Diwali 2026 Shubh Muhurat: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व होता है. हालांकि, अगर आप शाम के शुभ मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाए हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. दिवाली की रात निशीथ काल में भी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. साल 2026 में निशीथ काल करीब 50 मिनट का रहेगा. धार्मिक मान्यताओं मान्यताओं के अनुसार, इस समय की जाने वाली पूजा का विशेष महत्व होता है. आखिर निशीथ काल क्या है और इस दौरान विशेष पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं.
दिवाली 2026 तिथि और मुहूर्त
दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
निशीथ काल का मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक
क्या होता है निशीथ काल?
निशिता काल रात का वह समय होता है, जो आधी रात के आसपास पड़ता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इसे साधना, मंत्र जाप और विशेष पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. यह समय सामान्य रूप से रात के सबसे शांत पहर से जुड़ा होता है. इस दौरान वातावरण में शांति रहती है, इसलिए लोग एकाग्र होकर पूजा-पाठ और ध्यान कर सकते हैं.
निशिता काल में क्यों होती है विशेष पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रातनिशीथ काल में मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा और मंत्र जाप किया जाता है. माना जाता है कि इस समय की गई साधना से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है. कई परंपराओं मेंनिशीथ काल को तंत्र साधना और विशेष अनुष्ठानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान मां लक्ष्मी के साथ मां काली और भगवान कुबेर की आराधना करने की भी परंपरा है.
निशिता काल में किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप दिवाली की रात निशिता काल में पूजा करना चाहते हैं, तो सबसे पहले पूजा स्थल को साफ रखें. मां लक्ष्मी के सामने दीपक जलाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं. इस दौरान मन को शांत रखें और किसी तरह की जल्दबाजी न करें. पूजा में दिखावे से ज्यादा श्रद्धा और साफ मन का महत्व माना जाता है.