हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धन त्रयोदशी यानी धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. इस साल धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा की पूजा भी होती है. शास्त्रों में कुबेर महाराज को देवताओं के खजाने का संरक्षक बताया गया है. लेकिन क्या जानते हैं कि भगवान कुबेर का वाहन एक नर यानी मनुष्य है. इसके पीछे एक खास धार्मिक और प्रतीकात्मक मान्यता जुड़ी हुई है. आइए जानते हैं.
भगवान कुबेर को धन-संपत्ति और ऐश्वर्य का अधिपति माना गया है. उन्हें यक्षों का राजा भी कहा जाता है. पद्म पुराण और लिंग पुराण के अनुसार, नर यानी मनुष्य कुबेर महाराज की सवारी हैं. इसके पीछे एक खास संदेश छिपा हुआ है. दरअसल, धन के अधिपति कुबेर महाराज हैं. लेकिन धन का सबसे वास्तविक उपयोग मनुष्य द्वारा ही किया जा सकता है. इसलिए मानव जीवन में ही धन का सर्वाधिक महत्व है. देवता और राक्षस भले ही कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों. लेकिन धन का महत्व और नियंत्रण मानव जीवन में ही सबसे ज्यादा है.
एक इंसान अपनी सारी जिंदगी धन कमाने में लगा देता है. फिर उसे अपने परिवार के पालन-पोषण में खर्च करता है. समय के साथ आगे बढ़ते हुए वह महत्वकांक्षी भी होता है. उसकी जरूरतें और ख्वाहिश बढ़ती जाती हैं. धन की दौड़ में हर इंसान आगे ही रहना चाहता है. लेकिन कई बार पैसे की यह भूख इंसान को अपना गुलाम बना लेती है. नतीजन धन की मांग इंसान को पूरी तरह अपने वश में ले लेती है और कुछ भी करवा सकती है.
भगवान कुबेर का नर वाहन यही संकेत देता है कि धन के पीछे ज्यादा दौड़ने वाला धन का ही गुलाम हो जाता है. अगर आपने धन की जरूरत को नियंत्रित नहीं किया तो धन आपको नियंत्रित कर लेगा. इसलिए धन को सिर्फ कमाना या जोड़कर रखना जरूरी नहीं, बल्कि उसके उपयोग और जरूरत पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है.
कुबेर के नर वाहन की कथा
लोक परंपरा में भगवान कुबेर के वाहन को लेकर एक कथा बहुत प्रचलित है. कहते हैं कि जब भगवान शिव ने कुबेर को यक्षों का राजा और धन का अधिपति बनाया, तब उनके वाहन को लेकर विचार किया गया. इस दौरान यह सवाल उठा कि कुबेर के लिए सबसे उपयुक्त वाहन कौन-सा होगा. कथा के मुताबिक, तब यह विचार सामने आया कि धन का उपयोग सबसे अधिक पृथ्वी लोक पर रहने वाले मनुष्य ही करते हैं. मनुष्य ही धन कमाता है. उसका संग्रह करता है और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उसे खर्च करता है. इसी आधार पर नर यानी मानव को कुबेर का वाहन माना गया.