scorecardresearch
 

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या कल, इस दिन भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां

इस साल आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे से लेकर 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे तक रहेगी. ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मान्य है. ज्योतिषचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस दिन तीन गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए.

Advertisement
X
आषाढ़ अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, संयम और पितरों के स्मरण का माना जाता है. (Photo: ITG)
आषाढ़ अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, संयम और पितरों के स्मरण का माना जाता है. (Photo: ITG)

आषाढ़ अमावस्या आने वाली है. वैसे तो  हिंदू धर्म में हर अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है. लेकिन आषाढ़ मास की अमावस्या का विशेष महत्व है. इस तिथि को पितरों की शांति, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए तर्पण, दान और भगवान शिव की पूजा से पितृ प्रसन्न होते हैं. जीवन के कष्ट और बाधाएं दूर होने लगती हैं. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र का कहना है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए.

आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है?
इस साल आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे से लेकर 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे तक रगेगी. ऐसे में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मान्य है.

आषाढ़ अमावस्या पर न करें ये 3 गलतियां

1. मांस-शराब का सेवन
आषाढ़ अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, संयम और पितरों के स्मरण का माना जाता है. इसलिए इस दिन मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि ऐसे खाद्य पदार्थ मन की शुद्धता और पूजा-पाठ की भावना को प्रभावित कर सकते हैं.

2. झगड़ा, क्रोध, विवाद
इसके साथ ही किसी भी व्यक्ति से विवाद, क्रोध या कटु वचन बोलने से भी बचना चाहिए. इस दिन शांत और सकारात्मक व्यवहार रखने को शुभ माना गया है, क्योंकि ऐसा करने से मानसिक संतुलन बना रहता है और धार्मिक अनुष्ठानों का फल भी बेहतर माना जाता है.

Advertisement

3. नए कार्य की शुरुआत
विवाह, गृह प्रवेश, नई दुकान का उद्घाटन या अन्य मांगलिक कार्य भी इस तिथि पर नहीं किए जाते हैं. परंपरा के अनुसार, अमावस्या को पितरों के तर्पण और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित माना गया है, इसलिए नए शुभ कार्यों की शुरुआत किसी अन्य शुभ मुहूर्त में करना अधिक उचित माना जाता है.

आषाढ़ अमावस्या पर क्या करें?
आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव की पूजा करें. यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करके पितरों का तर्पण करें. इसके बाद श्रद्धा भाव से अन्न और आवश्यक वस्तुओं का दान करें. इस दिन आप चावल, दाल, आटा, घी, गुड़, नमक, मौसमी फल, सब्जियां या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान कर सकते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement