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गाय-भैंस के शरीर पर दिख रही हैं गांठें? तुरंत उठाएं ये कदम वरना जा सकती है जान

गाय-भैंसों में लम्पी स्किन डिजीज का संक्रमण पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर असर डाल सकता है. इस बीमारी में तेज बुखार के साथ शरीर पर सख्त गांठें निकलने लगती हैं. मच्छर, मक्खी और दूसरे कीड़े इसके फैलने की बड़ी वजह हैं. जानिए बीमारी के लक्षण क्या हैं, पशु बीमार हो जाए तो क्या करना चाहिए और सरकारें बचाव के लिए कौन से अभियान चला रही हैं.

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मवेशियों में लम्पी स्किन डिजीज समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती है. (File Photo)
मवेशियों में लम्पी स्किन डिजीज समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती है. (File Photo)

गाय-भैंसों में होने वाली लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) पशुपालकों के लिए चिंता की वजह बन सकती है. यह एक वायरल बीमारी है, जिसमें पशुओं को तेज बुखार आता है और शरीर पर जगह-जगह गांठें निकलने लगती हैं. समय पर पहचान और सही देखभाल नहीं होने पर पशु कमजोर हो सकता है और उसका दूध देना भी कम हो जाता है. गंभीर मामलों में दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानें और बचाव के उपाय अपनाएं.

क्या है लम्पी स्किन डिजीज और कैसे फैलती है?

लम्पी स्किन डिजीज एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे पशुओं को प्रभावित करता है. यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस (Capripoxvirus) से होती है. इसका संक्रमण ज्यादातर मच्छर, मक्खी, किलनी और खून चूसने वाले दूसरे कीड़ों के जरिए फैलता है. संक्रमित पशु के संपर्क, उसके इस्तेमाल की चीजों और दूषित वातावरण से भी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है.

पशुओं में दिखते हैं ये लक्षण

इस बीमारी में शुरुआत में पशु को तेज बुखार आ सकता है. इसके बाद शरीर, गर्दन, सिर और पैरों पर छोटी-बड़ी सख्त गांठें दिखाई देने लगती हैं. इनके अलावा पशुओं में ये लक्षण भी दिख सकते हैं:

  • तेज बुखार और सुस्ती.
  • खाना-पीना कम कर देना.
  • शरीर पर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें निकलना.
  • आंख और नाक से पानी या स्राव आना.
  • पैरों में सूजन और चलने में परेशानी.
  • मुंह से लार गिरना.
  • दूध देने की क्षमता में कमी.

कुछ पशुओं में गांठों के आसपास घाव भी बन सकते हैं. बीमारी का असर पशु की सेहत, दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है. कमजोर, कम उम्र और पहले से बीमार पशुओं में परेशानी ज्यादा हो सकती है.

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पशु में लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें?

अगर गाय या भैंस में बुखार, शरीर पर गांठें या बीमारी के दूसरे लक्षण दिखाई दें, तो पशुपालक को तुरंत नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

  • बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें.
  • उसके खाने और पानी के बर्तन अलग कर दें.
  • बीमार पशु को खुले में दूसरे पशुओं के साथ चरने न भेजें.
  • पशु के रहने की जगह को साफ और सूखा रखें.
  • बीमारी की जानकारी पशु चिकित्सा विभाग को दें.
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा या इंजेक्शन न दें.

लम्पी स्किन डिजीज का कोई खास एंटीवायरल इलाज नहीं है. पशु चिकित्सक बुखार, दर्द, घाव और संक्रमण से जुड़ी परेशानियों के हिसाब से इलाज करते हैं. इसलिए घरेलू नुस्खों या खुद से दवा देने के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

बीमारी से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

लम्पी स्किन डिजीज से बचाव में टीकाकरण सबसे अहम है. पशुपालकों को अपने स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण पशु चिकित्सक की सलाह और तय कार्यक्रम के अनुसार कराना चाहिए. इसके साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं:

1. टीकाकरण कराएं: अपने इलाके में चल रहे सरकारी टीकाकरण अभियान की जानकारी लें और पात्र स्वस्थ पशुओं को समय पर टीका लगवाएं.

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2. मच्छर-मक्खियों से बचाएं: पशुशाला में कीड़े-मकोड़ों को पनपने से रोकें. पानी जमा न होने दें और जरूरत के मुताबिक सुरक्षित कीट नियंत्रण के उपाय अपनाएं.

3. सफाई रखें: पशुशाला, फर्श, बर्तन और आसपास की जगह की नियमित सफाई करें.

4. नए पशु को अलग रखें: बाहर से खरीदे गए पशु को कुछ समय तक बाकी पशुओं से अलग रखकर उसकी निगरानी करें. पशु चिकित्सक की सलाह के बाद ही उसे झुंड में शामिल करें.

5. पशुओं की आवाजाही सीमित करें: बीमारी फैलने की स्थिति में पशुओं को दूसरे गांव या पशु बाजार में ले जाने से बचें. स्थानीय प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग की सलाह मानें.

6. रोज निगरानी करें: पशु के खाने-पीने, दूध देने और शरीर पर गांठ या सूजन जैसे लक्षणों पर नजर रखें.

सरकार चला रही टीकाकरण और जागरूकता अभियान

लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर टीकाकरण, निगरानी और बीमारी पर नियंत्रण के उपाय कर रही है. पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने राज्यों को प्रभावित इलाकों में टीकाकरण, बीमार पशुओं को अलग रखने, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम जैसे कदम उठाने की सलाह दी है. टीकाकरण तेज करने के साथ जिला और ब्लॉक स्तर पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए टीमें बनाई हैं. पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

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केंद्र सरकार के 8 सितंबर 2026 के अपडेट के मुताबिक, देश में अब तक 36.18 करोड़ से ज्यादा पशुओं को लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए टीका लगाया जा चुका था. सरकार ने राज्यों को खासतौर पर कम उम्र के पशुओं और बछियों के टीकाकरण पर ध्यान देने को कहा है. पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बीमारी के लक्षण दिखने का इंतजार न करें. समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई, कीड़ों पर नियंत्रण और बीमार पशु को अलग रखने जैसे कदम संक्रमण का खतरा कम करता है.

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