार, मौजूदा कानूनों को अधिक प्रभावी बनाने और ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि पेपर लीक को संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल करने का उद्देश्य ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त और व्यापक कानूनी कार्रवाई करना है. बिहार के दरभंगा, पटना और बेगूसराय में भी प्रदर्शन हुए हैं
संगठित गिरोहों के खिलाफ होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
इससे भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले के बाद पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा.
बिहार के पटना, कटिहार, बेगूसराय समेत कई जिलों में छात्रों ने प्रदर्शन किया. कटिहार में प्रदर्शन के दौरान पथराव में सीओ सोनू भगत की आंख में चोट लगी और उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया. वहीं, पटना में हिंसा के मामले में पुलिस ने 56 लोगों को गिरफ्तार किया. 268 नामजद और 2500 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किया गया. इसके अलावा बेगूसराय में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया.
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने पर सरकार का जोर
बता दें, NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है. दिल्ली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के कई शहरों तक पहुंच चुका है. पटना, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और केरल के पलक्कड़ में भी इसके तहत प्रदर्शन हुए हैं. अमेरिका में रहने वाले अभिजीत दीपके ने सिर्फ 22 लोगों के साथ इस अभियान की शुरुआत की थी. अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का नेतृत्व करते हैं. इसके बाद आंदोलन का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया गया.